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फर्जी मुकदमे में फंसाने की दी जा रही धमकी
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:45 AM IST
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आजमगढ़। छोटा सिक्का लेने से इंकार करने वाले काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक दुर्वासा के प्रबंधक फूलचंद राम और फूलपुर कोतवाली के तत्कालीन कोतवाल रमायन सिंह के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा दायर करने संबंधी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा जारी आदेश के क्रम में बैंक की तरफ से आपत्ति दाखिल की गई है। इसकी वजह से थाने में अब तक केस नहीं दर्ज हो सका। उधर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शाखा प्रबंधक के परिवार के लोग उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। हालांकि अभी इस मामले में उन्होंने कहीं कोई शिकायत नहीं की है।
मंगलवार को फूलपुर कोतवाली के तत्कालीन और वर्तमान में सिधारी थाने के प्रभारी निरीक्षक रमायन सिंह की तरफ से बताया गया कि 23 दिसंबर 2017 को डीएम द्वारा जारी आदेश के क्रम में उन्होंने बैंक जाकर दिलीप पांडेय के सिक्के जमा कराए थे। उनके कहने के बाद से बैंक की तरफ से लगातार दिलीप के तीनों खातों में 26 दिसंबर 2017 से चार मई 2018 तक लगातार 40 बार में कुल 56920 रुपये जमा हुए हैं। ऐसे में दिलीप का आरोप बेबुनियाद है। जबकि इस संबंध में शिकायतकर्ता दिलीप पांडेय ने बताया कि पुलिस की तरफ से जो भी खाते में सिक्के जमा होने की सूची जारी की गई है, वह रुपये पुलिस के कहने पर नहीं जमा हुए हैं, बल्कि इन रुपयों को जमा कराने के एवज में हर बार 500 से 600 रुपये तक की रिश्वत देनी पड़ी है। दिलीप ने बताया कि वह इन बातों की जानकारी अदालत में दाखिल मुकदमों की फाइलों में है। दिलीप ने आरोप लगाया कि जिस दिन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से केस दर्ज करने का आदेश दिया गया। उसके दूसरे दिन ही आरोपियों की तरफ से फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है।
उधर मुकदमा दर्ज करने के संबंध में फूलपुर कोतवाली से संपर्क करने पर कोतवाली के कार्यवाहक प्रभारी राजकुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में बैंक की तरफ से आदेश के खिलाफ आपत्ति दाखिल की गई है। जिसकी सुनवाई के लिए 12 सितंबर का दिन निर्धारित किया गया है। इस मामले में अब कोई अग्रिम आदेश जारी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि अहरौला थाने के भीलम पट्टी गांव निवासी दिलीप पांडेय की तरफ से छोटे सिक्के न लेने पर बैंक प्रबंधक और पुुलिस के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया गया था। जिसकी सुनवाई के क्रम में अदालत ने बैंक प्रबंधक और फूलपुर कोतवाली के तात्कालीन कोतवाल के विरुद्ध देश द्रोह का मुकदमा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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सिक्का न लेने से छोटे दुकानदारों की टूटी कमर
आजमगढ़। छोटा सिक्का न लेने से ज्यादातर दुकानदारों की ना केवल कमर टूट गई, बल्कि उनका कारोबार भी चौपट हो गया। बैंक के अधिकारी और कर्मचारियों की तरफ से सिक्का गिनने की झंझट से बचने के लिए खाता धारकों को साफ तौर पर लेने से इंकार कर देते हैं। बैंक की तरफ से सिक्का न लेने का परिणाम है कि दुकानदारों के पास सिक्कों ढेर लगा हुआ है। वे इतनी बड़ी संख्या में सिक्के लेकर कहां जाएं। बैंक की तर्ज पर ही ज्यादातर ग्राहक भी लेने से इंकार कर रहे।
अहरौला थाना क्षेत्र के भीमल पट्टी गांव निवासी दिलीप पांडेय के मुताबिक वह वर्ष 2014 में दुर्घटना होने से विकलांग हो गया। ऐसे में वाराणसी से कई क्वालिटी का नमकीन मंगाकर उसकी क्षेत्र के छोटे दुकानदारों के यहां सप्लाई करता था। सरकार की तरफ से नोटबंदी किए जाने के बाद दुकानों से सिर्फ सिक्के ही मिलते थे। ऐसे में दिलीप इन सिक्कों को बैंक में जमा करने जाता तो बैंक के कर्मचारी इंकार कर देते थे। बैंक की उपेक्षा के चलते ना केवल दिलीप का कारोबार ठप हो गया, बल्कि परिवार के बारह सदस्यों को समक्ष पेट की आग बुझाने की समस्या उत्पन्न हो गई है। वहीं रोडवेज के परिचालक संजय कुमार ने बताया कि यात्री अपनी तरफ से तो किराए के रूप में सिक्के तो दे देते हैं, पर उन्हें जब लौटाया जाता है तो लेने से इंकार कर देते हैं। लालगंज बाजार निवासी किराने व्यवसाई शंकर प्रसाद ने बताया कि उनके यहां भी ज्यादातर दस, पांच, दो, एक के तमाम सिक्के इकट्ठा तो हो गए हैं, लेकिन इन सिक्कों को बैंक जमा नहीं करता। सिक्कों को जमा कराने में पसीने छूट जाते हैं। बैंक के कर्मचारी और अधिकारी झल्लाकर कहते हैं कि इसे गिनेगा कौन। छोटे-बड़े सिक्के बैंक द्वारा न लिए जाने से दुकानदार लाचार हैं। इस संबंध में यूबीआई के एलडीएम संतोष कुमार ने बताया कि किसी भी बैंक को सिक्का लेने से मना नहीं किया गया है। जो भी बैंक कर्मी सिक्का लेने से इंकार कर रहा। शिकायत मिलने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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मंगलवार को फूलपुर कोतवाली के तत्कालीन और वर्तमान में सिधारी थाने के प्रभारी निरीक्षक रमायन सिंह की तरफ से बताया गया कि 23 दिसंबर 2017 को डीएम द्वारा जारी आदेश के क्रम में उन्होंने बैंक जाकर दिलीप पांडेय के सिक्के जमा कराए थे। उनके कहने के बाद से बैंक की तरफ से लगातार दिलीप के तीनों खातों में 26 दिसंबर 2017 से चार मई 2018 तक लगातार 40 बार में कुल 56920 रुपये जमा हुए हैं। ऐसे में दिलीप का आरोप बेबुनियाद है। जबकि इस संबंध में शिकायतकर्ता दिलीप पांडेय ने बताया कि पुलिस की तरफ से जो भी खाते में सिक्के जमा होने की सूची जारी की गई है, वह रुपये पुलिस के कहने पर नहीं जमा हुए हैं, बल्कि इन रुपयों को जमा कराने के एवज में हर बार 500 से 600 रुपये तक की रिश्वत देनी पड़ी है। दिलीप ने बताया कि वह इन बातों की जानकारी अदालत में दाखिल मुकदमों की फाइलों में है। दिलीप ने आरोप लगाया कि जिस दिन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से केस दर्ज करने का आदेश दिया गया। उसके दूसरे दिन ही आरोपियों की तरफ से फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है।
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उधर मुकदमा दर्ज करने के संबंध में फूलपुर कोतवाली से संपर्क करने पर कोतवाली के कार्यवाहक प्रभारी राजकुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में बैंक की तरफ से आदेश के खिलाफ आपत्ति दाखिल की गई है। जिसकी सुनवाई के लिए 12 सितंबर का दिन निर्धारित किया गया है। इस मामले में अब कोई अग्रिम आदेश जारी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि अहरौला थाने के भीलम पट्टी गांव निवासी दिलीप पांडेय की तरफ से छोटे सिक्के न लेने पर बैंक प्रबंधक और पुुलिस के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया गया था। जिसकी सुनवाई के क्रम में अदालत ने बैंक प्रबंधक और फूलपुर कोतवाली के तात्कालीन कोतवाल के विरुद्ध देश द्रोह का मुकदमा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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सिक्का न लेने से छोटे दुकानदारों की टूटी कमर
आजमगढ़। छोटा सिक्का न लेने से ज्यादातर दुकानदारों की ना केवल कमर टूट गई, बल्कि उनका कारोबार भी चौपट हो गया। बैंक के अधिकारी और कर्मचारियों की तरफ से सिक्का गिनने की झंझट से बचने के लिए खाता धारकों को साफ तौर पर लेने से इंकार कर देते हैं। बैंक की तरफ से सिक्का न लेने का परिणाम है कि दुकानदारों के पास सिक्कों ढेर लगा हुआ है। वे इतनी बड़ी संख्या में सिक्के लेकर कहां जाएं। बैंक की तर्ज पर ही ज्यादातर ग्राहक भी लेने से इंकार कर रहे।
अहरौला थाना क्षेत्र के भीमल पट्टी गांव निवासी दिलीप पांडेय के मुताबिक वह वर्ष 2014 में दुर्घटना होने से विकलांग हो गया। ऐसे में वाराणसी से कई क्वालिटी का नमकीन मंगाकर उसकी क्षेत्र के छोटे दुकानदारों के यहां सप्लाई करता था। सरकार की तरफ से नोटबंदी किए जाने के बाद दुकानों से सिर्फ सिक्के ही मिलते थे। ऐसे में दिलीप इन सिक्कों को बैंक में जमा करने जाता तो बैंक के कर्मचारी इंकार कर देते थे। बैंक की उपेक्षा के चलते ना केवल दिलीप का कारोबार ठप हो गया, बल्कि परिवार के बारह सदस्यों को समक्ष पेट की आग बुझाने की समस्या उत्पन्न हो गई है। वहीं रोडवेज के परिचालक संजय कुमार ने बताया कि यात्री अपनी तरफ से तो किराए के रूप में सिक्के तो दे देते हैं, पर उन्हें जब लौटाया जाता है तो लेने से इंकार कर देते हैं। लालगंज बाजार निवासी किराने व्यवसाई शंकर प्रसाद ने बताया कि उनके यहां भी ज्यादातर दस, पांच, दो, एक के तमाम सिक्के इकट्ठा तो हो गए हैं, लेकिन इन सिक्कों को बैंक जमा नहीं करता। सिक्कों को जमा कराने में पसीने छूट जाते हैं। बैंक के कर्मचारी और अधिकारी झल्लाकर कहते हैं कि इसे गिनेगा कौन। छोटे-बड़े सिक्के बैंक द्वारा न लिए जाने से दुकानदार लाचार हैं। इस संबंध में यूबीआई के एलडीएम संतोष कुमार ने बताया कि किसी भी बैंक को सिक्का लेने से मना नहीं किया गया है। जो भी बैंक कर्मी सिक्का लेने से इंकार कर रहा। शिकायत मिलने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।