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44 शराब माफियाओं के विरुद्ध नहीं हुई कार्रवाई
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:59 PM IST
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आजमगढ़। सगड़ी क्षेत्र में कुटीर उद्योग का रुप ले चुके अवैध शराब के धंधे पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने 2014 में अवैध शराब कारोबार से जुड़े पांच प्रमुख शराब माफिया और इनके 44 सदस्यों की पहचान कर इनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए पुलिस अधीक्षक को भेजी थी। इसके बाद चिह्नित शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए सूची जिलाधिकारी कार्यालय में भेजी गई थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके पीछे राजनीतिक दवाब को कारण बताया जा रहा है। समय रहते यदि कार्रवाई की गई होती तो शायद शराब का अवैध धंधा बंद हो गया होता और इतनी बड़ी घटना नहीं होती। हालांकि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के समय में भेजी गई माफिया की सूची को वर्तमान एसपी ने गलत बताया है।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जिले में अवैध का कारोबार करने वाले पांच प्रमुख गिरोह और 44 इनके सदस्य हैं। इसमें बिलरियागंज थाना क्षेत्र के सहाबुद्दीनपुर गांव निवासी प्रदीप यादव और उसके 23 सदस्य, रौनापार थाना क्षेत्र के नेवादा गांव निवासी रामाश्रय साहनी और उसके छह सदस्य, मुबारकपुर थाना क्षेत्र के केरमा गांव निवासी मुलायम यादव और उसके सात सदस्य, रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव निवासी राणा सिंह उर्फ लूटावन और उसके चार सदस्य, इसी थाने के महुला गांव निवासी अंगद राय और उसके चार सदस्यों का नाम शामिल है। पुलिस के मुताबिक यह लोग अपने-अपने गुप्त ठिकानों पर कच्ची शराब तैयार करवाते हैं। जिन्हें एजेंटों को माध्यम से क्षेत्रों में बंटवाकर बेचवाते हैं। इनके द्वारा तैयार की गई शराब न केवल आजमगढ़, बल्कि पड़ोसी जिले मऊ, अंबेडकर नगर और गोरखपुर जिले के भी कुछ क्षेत्रों में भेजा जाता है। इन शराब कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस इनके द्वारा अवैध शराब की कमाई से अर्जित की गई संपत्ती को कुर्क करने की तैयार करते हुए वर्ष 2014 के अंत में फाइल डीएम के यहां भेजवा दी। जहां से अनुमति के लिए शासन को भेजी जानी थी लेकिन जैसे ही पुलिस के इस कदम की जानकारी शराब माफियाओं को हुई तो वे अपने राजनीति के शीर्ष पर बैठे आकाओं से संपर्क कर मामले को दबा दिया। जिसकी वजह से फाइल कलेक्ट्रेट दफ्तर में धूल फांक रही है।
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पूर्व में जिन शराब कारोबारियों के गिरोह को चिह्नित किया है, वह पूरी तरह से गलत है। इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं की जा सकी। सभी थानाध्यक्षों से दस दिन के भीतर नए सिरे से शराब माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों को चिह्नित कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। - अजय कुमार साहनी, एसपी आजमगढ़
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पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जिले में अवैध का कारोबार करने वाले पांच प्रमुख गिरोह और 44 इनके सदस्य हैं। इसमें बिलरियागंज थाना क्षेत्र के सहाबुद्दीनपुर गांव निवासी प्रदीप यादव और उसके 23 सदस्य, रौनापार थाना क्षेत्र के नेवादा गांव निवासी रामाश्रय साहनी और उसके छह सदस्य, मुबारकपुर थाना क्षेत्र के केरमा गांव निवासी मुलायम यादव और उसके सात सदस्य, रौनापार थाना क्षेत्र के पलिया गांव निवासी राणा सिंह उर्फ लूटावन और उसके चार सदस्य, इसी थाने के महुला गांव निवासी अंगद राय और उसके चार सदस्यों का नाम शामिल है। पुलिस के मुताबिक यह लोग अपने-अपने गुप्त ठिकानों पर कच्ची शराब तैयार करवाते हैं। जिन्हें एजेंटों को माध्यम से क्षेत्रों में बंटवाकर बेचवाते हैं। इनके द्वारा तैयार की गई शराब न केवल आजमगढ़, बल्कि पड़ोसी जिले मऊ, अंबेडकर नगर और गोरखपुर जिले के भी कुछ क्षेत्रों में भेजा जाता है। इन शराब कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस इनके द्वारा अवैध शराब की कमाई से अर्जित की गई संपत्ती को कुर्क करने की तैयार करते हुए वर्ष 2014 के अंत में फाइल डीएम के यहां भेजवा दी। जहां से अनुमति के लिए शासन को भेजी जानी थी लेकिन जैसे ही पुलिस के इस कदम की जानकारी शराब माफियाओं को हुई तो वे अपने राजनीति के शीर्ष पर बैठे आकाओं से संपर्क कर मामले को दबा दिया। जिसकी वजह से फाइल कलेक्ट्रेट दफ्तर में धूल फांक रही है।
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पूर्व में जिन शराब कारोबारियों के गिरोह को चिह्नित किया है, वह पूरी तरह से गलत है। इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं की जा सकी। सभी थानाध्यक्षों से दस दिन के भीतर नए सिरे से शराब माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों को चिह्नित कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। - अजय कुमार साहनी, एसपी आजमगढ़
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