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अनुशासनिक कार्रवाई के साथ होगी एफआईआर
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लोगो आजमगढ़। 16 मार्च को इटौरा स्थित जिला कारागार में मोबाइल पकड़े जाने के बाद हुए बवाल के प्रकरण में दोषी चिह्नित किए गए बंदी रक्षकों के खिलाफ चार पन्ने की विस्तृत जांच आख्या तैयार की गई है। रोस्टर वार इन्हें चिह्नित कर एफआईआर करने की संतुति डीएम ने पहले ही कर दी थी। बुधवार को चार्ज लेने पहुंचे वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा को डीएम ने रिपोर्ट के अनुसार एफआईआर कराने के निर्देश दिए। जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।
एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और एसपी सिटी कमलेश बहादुर ने 16 मार्च को संयुक्त रूप से छापेमारी कर 33 मोबाइल, 13 चार्जर और कई ईयरफोन बरामद किए थे। इससे नाराज बंदियों ने हंगमा शुरू कर किया था। जेल भीतर उत्पन्न बवाल को शांत कराने में पुलिस-प्रशासन को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ गया था। डीआईजी जेल की जांच के बाद तीन बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया गया था। डीएम और एसपी की रिपोर्ट पर जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम, जेलर हरीश कुमार, डिप्टी जेलर भोलानाथ अंबेडकर को भी निलंबित कर दिया गया था। जेल में बवाल की विस्तृत जांच रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है। जेल में मोबाइल चलने के लिए और बवाल के लिए सीधे तौर पर 32 बंदी रक्षकों को दोषी माना गया है। इन सभी के खिलाफ शासन की ओर से कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की संतुति की गई है। चार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में रोस्टरवार तैनात बंदी रक्षकों को चिह्नित किया गया है। इन सभी बंदी रक्षकों के खिलाफ एफआईआर की भी संतुति की गई है। बुधवार को चार्ज लेने पहुंचे वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा को जिलाधिकारी ने जल्द एफआईआर कराने के निर्देश दिए।
जेल अधीक्षक अनिल गौतम के निलंबन के बाद बिजनौर जेल से भेजे गए वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने बुधवार को जिलाधिकारी के समक्ष चार्ज ले लिया। उन्होंने कहा कि जेल से काफी सफाई हो चुकी है। जो बचा है उसे जल्द पूरा कराया जाएगा। अभी भी जेल में मोबाइल चलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जेल में जहां भी मोबाइल छिपाकर रखी गई है उन्हें निकलवाया जाएगा। यदि खुदाई करानी पड़ी तो वो भी कराई जाएगी।
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इटौरा स्थित जिला जेल में जेल अधिकारियों, कर्मचारियों से साठगांठ कर लंबे समय से धड़ल्ले से मोबाइल चलाई जा रही थी। अमर उजाला ने समय-समय पर इसकी खुलासा भी किया। अधिकारियों के ध्यान नहीं देने की नतीजा था कि 16 मार्च को जेल में उतना बड़ा बवाल हुआ। जांच के लिए जेल के अंदर पहुंचे अधिकारी भी अंदर का दृश्य देख दंग थे। दीवार को काटकर मोबाइल चार्जिंग की आदि के लिए जगह बनाया देख अधिकारी भी हतप्रभ थे। देर से ही सही लेकिन दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। नये वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने इसे आगे जारी रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि दीवारों आदि की अच्छे से रीपेयरिंग भी कराई जाएगी।
जेल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए नित नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। इस क्रम में जेल में प्रतिदिन आने और जाने वालों की सघन तलाशी लेने के लिए एसपी ने अलग से 16 महिला और पुरुष पुलिस वालों की ड्यूटी लगाई है। यह लोग दो पालियों में जेल के गेट पर ड्यूटी करते हुए सभी लोगों का पूरा विवरण भी दर्ज करेंगे। ताकि किसी भी प्रकार की घटना पर तत्काल संबंधित का रिकार्ड खंगालते हुए कार्रवाई की जा सके।
जेल के बाहर तैनात किए जाने वालों में छह दरोगा, चार महिला और चार पुरुष सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें कुछ कर्मचारी पुलिस लाइन से लिए गए हैं। जबकि कुछ को थानों से संबद्ध किया गया है। इन लोगों की दिन और रात दो पालियों में ड्यूटी लगाई जाएगी। बता दें कि अब तक जिले में घटित हुई ज्यादातर बड़े अपराधों का तार किसी न किसी माध्यम से जेल से जुड़ा हुआ है। पुलिस का पूरा प्रयास है कि जेल में आने और जाने वालों का पूरा रिकार्ड पुलिस के पास मौजूद रहेगा तो किसी भी घटना के समय जेल में आने वालों के रिकार्ड के जरिए घटना का खुलासा करने में काफी आसानी होगी। एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि दरोगा और सिपाहियों की ड्यूटी का चार्ट तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।
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एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और एसपी सिटी कमलेश बहादुर ने 16 मार्च को संयुक्त रूप से छापेमारी कर 33 मोबाइल, 13 चार्जर और कई ईयरफोन बरामद किए थे। इससे नाराज बंदियों ने हंगमा शुरू कर किया था। जेल भीतर उत्पन्न बवाल को शांत कराने में पुलिस-प्रशासन को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ गया था। डीआईजी जेल की जांच के बाद तीन बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया गया था। डीएम और एसपी की रिपोर्ट पर जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम, जेलर हरीश कुमार, डिप्टी जेलर भोलानाथ अंबेडकर को भी निलंबित कर दिया गया था। जेल में बवाल की विस्तृत जांच रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है। जेल में मोबाइल चलने के लिए और बवाल के लिए सीधे तौर पर 32 बंदी रक्षकों को दोषी माना गया है। इन सभी के खिलाफ शासन की ओर से कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की संतुति की गई है। चार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में रोस्टरवार तैनात बंदी रक्षकों को चिह्नित किया गया है। इन सभी बंदी रक्षकों के खिलाफ एफआईआर की भी संतुति की गई है। बुधवार को चार्ज लेने पहुंचे वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा को जिलाधिकारी ने जल्द एफआईआर कराने के निर्देश दिए।
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जेल अधीक्षक अनिल गौतम के निलंबन के बाद बिजनौर जेल से भेजे गए वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने बुधवार को जिलाधिकारी के समक्ष चार्ज ले लिया। उन्होंने कहा कि जेल से काफी सफाई हो चुकी है। जो बचा है उसे जल्द पूरा कराया जाएगा। अभी भी जेल में मोबाइल चलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जेल में जहां भी मोबाइल छिपाकर रखी गई है उन्हें निकलवाया जाएगा। यदि खुदाई करानी पड़ी तो वो भी कराई जाएगी।
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इटौरा स्थित जिला जेल में जेल अधिकारियों, कर्मचारियों से साठगांठ कर लंबे समय से धड़ल्ले से मोबाइल चलाई जा रही थी। अमर उजाला ने समय-समय पर इसकी खुलासा भी किया। अधिकारियों के ध्यान नहीं देने की नतीजा था कि 16 मार्च को जेल में उतना बड़ा बवाल हुआ। जांच के लिए जेल के अंदर पहुंचे अधिकारी भी अंदर का दृश्य देख दंग थे। दीवार को काटकर मोबाइल चार्जिंग की आदि के लिए जगह बनाया देख अधिकारी भी हतप्रभ थे। देर से ही सही लेकिन दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। नये वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके मिश्रा ने इसे आगे जारी रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि दीवारों आदि की अच्छे से रीपेयरिंग भी कराई जाएगी।
जेल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए नित नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। इस क्रम में जेल में प्रतिदिन आने और जाने वालों की सघन तलाशी लेने के लिए एसपी ने अलग से 16 महिला और पुरुष पुलिस वालों की ड्यूटी लगाई है। यह लोग दो पालियों में जेल के गेट पर ड्यूटी करते हुए सभी लोगों का पूरा विवरण भी दर्ज करेंगे। ताकि किसी भी प्रकार की घटना पर तत्काल संबंधित का रिकार्ड खंगालते हुए कार्रवाई की जा सके।
जेल के बाहर तैनात किए जाने वालों में छह दरोगा, चार महिला और चार पुरुष सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें कुछ कर्मचारी पुलिस लाइन से लिए गए हैं। जबकि कुछ को थानों से संबद्ध किया गया है। इन लोगों की दिन और रात दो पालियों में ड्यूटी लगाई जाएगी। बता दें कि अब तक जिले में घटित हुई ज्यादातर बड़े अपराधों का तार किसी न किसी माध्यम से जेल से जुड़ा हुआ है। पुलिस का पूरा प्रयास है कि जेल में आने और जाने वालों का पूरा रिकार्ड पुलिस के पास मौजूद रहेगा तो किसी भी घटना के समय जेल में आने वालों के रिकार्ड के जरिए घटना का खुलासा करने में काफी आसानी होगी। एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि दरोगा और सिपाहियों की ड्यूटी का चार्ट तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।