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भैया दूज का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Sat, 21 Oct 2017 11:53 PM IST
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भैया दूज के अवसर पर
आजमगढ़। भैया दूज को यम द्वितीया नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक कर उनके उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई भी उन्हें दक्षिणा आदि देकर सदैव उनकी रक्षा और मान रखने का वचन देते हैं। शनिवार को भैया दूज का पर्व जनपद में हर्षोल्लास पूर्ण माहौल में मनाया गया।
मान्यता है कि अगर इस दिन भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी उम्र लंबी होगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी द्वितीया को यमराज बहन यमी यानी कि यमुना नदी से मिलने पहुंचे थे, तब यमी ने उनकी खूब सेवा की थी। इस पर यमराज ने यमी से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। ऐसे में यमी ने कहा कि यमुना नदी में स्नान करने वाला प्राणी यमलोक न जाए। यह सुन यमराज चिंतित हो गए। वहीं भाई को परेशान देख यमी ने अपना वरदान बदल दिया। फिर कहा कि आज के दिन जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करे और यमुना के जल में स्नान करे उसे यमलोक न जाना पड़े। इस पर यमराज ने ऐसा ही होने का वर दिया था। इस व्रत हर जगह अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। भैया दूज पर जनपद में बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र के लिए सुबह से व्रत रखा और जगह गोठ बनाकर पूजा अर्चना की। पूजा के बाद बहनों ने भाई के माथे पर टीका कर मिठाई खिलाई। शहर से लेकर गांव तक इस पूजा की गूंज देखने को मिली।
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मान्यता है कि अगर इस दिन भाई-बहन दोनों एक साथ यमुना नदी में स्नान करेंगे तो उनकी उम्र लंबी होगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी द्वितीया को यमराज बहन यमी यानी कि यमुना नदी से मिलने पहुंचे थे, तब यमी ने उनकी खूब सेवा की थी। इस पर यमराज ने यमी से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। ऐसे में यमी ने कहा कि यमुना नदी में स्नान करने वाला प्राणी यमलोक न जाए। यह सुन यमराज चिंतित हो गए। वहीं भाई को परेशान देख यमी ने अपना वरदान बदल दिया। फिर कहा कि आज के दिन जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करे और यमुना के जल में स्नान करे उसे यमलोक न जाना पड़े। इस पर यमराज ने ऐसा ही होने का वर दिया था। इस व्रत हर जगह अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। भैया दूज पर जनपद में बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र के लिए सुबह से व्रत रखा और जगह गोठ बनाकर पूजा अर्चना की। पूजा के बाद बहनों ने भाई के माथे पर टीका कर मिठाई खिलाई। शहर से लेकर गांव तक इस पूजा की गूंज देखने को मिली।
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