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विकास नहीं तो वोट नहीं की आवाज बुलंद
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 09 Nov 2015 12:20 AM IST
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ग्राम प्रधान पद के चुनाव के लिए बजे बिगुल को 24 घंटे भी नहीं हुआ कि गांवों में इसकी बानगी अभी से दिखनी शुरू हो गई।
जब अहरौला विकास खंड के युधिष्ठिर पट्टी गांव की नट बस्ती के लोगों ने विकास नहीं तो वोट नहीं का बैनर बस्ती के रास्ते पर लगा दिया।
अहरौला विकास खंड के युधिष्ठिर पट्टी गांव की नट बस्ती आजादी के इतने साल बाद भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है। विकास की कोई हल्की सी किरण भी इस बस्ती को छूकर नहीं निकली।
बस्ती में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बस्ती में न तो रोड है और ना ही चकरोड, ना तो बिजली की रोशनी है और ना ही पीने के पानी के लिए हैंडपंप। बस्ती में 30 परिवारों के करीब 150 लोग निवास करते हैं।
यह लोग घर-घर जाकर भिक्षाटन कर जीविकोपार्जन कर रहे हैं। प्रधानी चुनाव में हिस्सा ले चुके बस्ती के लोगों के पास न तो गरीबी रेखा का कार्ड है और न ही किसी ने इन्हें कोई सरकारी सहायता दिलवाई।
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मगर अब कुछ युवाओं की अगुवाई ने इनको एकता के सूत्र में बांध कर अपने हक की लड़ाई के लिए बगावत करने को विवश किया है।
जिसको लेकर गांव की प्रधानी का सपना संजोए लोगों को इनके सवाल का जवाब देने में या आश्वासन देने में पीछे हटना पड रहा है।
बस्ती के मेवाती, भागी, जुगना, जालिम, भीमसेन, नरायन, शकुंतला, फरजान, सकलू, दिलदार, जंगली आदि का कहना है कि गांव में विकास नहीं तो वोट नहीं । जो हमारी मांगें पूरी करेगा हमारा वोट उसी को पड़ेगा।
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जब अहरौला विकास खंड के युधिष्ठिर पट्टी गांव की नट बस्ती के लोगों ने विकास नहीं तो वोट नहीं का बैनर बस्ती के रास्ते पर लगा दिया।
अहरौला विकास खंड के युधिष्ठिर पट्टी गांव की नट बस्ती आजादी के इतने साल बाद भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है। विकास की कोई हल्की सी किरण भी इस बस्ती को छूकर नहीं निकली।
बस्ती में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बस्ती में न तो रोड है और ना ही चकरोड, ना तो बिजली की रोशनी है और ना ही पीने के पानी के लिए हैंडपंप। बस्ती में 30 परिवारों के करीब 150 लोग निवास करते हैं।
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यह लोग घर-घर जाकर भिक्षाटन कर जीविकोपार्जन कर रहे हैं। प्रधानी चुनाव में हिस्सा ले चुके बस्ती के लोगों के पास न तो गरीबी रेखा का कार्ड है और न ही किसी ने इन्हें कोई सरकारी सहायता दिलवाई।
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मगर अब कुछ युवाओं की अगुवाई ने इनको एकता के सूत्र में बांध कर अपने हक की लड़ाई के लिए बगावत करने को विवश किया है।
जिसको लेकर गांव की प्रधानी का सपना संजोए लोगों को इनके सवाल का जवाब देने में या आश्वासन देने में पीछे हटना पड रहा है।
बस्ती के मेवाती, भागी, जुगना, जालिम, भीमसेन, नरायन, शकुंतला, फरजान, सकलू, दिलदार, जंगली आदि का कहना है कि गांव में विकास नहीं तो वोट नहीं । जो हमारी मांगें पूरी करेगा हमारा वोट उसी को पड़ेगा।