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पुलिस की लचर पैरवी से आसान हुई कुंटू की राह
Updated Sun, 17 Sep 2017 11:47 PM IST
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प्रतिबंधित कारतूस सप्लाई का सुराग नहीं
कुंटू के बरी होने के बाद चर्चाओं का बाजार गरम
पुलिस की लचर पैरवी से अपहरण मामले में बरी
अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। पुलिस की लचर पैरवी से माफिया ध्रुव कुमार सिंह कुंटू अपहरण के मुकदमे से भी बच निकला। गिरफ्तारी के समय उसके पास से बरामद हुए भारी मात्रा में प्रतिबंधित कारतूस के विषय में अब तक पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लग सका। उधर कुंटू के निर्दोष साबित हो जाने पर जिले में चर्चाओं का बाजार गरम है।
वर्ष 2014 में जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के अमुवारी नरायनपुर गांव में स्थित महात्मा हरिहरदास उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का प्रबंधकीय चुनाव था। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित अन्य पदों के लिए आठ प्रत्याशी मैदान में थे। जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के उमरी शेखपुर गांव निवासी फौजदार यादव ने मंत्री पद के लिए पर्चा भरा था। फौजदार अपने समर्थकों के साथ शहर कोतवाली के शारदा चौराहे पर एक होटल के सामने खड़े थे। तभी स्कार्पियो सवार तीन बदमाश पहुंचे और समर्थक गोपाल सिंह को बंदूक की नोंक पर अगवाकर भागने लगे। तात्कालीन जीयनपुर कोतवाली प्रभारी विजय सिंह और एसओजी ने घेराबंदी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय इनके पास से प्रतिबंधित 7.62 बोर के 47 कारतूस, 315 बोर राइफल के 21 कारतूस और असलहे बरामद हुए। गिरफ्तार होने वालों में ध्रुव कुमार सिंह कुंटू, गाजीपुर के बहरियाबाद का संजय यादव, रामविजय सिंह आदि शामिल थे। पुलिस की लचर पैरवी और रुपयों के बल पर कुंटू सिंह इस मामले से भी बरी हो गया। शुक्रवार की रात उसे जिला जेल से बरेली जेल भेज दिया गया।
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पैरवी में थे राजपत्रित अधिकारी
आजमगढ़ (ब्यूरो)। पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल में अपराधियों का न्यायालय में चले रहे मुकदमे की पैरवी के लिए दरोगा या थानाध्यक्ष की बजाय राजपत्रित अधिकारी सीओ या उससे ऊपर के अधिकारियों को लगाया था। जितना प्रमुख कार्य मुकदमे की नियमित पैरवी, समय पर गवाही, गवाहों को पूरी तरह से सुरक्षा देते हुए अपराधी को सजा दिलाने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में माफिया कुंटू सिंह के अपहरण के मामले में बरी हो जाने का मामला हजम नहीं हो पा रहा।
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कोट
कुंटू सिंह समेत अन्य अपराधियों के विरुद्ध चल रहे मुकदमे की पैरवी में कोई कोताई नहीं बरती गई थी। पुलिस मजबूती से अपना पक्ष रखे हुए थी। बावजूद इसके वह कैसे बरी हो गया। यह बात समझ में नहीं आ रही। मामले की जांच की जाएगी।
- अजय कुमार साहनी, एसपी
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कुंटू के बरी होने के बाद चर्चाओं का बाजार गरम
पुलिस की लचर पैरवी से अपहरण मामले में बरी
अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। पुलिस की लचर पैरवी से माफिया ध्रुव कुमार सिंह कुंटू अपहरण के मुकदमे से भी बच निकला। गिरफ्तारी के समय उसके पास से बरामद हुए भारी मात्रा में प्रतिबंधित कारतूस के विषय में अब तक पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लग सका। उधर कुंटू के निर्दोष साबित हो जाने पर जिले में चर्चाओं का बाजार गरम है।
वर्ष 2014 में जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के अमुवारी नरायनपुर गांव में स्थित महात्मा हरिहरदास उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का प्रबंधकीय चुनाव था। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित अन्य पदों के लिए आठ प्रत्याशी मैदान में थे। जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के उमरी शेखपुर गांव निवासी फौजदार यादव ने मंत्री पद के लिए पर्चा भरा था। फौजदार अपने समर्थकों के साथ शहर कोतवाली के शारदा चौराहे पर एक होटल के सामने खड़े थे। तभी स्कार्पियो सवार तीन बदमाश पहुंचे और समर्थक गोपाल सिंह को बंदूक की नोंक पर अगवाकर भागने लगे। तात्कालीन जीयनपुर कोतवाली प्रभारी विजय सिंह और एसओजी ने घेराबंदी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय इनके पास से प्रतिबंधित 7.62 बोर के 47 कारतूस, 315 बोर राइफल के 21 कारतूस और असलहे बरामद हुए। गिरफ्तार होने वालों में ध्रुव कुमार सिंह कुंटू, गाजीपुर के बहरियाबाद का संजय यादव, रामविजय सिंह आदि शामिल थे। पुलिस की लचर पैरवी और रुपयों के बल पर कुंटू सिंह इस मामले से भी बरी हो गया। शुक्रवार की रात उसे जिला जेल से बरेली जेल भेज दिया गया।
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पैरवी में थे राजपत्रित अधिकारी
आजमगढ़ (ब्यूरो)। पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल में अपराधियों का न्यायालय में चले रहे मुकदमे की पैरवी के लिए दरोगा या थानाध्यक्ष की बजाय राजपत्रित अधिकारी सीओ या उससे ऊपर के अधिकारियों को लगाया था। जितना प्रमुख कार्य मुकदमे की नियमित पैरवी, समय पर गवाही, गवाहों को पूरी तरह से सुरक्षा देते हुए अपराधी को सजा दिलाने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में माफिया कुंटू सिंह के अपहरण के मामले में बरी हो जाने का मामला हजम नहीं हो पा रहा।
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कुंटू सिंह समेत अन्य अपराधियों के विरुद्ध चल रहे मुकदमे की पैरवी में कोई कोताई नहीं बरती गई थी। पुलिस मजबूती से अपना पक्ष रखे हुए थी। बावजूद इसके वह कैसे बरी हो गया। यह बात समझ में नहीं आ रही। मामले की जांच की जाएगी।
- अजय कुमार साहनी, एसपी