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ई टिकट के अवैध कारोबार करने वाले गिरोह के मास्टर माइंड की तलाश में जुटी सीआईबी

Wed, 02 Sep 2020 06:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 06:00 PM IST
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CIB in search of mastermind of E-ticket trafficking gang
आजमगढ़। कोरोना काल में लंबे समय के बाद रेलवे ने यात्रियों को सहूलियत देने के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। ट्रेनों में भीड़ बढ़ते ही ई टिकटों के अवैध कारोबारियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। शहरों में ही नहीं, कस्बों और गांवों में भी इनका जाल फैल चुका है। रेलवे काउंटरों पर जहां एक भी तत्काल कंफर्म टिकट नहीं मिल रहा, वहीं कुछ ट्रेवेल एजेंसियों और मोबाइल की दुकानों में बैठे अवैध कारोबारी फर्जी साफ्टवेयर की मदद से धड़ल्ले से कंफर्म टिकट के बदले में मनमाना किराया वसूल रहे हैं। जिले में अवैध कारोबारियों का मकड़जाल फैला हुआ है। इस गिरोह का मास्टरमाइंड भी है जिसकी तलाश आरपीएफ कर रही है।
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जांच के बाद खुलेगा राज
सॉफ्टवेयर की मदद से तत्काल कोटे के टिकट बनाने वाला राकेश कुमार आरपीएफ की सीआईबी (सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) के हत्थे चढ़ गया। जबकि उसका एक साथी भागने में कामयाब हो गया। सीआईबी ने उसके पास से तत्काल टिकट निकालने में प्रयुक्त कंप्यूटर, इंटरनेट डोंगल व कुछ ई-टिकट बरामद किए। आरपीएफ ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। वहीं जांच अधिकारी उसके कंप्यूटर को खंगाल रहे हैं। जांच के बाद ही खुलाशा हो सकेगा कि राकेश के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं। उसका मास्टर माइंड कौन है। राकेश रानी की सराय थाना क्षेत्र के सहीगड़ा गांव का रहने वाला है।
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यहां तुरंत हो जा रहा कंफर्म टिकट
इंटरनेट की दुनिया में आइआरसीटीसी के समानांतर चल रहे फर्जी साफ्टवेयर रेलवे की वेबसाइट से भी तेज चलते हैं। सुबह दस बजे जैसे ही रेलवे काउंटरों पर टिकटों की बुकिंग शुरू होती है, वे अपना काम करना शुरू कर देते हैं। रेलवे काउंटर पर बैठा क्लर्क जबतक यात्री का नाम और पता भरकर पूछताछ करता है, तबतक नेट पर 80 से 90 फीसद कंफर्म टिकट बुक हो जाते हैं।
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शहर से लेकर गांव तक ठिकानें
हैकर शहर से लेकर गांव तक कई जगहों पर ठिकाना बना लिए हैं। जो कई-कई फर्जी आईडी बनाकर उसके माध्यम से ई-टिकट बेच रहे हैं। यह रेलवे की वेबसाइट से भी तेज चल रहे जो चंद समय में ही कई टिकट बुक कर ले रहे हैं। पुलिस पुलिस गांव से लेकर शहर तक फैले इस साम्राज्य को नष्ट करना की कोशिश कर रही है।
रेलवे की साइट को करते हैं हैक
रेलवे अधिकारियों की माने तो जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी रेलवे वेबसाइट पर ऑनलाइन टिकट बुक करने के वाले सॉफ्टवेयर को हैक कर लेते हैं। इसके बाद अपनी फर्जी आईडी से तत्काल टिकट बुक करके उसे बेचते है। इसके बदले वह अच्छी खासी रकम यात्रियों से वसूलते हैं।

अवैध साफ्टवेयर के माध्यम से ट्रेवेल एजेंसी संचालक व मोबाइल के दुकानदार रेलवे का ई-टिकट निकालते हैं। ऐसे ही आजमगढ़ में भी मामला सामने आया है। जांच की जा रही है। उसके पीछे कौन-कौन लोग हैं। इसका मास्टरमाइंड कौन यह सब जानकारी जुटाई जा रही है।
ऋषि पांडेय कमांडेंट आरपीएफ वाराणसी
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