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राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त जीजीआईसी प्रधानाचार्य के खिलाफ एफआईआर का निर्देश
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Fri, 23 Mar 2018 12:00 AM IST
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FIR
राजकीय बालिका इंटर कालेज की प्रभारी प्रधानाचार्या और 2016 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अनवर जहां पर एफआईआर दर्ज कराने का संयुक्त शिक्षा निदेशक एपी वर्मा ने निर्देश दिया है। यह कार्रवाई बोर्ड के उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का बिल-बाउचर पर तत्कालीन डीआईओएस के फर्जी हस्ताक्षर बने होने के आरोप में किया गया है। जेडी ने डीआईओएस को कार्रवाई का पत्र भेज कर आख्या देने का निर्देश दिया है।
संयुक्त शिक्षा निदेशक एपी वर्मा के निर्देश में बताया कि राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बोर्ड कॉपियों के मूल्यांकन के लिए हर वर्ष केंद्र बनाया जाता है। मूल्यांकन बिल भुगतान का बिल-बाउचर प्रधानाचार्य द्वारा डीआईओएस का हस्ताक्षर करा कर प्रस्तुत किया जाता है।
वर्ष 2014 के लिए प्रभारी प्रधानाचार्य अनवरजहां ने 88314 रुपये और 2015 के लिए 37159 रुपये का बिल बाउचर लगाया था। जांच के दौरान तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत सिंह यादव (वर्तमान में मिर्जापुर मंडल में उपनिदेशक माध्यमिक के पद पर हैं) का हस्ताक्षर संदिग्ध पाया गया।
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जांच के दौरान उन्होंने बाउचर पर अपने हस्ताक्षर होने से इंकार कर दिया। फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर जेडी ने डीआईओएस को पत्र भेज कर जीजीआईसी की प्रभारी प्रधानाचार्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया।
मुझे अभी जेडी के आदेश की जानकारी नहीं हुई है। जिसके कारण मैं अभी इस प्रकरण पर कुछ नहीं कर सकता हू। जेडी का पत्र देखने के बाद ही कोई जानकारी उपलब्ध करा सकूंगा।
डॉ.वीके शर्मा, डीआईओएस, आजमगढ़।
सेवा विस्तार के लिए जेडी मांग रही पांच लाख
आजमगढ़। जेडी द्वारा एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश पर प्रभारी प्रधानाचार्य अनवर जहां से कहा कि फर्जी ढंग से उन्हें फंसाने की यह साजिश है। पूर्व डीआईओएस चंद्रजीत सिंह यादव ने एक साथ ही 2012, 13, 14 और 15 के बिल बाउचर पर हस्ताक्षर किया था। राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता को पांच साल का सेवा विस्तार मिलता है। 31 मार्च को मेरा रिटायरमेंट है। मैंने सेवा विस्तार के लिए आवेदन किया। जिस पर जेडी ने पांच लाख रुपये की मांग की। पैसा न देने के चलते ही उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है।
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संयुक्त शिक्षा निदेशक एपी वर्मा के निर्देश में बताया कि राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बोर्ड कॉपियों के मूल्यांकन के लिए हर वर्ष केंद्र बनाया जाता है। मूल्यांकन बिल भुगतान का बिल-बाउचर प्रधानाचार्य द्वारा डीआईओएस का हस्ताक्षर करा कर प्रस्तुत किया जाता है।
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वर्ष 2014 के लिए प्रभारी प्रधानाचार्य अनवरजहां ने 88314 रुपये और 2015 के लिए 37159 रुपये का बिल बाउचर लगाया था। जांच के दौरान तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत सिंह यादव (वर्तमान में मिर्जापुर मंडल में उपनिदेशक माध्यमिक के पद पर हैं) का हस्ताक्षर संदिग्ध पाया गया।
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जांच के दौरान उन्होंने बाउचर पर अपने हस्ताक्षर होने से इंकार कर दिया। फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर जेडी ने डीआईओएस को पत्र भेज कर जीजीआईसी की प्रभारी प्रधानाचार्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया।
मुझे अभी जेडी के आदेश की जानकारी नहीं हुई है। जिसके कारण मैं अभी इस प्रकरण पर कुछ नहीं कर सकता हू। जेडी का पत्र देखने के बाद ही कोई जानकारी उपलब्ध करा सकूंगा।
डॉ.वीके शर्मा, डीआईओएस, आजमगढ़।
सेवा विस्तार के लिए जेडी मांग रही पांच लाख
आजमगढ़। जेडी द्वारा एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश पर प्रभारी प्रधानाचार्य अनवर जहां से कहा कि फर्जी ढंग से उन्हें फंसाने की यह साजिश है। पूर्व डीआईओएस चंद्रजीत सिंह यादव ने एक साथ ही 2012, 13, 14 और 15 के बिल बाउचर पर हस्ताक्षर किया था। राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता को पांच साल का सेवा विस्तार मिलता है। 31 मार्च को मेरा रिटायरमेंट है। मैंने सेवा विस्तार के लिए आवेदन किया। जिस पर जेडी ने पांच लाख रुपये की मांग की। पैसा न देने के चलते ही उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है।