फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   राजकीय पालिटेक्निक घोटाले में एफआईआर दर्ज

राजकीय पालिटेक्निक घोटाले में एफआईआर दर्ज

Wed, 06 Jun 2018 12:32 AM IST
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:32 AM IST
विज्ञापन
राजकीय पालिटेक्निक घोटाले में एफआईआर दर्ज
आजमगढ़। तरवां विकास खंड के बरेहता भिलिहिली में बनने वाले राजकीय पालिटेक्निक कालेज में करोड़ों रुपये का घोटाले के मामले में दूसरी एफआईआर दर्ज कराई गई है। जबकि पहली एफआईआर के बाद इसकी जांच ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही है।
विज्ञापन

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब गाजीपुर जनपद के सैदपुर थाना क्षेत्र के हीराधरपुर गांव निवासी राजेंद्र सिंह ने मंडलायुक्त, डीएम और प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को शिकायत पत्र देकर घोटाले का आरोप लगाया। इसमें उन्होंने बताया कि राजकीय पालिटेक्निक बरेहता भिलिहिली का निर्माण कार्यदायी संस्था द्वारा फर्म मेसर्स राजेंद्र सिंह के माध्यम से कराया गया था लेकिन जेई, अधिकारियों और कर्मचारियों की साजिश से निर्माण का भुगतान उन्हें न करके फर्जी लोगों के नाम से कर दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए उप्र राजकीय निर्माण निगम लखनऊ द्वारा जांच के लिए विभागीय जनरल मैनेजर और प्रोटोकाल को नामित किया गया था। जांच में दो करोड़ से भी अधिक रुपये की पुष्टि हुई। इस मामले की पुष्टि होने के बाद दो से ढ़ाई साल पहले एक एफआईआर दर्ज हुई थी। एफआईआर के बाद मामले की जांच ईओडब्ल्यू के पास चली गई लेकिन अभी तक इसकी जांच पूरी नहीं हो सकी। वहीं जब कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों ने अधूरे बचे कार्यों को पूरा करने का मन बनाया तो उनके द्वारा इस मामले में एक दूसरी एफआईआर एक से डेढ़ माह पूर्व वाराणसी जनपद के कैंट थाने में दर्ज कराई गई। प्रोजेक्ट मैनेजर रणविजय सिंह द्वारा दर्ज कराई कई एफआईआर में तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर जीएस दीक्षित और तत्कालीन जेई और एई रहे आरएन को नामजद किया गया है। जबकि इस कार्य में लिप्त ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है।
विज्ञापन



राजकीय पालिटेक्निक कालेज बरेहता के निर्माण में अनियमितता की शिकायत हुई थी। जांच में आरोप सत्य पाए गए। इस पर अधिकारियों के निर्देश पर लगभग ढ़ाई साल पहले ही एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामला बड़ा होने के कारण इसकी जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई। अब जब बाकी बचे कार्य को पूरा करना है तो उसके लिए यह दूसरी एफआईआर लगभग डेढ़ माह पूर्व दर्ज कराई गई है। - रणविजय सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर, राजकीय निर्माण निर्माण निगम, वाराणसी इकाई टू।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed