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मकर संक्रांति पर श्रद्घालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

Wed, 15 Jan 2020 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 11:09 PM IST
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Devotees dip their faith on Makar Sankranti
शहर के मातबरगंज से मकर संक्रंति के लिए के पतंगों की खरिदारी करते बच्चें। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। दान-पुण्य एवं हर्ष का त्यौहार मकर संक्रांति बुधवार को जनपद में धूमधाम से मनाई गई। मंगलवार देर रात दो बजकर आठ मिनट पर सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया। बुधवार को सूर्योदय होने के साथ ही दान-पुण्य और पारंपरिक रस्मों को निभाने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह लोगों ने स्नान कर दान के लिए अन्न को छुआ इसके बाद घरों में खिचड़ी बनाई गई।
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मकर संक्रांति के अवसर पर सुबह से ही जनपद के प्रसिद्घ स्थलों पर श्रद्घालुओं की स्नान के लिए भीड़ उमड़ी रही। फूलपुर तहसील क्षेत्र के दुर्वासा धाम पर स्थित तमसा मंजूषा तट, महराजगंज स्थित भैरो बाबा धाम, रानी की सराय क्षेत्र स्थित अवंतिकापुरी धाम और निजामाबाद स्थित ऋषि दत्तात्रेय धाम पर भोर से ही श्रद्घालुओं का तांता लगा हुआ था। लोगों ने तमसा नदी और सरयू नदी के पवित्र जल में स्नान पर भगवान की पूजा अर्चना की और हाथ से छूने के बाद अन्न का दान किया। इसके बाददिनभर युवाओं में पतंगें उड़ाने की होड़ मची रही। शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और घरों की छतें आबाद रही। शहर स्थित मकानों की छतें ये काटा...वो काटा...की आवाजों से गूंजती रही। रंग-बिरंगी पतंगों से नीला गगन सराबोर हो गया। पतंगबाज डीजे की धुनों पर थिरकते रहे। नगर के सिधारी स्थित पतंग की दुुकान पर पतंग खरीदने वालों की भीड़ उमड़ी रही। माना जाता है कि पौष मास के शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति को सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवी-देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात के तौर पर माना गया है। मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान, तप, जप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस अवसर पर किया गया दान सौ गुना होकर प्राप्त होता है। मकर संक्रांति के दिन घी और कंबल के दान का भी विशेष महत्व है। इस त्योहार का संबंध केवल धर्मिक ही नहीं है बल्कि इसका संबंध ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। इस दिन से दिन एंव रात दोनों बराबर होते है। इस दिन सूर्य से निकलने वाली अद्भुत किरणें जब श्रद्धालुओं पर पड़ती हैं तो उनमें नई ऊर्जा का संचार होता है। आज के ही दिन से सूर्य उत्तरायण होने के कारण इस पर्व को उत्तरायणी के नाम से भी जाना जाता है।

शहर के बिलरिया की चुंगी पर मकर संक्रंति के अवसर पर लोगो को उपहार देते बीआरडी के कार्यकर्ता।।

शहर के बिलरिया की चुंगी पर मकर संक्रंति के अवसर पर लोगो को उपहार देते बीआरडी के कार्यकर्ता।।- फोटो : AZAMGARH

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