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यूरोपियन कल्चर को त्यागें नई पीढ़ी की युवतियां

Sat, 21 Nov 2015 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Sat, 21 Nov 2015 11:34 PM IST
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Discard the new generation of European culture women
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली के वाइस चांसलर प्रो. तलत अहमद ने शनिवार को कहा कि हजरत मोहम्मद साहब की बीवियां मुस्लिम समाज की मां हैं। उनके उसूलों को अपनाने से नई पीढ़ी की युवतियाें को नई राह हासिल होगी। जबकि नई पीढ़ी की युवतियां यूरोपियन कल्चर को अपना रही हैं।
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 उन्हें इसको त्याग देना चाहिए। नई पीढ़ी की युवतियां इस्लाम के दायरे में रहकर समाज के लिए भी बहुत कुछ कर सकती हैं। वह शिब्ली नेशनल पीजी कालेज में शिरत-ए-उम्मत-उल- मोमनीन (हजरत मोहम्मद साहब की पत्नियों के उदात्त चरित्र) विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में अध्यक्षीय भाषण कर रहे थे।
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मुख्य अतिथि जामिया अजहर विश्वविद्यालय मिस्र के सेवानिवृत्त प्रोफेसर अहमद अब्दुर्रहमान अलकाजी ने कहा कि इस्लाम ने हमेशा औरतों को ऊंचा मुकाम और इज्जत दी है। अल्लामा शिब्ली नोमानी ने भी अपनी किताब शिरतुननवी और शिरते आएशा के जरिये मुस्लिम समाज के लोगों को हजरत मोहम्मद साहब के जीवन आदर्शों और उनकी बीवियों के किरदार को अपनाने का पैगाम दिया।
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ईरान से आए करीम यासीन मलिक ने कहा कि हजरत खदीजा रिजअल्ला अनहा और हजरत आएशा से बड़ा आदर्श कोई हो ही नहीं सकता है। अगर हमें मां के बारे में जानना है तो पहले उनकी जुबान अरबी जानना जरूरी है। हर मुसलमान को इस्लामिक अमली जिंदगी अपनाना चाहिए। कहा कि कुरआन समझकर पढ़ने से बहुत से जानकारी हासिल होगी। स्वागत कालेज के प्राचार्य गयास असद खान, प्रबंध समिति के अध्यक्ष रिजवान फारूकी और मैनेजर न्याज अहमद जमाली ने किया।

जामिया अजहर विश्वविद्यालय मिस्र के सेवानिवृत्त प्रोफेसर अहमद अब्दुर्रहमान अलकाजी ने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी की विद्वता का लोहा देश ही नहीं, विदेश में भी लोग मानते थे। वे इस्लामिक शिक्षा के लिए सवा सौ साल पहले मिस्र गए थे और एक महीने में वहां की जुबान सीख ली। उनका मानना था कि जब तक दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालिम नहीं दी जाएगी, तब तक लोग दीन इस्लाम से भटकते रहेंगे।


इस दौरान कार्यक्रम के संयोजक डा. मोहम्मद ताहिर की किताब शिरत उम्मेतुल मोमनीन और नेशाबे उर्दू का विमोचन किया गया। सेमिनार को शिब्ली एकेडमी के स्कालर उमैर सिद्दीक नदवी, मौलाना अंसार जुबैर ने भी संबोधित किया। इस मौके पर डा. आलमगीर, डा. मुनीर अहमद, डा. वीके सिंह, डा. सलमान अंसारी, डा. शबाबुद्दीन, मोहम्मद नोमान, सबीह आलम नोमानी आदि उपस्थित रहे।
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