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दहेज लोभी पति को सात वर्ष की कैद के साथ अर्थदंड
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आजमगढ़। दहेज हत्या के आरोपी पति को अदालत ने दोषी पाते हुए सात वर्ष की कैद की सजा सुनाई। साथ ही 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। मंगलवार को यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश सौरभ सक्सेना की अदालत ने सुनाई। इसी मामले की आरोपी सास को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मुकदमा के दौरान ससुर की मौत हो गई थी।
जिला जौनपुर थाना सराय ख्वाजा के तरसावा गांव निवासी कंचन गुप्ता की पुत्री प्रीति का विवाह सरायमीर थाना के रंगडीह गांव निवासी मंगला प्रसाद पुत्र मेवा लाल के साथ वर्ष 2016 में 26 फरवरी को हुई थी। शादी के बाद विवाहिता विदा होकर जब अपने ससुराल गई तो दहेज की मांग को लेकर उसे तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता रहा है। यह सिलसिला चलता रहा। इसी मांग को लेकर विवाहिता के घर वाले 10 अक्तूबर 2016 को प्रीति को जलाकर मार डाले। इस संबंध में मृतका की माता कंचन ने सरायमीर थाने में विवाहिता के पति मंगला, सास सुभावती, ससुर मेवा लाल के विरुद्ध दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। सरायमीर थाना पुलिस ने तीनों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांचोपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता शिवाश्रय राय ने कुल सात गवाहों को अदालत में पेश किया। शामिल गवाहों में वादी कंचन, पदारथ, रंजीत, विद्यासागर, संजय, हेड मुहर्रिर रामायण, विवेचक सीओ स्वतंत्र कुमार, डा.अब्दुल अजीज को बतौर साक्षी पेश किया। अपने तर्को को रखा। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद विवाहिता के आरोपी पति मंगला प्रसाद को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
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जिला जौनपुर थाना सराय ख्वाजा के तरसावा गांव निवासी कंचन गुप्ता की पुत्री प्रीति का विवाह सरायमीर थाना के रंगडीह गांव निवासी मंगला प्रसाद पुत्र मेवा लाल के साथ वर्ष 2016 में 26 फरवरी को हुई थी। शादी के बाद विवाहिता विदा होकर जब अपने ससुराल गई तो दहेज की मांग को लेकर उसे तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता रहा है। यह सिलसिला चलता रहा। इसी मांग को लेकर विवाहिता के घर वाले 10 अक्तूबर 2016 को प्रीति को जलाकर मार डाले। इस संबंध में मृतका की माता कंचन ने सरायमीर थाने में विवाहिता के पति मंगला, सास सुभावती, ससुर मेवा लाल के विरुद्ध दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। सरायमीर थाना पुलिस ने तीनों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांचोपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता शिवाश्रय राय ने कुल सात गवाहों को अदालत में पेश किया। शामिल गवाहों में वादी कंचन, पदारथ, रंजीत, विद्यासागर, संजय, हेड मुहर्रिर रामायण, विवेचक सीओ स्वतंत्र कुमार, डा.अब्दुल अजीज को बतौर साक्षी पेश किया। अपने तर्को को रखा। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद विवाहिता के आरोपी पति मंगला प्रसाद को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
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