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गो आश्रय स्थलों का हाल बेहाल, पांच पशुओं की मौत
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ेंहनगर के गौशाला में घुसा बारिश का पानी।
- फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। गोवंश वध पर प्रतिबंध के बाद तो छुट्टा पशुओं बाढ़ आ गई। इन पशुओं को आश्रय उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने गो आश्रय स्थल के निर्माण का निर्देश दिया। सरकार के निर्देश पर गो आश्रय स्थलों का निर्माण तो हो गया लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी इनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। इसका परिणाम रहा कि चार दिनों की अनवरत बारिश में अब तक पांच पशुओं की मौत हो चुकी है। वहीं मेंहनगर में कुछ पशुओं को दूसरे गो आश्रय स्थल के लिए स्थानांतरित किया गया है। उधर जहानागंज के किशुनपुर में बनी गोशाला का निरीक्षण रविवार को खंड विकास अधिकारी राजीव शर्मा ने पशु डाक्टर के साथ किया।
शेर्रा में दो गायों की मौत के बाद चौकन्ना हुआ प्रशासन
मेंहनगर। विकास खंड के शेर्रा गांव में निराश्रित अस्थायी गो आश्रय स्थल में शुरूआत के दिनों में लगभग 300 से ज्यादा संख्या में पशुओं को रखा गया था। चार दिनों तक अनवरत बारिश के दौरान दो पशुओं की मौत हो गई। सूचना मिलने पर डीएम के निर्देश पर एसडीएम अरविंद कुमार सिंह, बीडीओ संतोष नारायण गुप्ता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. वीके सिंह, एडीओ पंचायत मूलचंद वहां पहुंचे और 125 पशुओं को बगल के गांव खरगपुर स्थित अंबेडकर इंटर कालेज जो वर्षों से खाली पड़ा था वहां स्थानांतरित कराया।
अज्ञात बीमारी से दो, नाद में गिरने से एक गाय मरी
मेजवां/अहरौला। अधिकारियों की लापरवाही के चलते फूलपुर के मनरा गांव में स्थिति गौशाला उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। यहां का गौशाला सब्जी मंडी में शिफ्ट किया गया है। रविवार को दो पशु अज्ञात बीमारी के चलते मर गए। यहां कुल 54 पशु है। पशुओं की खुराकी के लिए तीन महीने हो गए लेकिन धन अवमुक्त नहीं किया गया। शासन द्वारा धन अवमुक्त न किये जाने से प्रधान स्वयं अपने खर्चे से पशुओं की देखभाल करवाते हैं। पिछले दो महीने के पैसा अभी भुगतान नहीं किया गया है। जिसके चलते दिक्कतें आ रही है। वहीं बूढ़नपुर तहसील के कोयलसा विकासखंड के कोटवा जलालपुर ग्राम सभा में 56 बीघा क्षेत्र में पशु आश्रय स्थल में रका निर्माण ग्राम सभा से कराया गया है। अनिल कुमार यादव के अनुसार गौशाला में 114 पशुओं के रखने की क्षमता है। शुक्रवार को नाद में गिरने से एक गाय की मौत हो गई। यहां पशु खुले आसमान के नीचे रहते हैं।
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30 दिनों में हुई 23 पशुओं की मौत
बूढ़नपुर। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के हूंसेपुर सनूप गांव में चार महीने पूर्व पशुशाला बनाया गया। जिसमें कुल 36 छुट्टा पशु रखे गये। दुर्व्यवस्था व बीमारी के चलते बीते 30 दिनों के भीतर 23 पशुओं की मौत हो गयी। चारे के नाम पर सूखा पुआल या भूसा दिया जा रहा है। पशुओं के लिए टीन शेड या छाया पशुशाला में कुल 36 पशु है। जिसमें प्रतिदिन एक या दो पशु मर रहे हैं। मरे पशुओं के स्थान नए छुट्टा पशुओं को लाकर भर दिया जाता है। बीडीओ अखिलेष मिश्रा ने बताया कि पशुशाला के लिए सरकार पर्याप्त धनराषि स्वीकृत है। जिसे मनरेगा के तहत निर्माण से लेकर पशुओं के चारा तक की व्यवस्था की गयी है।
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शेर्रा में दो गायों की मौत के बाद चौकन्ना हुआ प्रशासन
मेंहनगर। विकास खंड के शेर्रा गांव में निराश्रित अस्थायी गो आश्रय स्थल में शुरूआत के दिनों में लगभग 300 से ज्यादा संख्या में पशुओं को रखा गया था। चार दिनों तक अनवरत बारिश के दौरान दो पशुओं की मौत हो गई। सूचना मिलने पर डीएम के निर्देश पर एसडीएम अरविंद कुमार सिंह, बीडीओ संतोष नारायण गुप्ता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. वीके सिंह, एडीओ पंचायत मूलचंद वहां पहुंचे और 125 पशुओं को बगल के गांव खरगपुर स्थित अंबेडकर इंटर कालेज जो वर्षों से खाली पड़ा था वहां स्थानांतरित कराया।
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अज्ञात बीमारी से दो, नाद में गिरने से एक गाय मरी
मेजवां/अहरौला। अधिकारियों की लापरवाही के चलते फूलपुर के मनरा गांव में स्थिति गौशाला उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। यहां का गौशाला सब्जी मंडी में शिफ्ट किया गया है। रविवार को दो पशु अज्ञात बीमारी के चलते मर गए। यहां कुल 54 पशु है। पशुओं की खुराकी के लिए तीन महीने हो गए लेकिन धन अवमुक्त नहीं किया गया। शासन द्वारा धन अवमुक्त न किये जाने से प्रधान स्वयं अपने खर्चे से पशुओं की देखभाल करवाते हैं। पिछले दो महीने के पैसा अभी भुगतान नहीं किया गया है। जिसके चलते दिक्कतें आ रही है। वहीं बूढ़नपुर तहसील के कोयलसा विकासखंड के कोटवा जलालपुर ग्राम सभा में 56 बीघा क्षेत्र में पशु आश्रय स्थल में रका निर्माण ग्राम सभा से कराया गया है। अनिल कुमार यादव के अनुसार गौशाला में 114 पशुओं के रखने की क्षमता है। शुक्रवार को नाद में गिरने से एक गाय की मौत हो गई। यहां पशु खुले आसमान के नीचे रहते हैं।
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30 दिनों में हुई 23 पशुओं की मौत
बूढ़नपुर। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के हूंसेपुर सनूप गांव में चार महीने पूर्व पशुशाला बनाया गया। जिसमें कुल 36 छुट्टा पशु रखे गये। दुर्व्यवस्था व बीमारी के चलते बीते 30 दिनों के भीतर 23 पशुओं की मौत हो गयी। चारे के नाम पर सूखा पुआल या भूसा दिया जा रहा है। पशुओं के लिए टीन शेड या छाया पशुशाला में कुल 36 पशु है। जिसमें प्रतिदिन एक या दो पशु मर रहे हैं। मरे पशुओं के स्थान नए छुट्टा पशुओं को लाकर भर दिया जाता है। बीडीओ अखिलेष मिश्रा ने बताया कि पशुशाला के लिए सरकार पर्याप्त धनराषि स्वीकृत है। जिसे मनरेगा के तहत निर्माण से लेकर पशुओं के चारा तक की व्यवस्था की गयी है।

मेंहनगर की गोशाला से मवेशियों को शिफ्ट किया गया।- फोटो : AZAMGARH