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सरकारी स्कूलों को बंद करना पीड़ित वर्गों के खिलाफ साजिश: धर्मेंद्र यादव
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आजमगढ़। लोकसभा में समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक एवं आजमगढ़ सांसद धर्मेंद्र यादव ने उत्तर प्रदेश में बंद किए जा रहे सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस कदम को प्रदेश सरकार द्वारा पिछड़े, दलित और गरीब वर्गों के खिलाफ रची गई सुनियोजित साजिश बताया है।
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे गरीब, पिछड़े और दलित समुदाय से आते हैं। सरकार जानबूझकर ऐसी नीतियां लागू कर रही है जिससे इन वर्गों के बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा सके। उन्होंने इस निर्णय को मनुवादी सोच का पुनरुत्थान करार दिया और कहा कि यह संविधान प्रदत्त शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। इस संबंध में सांसद धर्मेंद्र यादव ने डीएम पत्र लिख कर कई बिंदुओं की जानकारी मांगी है। जिसमें उन्होंने पूछा है कि इस निर्णय से निम्न आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग एवं उच्च आय वर्ग के कितने विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं? अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा सामान्य वर्ग के कितने बच्चे इस निर्णय से प्रभावित हैं?
कुल प्रभावित विद्यार्थियों की संख्या ग्रामवार व ब्लॉकवार सूची प्रदान की जाए। विद्यालय बंद होने के बाद बच्चों को वैकल्पिक विद्यालयों तक पहुंचाने की क्या योजना बनाई गई है, उसकी जानकारी दी जाए। क्या इस निर्णय से पहले बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों से कोई लिखित सहमति या आपत्ति ली गई है? यदि ली गई है तो उन दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
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जिन विद्यालयों को मर्ज किया गया है, वहां कार्यरत शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों एवं अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को किस विद्यालय में तैनात किया गया है, उसकी सूची भी उपलब्ध कराई जाए। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में से कितने कर्मचारियों को बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) पर तैनात किया गया है, उसकी भी विस्तृत सूची मांगी गई है।
सांसद धर्मेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की जनविरोधी नीति को वापस नहीं लिया, तो समाजवादी पार्टी जन आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों का मौलिक अधिकार है और उसे छीना नहीं जा सकता।
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धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे गरीब, पिछड़े और दलित समुदाय से आते हैं। सरकार जानबूझकर ऐसी नीतियां लागू कर रही है जिससे इन वर्गों के बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा सके। उन्होंने इस निर्णय को मनुवादी सोच का पुनरुत्थान करार दिया और कहा कि यह संविधान प्रदत्त शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है। इस संबंध में सांसद धर्मेंद्र यादव ने डीएम पत्र लिख कर कई बिंदुओं की जानकारी मांगी है। जिसमें उन्होंने पूछा है कि इस निर्णय से निम्न आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग एवं उच्च आय वर्ग के कितने विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं? अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा सामान्य वर्ग के कितने बच्चे इस निर्णय से प्रभावित हैं?
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कुल प्रभावित विद्यार्थियों की संख्या ग्रामवार व ब्लॉकवार सूची प्रदान की जाए। विद्यालय बंद होने के बाद बच्चों को वैकल्पिक विद्यालयों तक पहुंचाने की क्या योजना बनाई गई है, उसकी जानकारी दी जाए। क्या इस निर्णय से पहले बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों से कोई लिखित सहमति या आपत्ति ली गई है? यदि ली गई है तो उन दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
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जिन विद्यालयों को मर्ज किया गया है, वहां कार्यरत शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों एवं अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को किस विद्यालय में तैनात किया गया है, उसकी सूची भी उपलब्ध कराई जाए। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में से कितने कर्मचारियों को बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) पर तैनात किया गया है, उसकी भी विस्तृत सूची मांगी गई है।
सांसद धर्मेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की जनविरोधी नीति को वापस नहीं लिया, तो समाजवादी पार्टी जन आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों का मौलिक अधिकार है और उसे छीना नहीं जा सकता।