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फिर निकला 100 करोड़ के घोटाले का जिन्न
आजमगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Aug 2017 11:39 PM IST
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- फोटो : google
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प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के जरिए बीते 10 वर्षों में सौ करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ था। इसमें छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति, कन्या विद्याधन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कई मद शामिल थे। विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ये खेल खेला गया था। करीब 2.80 करोड़ के घोटाले के संबंध में संबंधित थानों में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन प्रशासन अब तक न तो किसी को गिरफ्तार कर सका, न ही धन की रिकवरी हुई। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त ने डीएम से घोटाले से संबंधित पत्रावलियां तलब की हैं। अधिकारियों को फटकार लगाते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि वर्ष 2007 से 2013 तक विभिन्न मदों में मिलीभगत कर वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर तत्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद ने पूरे मामले की जांच कराई थी। सीडीओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम ने जांच में पाया कि करीब 50 से अधिक कॉलेजों ने अपने-अपने विद्यालय में छात्रों की संख्या फर्जी/काल्पनिक दिखाकर दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति हजम कर लिया। वर्ष 2012-13 में जनता इंटर कालेज पतिला गौसपुर में महज 72 छात्रों के पंजीकरण हुए थे। इसके सापेक्ष विद्यालय में 1177 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति फर्जी खातों के माध्यम से ले ली गई थी। इसी प्रकार अन्य विद्यालय भी ये खेल हुआ है। धन का भुगतान जिले के यूनियन बैंक आफ इंडिया और जिला सहकारी बैंक के 37 से अधिक शाखाओं से किया गया है। बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला उजागर होने और तथ्य सबूत मिलने पर 2.80 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में जिले के कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई भी महज रिपोर्ट दर्ज करने तक ही सिमटकर रह गई।
बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़ा के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने पर 22 मार्च 2016 को तत्कालीन डीएम सुहास एलवाई ने कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा, लेकिन इसका भी कोई खास असर नहीं दिखा। मामला ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है। शुक्रवार को मंडलायुक्त के रविंद्र नायक ने जिलाधिकारी से घोटाले की फाइल तलब कर ली। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीएम और एसपी को निर्देश दिया है।
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डीएम से घोटाले के संबंध में जानकारी मांगी गई है। साथ हो दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को भी कहा गया है। आपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर जांच एजेंसी से मामले की जांच कराई जाएगी।
के रविंद्र नायक, कमिश्नर
बता दें कि वर्ष 2007 से 2013 तक विभिन्न मदों में मिलीभगत कर वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर तत्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद ने पूरे मामले की जांच कराई थी। सीडीओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम ने जांच में पाया कि करीब 50 से अधिक कॉलेजों ने अपने-अपने विद्यालय में छात्रों की संख्या फर्जी/काल्पनिक दिखाकर दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति हजम कर लिया। वर्ष 2012-13 में जनता इंटर कालेज पतिला गौसपुर में महज 72 छात्रों के पंजीकरण हुए थे। इसके सापेक्ष विद्यालय में 1177 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति फर्जी खातों के माध्यम से ले ली गई थी। इसी प्रकार अन्य विद्यालय भी ये खेल हुआ है। धन का भुगतान जिले के यूनियन बैंक आफ इंडिया और जिला सहकारी बैंक के 37 से अधिक शाखाओं से किया गया है। बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला उजागर होने और तथ्य सबूत मिलने पर 2.80 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में जिले के कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई भी महज रिपोर्ट दर्ज करने तक ही सिमटकर रह गई।
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बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़ा के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने पर 22 मार्च 2016 को तत्कालीन डीएम सुहास एलवाई ने कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा, लेकिन इसका भी कोई खास असर नहीं दिखा। मामला ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है। शुक्रवार को मंडलायुक्त के रविंद्र नायक ने जिलाधिकारी से घोटाले की फाइल तलब कर ली। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीएम और एसपी को निर्देश दिया है।
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डीएम से घोटाले के संबंध में जानकारी मांगी गई है। साथ हो दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को भी कहा गया है। आपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर जांच एजेंसी से मामले की जांच कराई जाएगी।
के रविंद्र नायक, कमिश्नर