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खांसी और बुखार होने पर न करें लापरवाही, कराएं टीबी की जांच
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मुबारकपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर फल देते सीएमओ डा.एके मिश्?
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। खांसी और बुखार को लेकर लापरवाही घातक हो सकती है। यह उन महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है जो गर्भावस्था में हैं। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का जोखिम बना रहता है। इसलिए किसी भी तरह के लक्षण को अनदेखा न करें। अगर किसी गर्भवती को ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) यानि तपेदिक रोग हो जाए, तो यह चिंता का विषय बन सकता है।
जिला महिला चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. मंजूला सिंह ने बताया कि गर्भावस्था के समय शरीर में हो रहे हर छोटी बड़ी समस्या के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। कोरोना और टीबी सामान्य लक्षण होने के कारण टीबी से जुड़ी जानकारी का होना बेहद जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान ट्यूबरकुलोसिस में कई तरह के जांच की सलाह दी जाती है, जिनकी मदद से टीबी से जुड़ी जानकारी मिल जाती है। अगर इन जांचों के बाद गर्भवती महिला में टीबी का पता चल जाता है, तो इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है।
ऐसे लक्षणों पर रहें सचेत
आजमगढ़। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी होना, रात में पसीना आना, वजन कम होना, प्रेगनेंसी में सीने में दर्द या सांस की तकलीफ, गर्भावस्था में बुखार आना, बहुत थकान या बेचैनी होना। इन कारणों से शिशु को भी नुकसान हो सकता है। जन्म के समय शिशु का वजन कम होना, टीबी के कारण समय से पहले जन्म, शिशु का जन्म होना, शिशु जन्म के समय से ही टीबी इंफेक्शन से संक्रमित होना, जन्मजात लिवर और श्वसन की समस्या, गर्भनाल से टीबी इंफेक्शन होना। हेपेटोसप्लेनोमेगाली यानी लिवर और स्प्लीन संबंधी समस्या, श्वसन से जुड़ी परेशानी, टीबी के कारण नवजात शिशु को बुखार होना के साथ ही शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. परवेज अख्तर ने बताया कि ट्यूबरकुलोसिस बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है जो आमतौर पर लंग्स यानि फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इस रोग का असर धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों पर इसका प्रभाव पड़ने लगता है। टीबी हो जाने पर तुरंत इलाज करवाना चाहिए।
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अब तक मिले 5833 मरीज, 1731 का इलाज
आजमगढ़। सीएमओ डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि जनवरी 2020 से अब तक जिले में कुल 5833 क्षय रोगियों को चिन्हित कर इलाज किया गया। इसमें 1731 मरीजों का पूर्ण रूप से ठीक हो गए हैं। 3387 क्षय रोगियों को 6075000 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अभी 4102 क्षय रोगियों का इलाज किया जा रहा है।
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जिला महिला चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. मंजूला सिंह ने बताया कि गर्भावस्था के समय शरीर में हो रहे हर छोटी बड़ी समस्या के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। कोरोना और टीबी सामान्य लक्षण होने के कारण टीबी से जुड़ी जानकारी का होना बेहद जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान ट्यूबरकुलोसिस में कई तरह के जांच की सलाह दी जाती है, जिनकी मदद से टीबी से जुड़ी जानकारी मिल जाती है। अगर इन जांचों के बाद गर्भवती महिला में टीबी का पता चल जाता है, तो इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। सभी सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है।
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ऐसे लक्षणों पर रहें सचेत
आजमगढ़। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी होना, रात में पसीना आना, वजन कम होना, प्रेगनेंसी में सीने में दर्द या सांस की तकलीफ, गर्भावस्था में बुखार आना, बहुत थकान या बेचैनी होना। इन कारणों से शिशु को भी नुकसान हो सकता है। जन्म के समय शिशु का वजन कम होना, टीबी के कारण समय से पहले जन्म, शिशु का जन्म होना, शिशु जन्म के समय से ही टीबी इंफेक्शन से संक्रमित होना, जन्मजात लिवर और श्वसन की समस्या, गर्भनाल से टीबी इंफेक्शन होना। हेपेटोसप्लेनोमेगाली यानी लिवर और स्प्लीन संबंधी समस्या, श्वसन से जुड़ी परेशानी, टीबी के कारण नवजात शिशु को बुखार होना के साथ ही शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. परवेज अख्तर ने बताया कि ट्यूबरकुलोसिस बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है जो आमतौर पर लंग्स यानि फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इस रोग का असर धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों पर इसका प्रभाव पड़ने लगता है। टीबी हो जाने पर तुरंत इलाज करवाना चाहिए।
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अब तक मिले 5833 मरीज, 1731 का इलाज
आजमगढ़। सीएमओ डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि जनवरी 2020 से अब तक जिले में कुल 5833 क्षय रोगियों को चिन्हित कर इलाज किया गया। इसमें 1731 मरीजों का पूर्ण रूप से ठीक हो गए हैं। 3387 क्षय रोगियों को 6075000 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अभी 4102 क्षय रोगियों का इलाज किया जा रहा है।