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ठेकेदारों ने डीएम से मिलकर बिजली विभाग की कार्यदायी संस्था पर भुगतान रोकने का आरोप

Mon, 17 Aug 2020 11:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2020 11:00 PM IST
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Charged to stop payment to the executive organization of the electricity department
आजमगढ़। विद्युत विभाग की एक कार्यदायी संस्था की ओर से काम कराकर ठेकेदारों का पैसा रोके जाने की शिकायत को लेकर ठेकेदारों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा। शीघ्र भुगतान कराए जाने की मांग की। साथ ही अल्टीमेटम दिया कि अगर शीघ्र ही भुगतान नहीं हुआ तो वे मुख्यमंत्री से मिलेंगे। इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया तो भारी क्षति के कारण आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।
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डीएम को सौंपे गये पत्र में मेसर्स निर्मल पावर सिस्टम हरवंशपुर आजमगढ़ बजरंग सेल्स एवं सर्विस मछली मंडी सहादतपुरा मऊ, सुनील कुशवाहा हुकुलगंज वाराणसी, यादव एंड संदीप पांडेय सफुद्दीनपुर आजमगढ़, बीपीएस इफ्रां सालुशन चिनहट लखनऊ ने बताया कि वह ठेके पर काम करते हैं। वर्तमान में विद्युत विभाग के वितरण क्षेत्र में अपनी सेवा दे रही द फबिक्रेटर (इंडिया) कमच्छा वाराणसी के साथ तीन वर्षों से काम कर रहे थे। उक्त काम के एवज में उक्त कंपनी द्वारा आंशिक भुगतान भी जारी किया जाता रहा हैं। ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि अचानक बीते फरवरी 2020 के बाद द फबिक्रेटर (इंडिया) द्वारा हमारे कार्यों के एवज में कोई भी भुगतान नहीं किया गया। इसकी शिकायत कई बार कंपनी के अधिकारियों से की गई तो तीन-चार महीने तक आवश्वासन देते हुए काम में और तेजी लाने का दबाव बनाया गया। उक्त ठेकेदारों का कहना है कि कंपनी का काम लगभग पूरा होने वाला ही है। ठेकेदारों की पूरी पूंजी लग चुकी है।भुगतान के अभाव में श्रमिकों को पारिश्रमिक देने के लिए धन की कमी आ रही है। वहीं कंपनी द्वारा लगातार काम के एजव में पैसा देने में आना-कानी किया जा रहा है और सवाल-जबाव करने पर उलटे कानूनी कार्यवाही करने की धमकी दी जा रही है। भुगतान न होने से ठेकेदारों के समक्ष आर्थिक, मानसिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है। ठेकेदारों ने जिलाधिकारी से मिलकर उक्त मामले में हस्तक्षेप करते हुए कंपनी द्वारा रोके गये पैसों को तत्काल भुगतान कराने जाने के लेकर पत्रक सौंपा। चेतावनी दी कि अगर भुगतान नहीं किया गया तो वह आत्महत्या, आत्मदाह करने को बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी उक्त कंपनी के साथ साथ आप जिला प्रशासन की होगी।
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