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Mukhtar Ansari: गाजीपुर जेल में बैरक नंबर 10 फिर बना अंसारी बंधु का ठिकाना, ऐसे बीती कैद में अफजाल की पूरी रात
Mon, 01 May 2023 09:57 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 01 May 2023 09:57 AM IST
सार
गाजीपुर जिला जेल में अफजाल अंसारी सारी रात करवटे बदलते रहे। सामान्य बंदियों की तरह रोटी, सब्जी, हल्का चावल-दाल खाया। जमीन पर सोए। सुबह 5.30 बजे बैरक खुली तो नियमित दिनचर्या में जुटे, चाय पिया और नाश्ता भी किया और बैरक में रहे। जेल प्रशासन ने निगरानी भी बढ़ा दी है।
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अफजाल अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गाजीपुर जिला कारागार का बैरक नंबर दस अफजाल अंसारी का फिर ठिकाना बन गया है। इससे कई कहानियां भी जुड़ी हैं। ब्रिटिश हुकूमत में यह विश्राम स्थल था तो जरायम की दुनिया में यहीं से अंसारी बंधुओं का सिक्का चलता रहा, यह उनका पुराना ठिकाना है। कभी बैरक के पास स्थित चबूतरे पर मुख्तार अंसारी की चौपाल लगती थी तो सियासत से लेकर पूर्वांचल में अपराध का ताना-बाना भी यहीं तैयार होता था। गैंगस्टर एक्ट में सजा होने पर करीब 15-16 वर्ष बाद अफजाल अंसारी पुन: सजा काटने के लिए इसी बैरक में पहुंचे हैं।
माफिया मुख्तार अंसारी इसी बैरक में बंद था और उस दौर में यहीं से पूर्वांचल में अपराध से लेकर राजनीति तक हर पहलुओं का संचालन किया करता था। यहीं नहीं जेल में रहते हुए उसने 29 नवंबर 2005 को मुहम्मदाबाद के पूर्व विधायक सहित अन्य की निर्मम हत्या तक करवाई।
इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद 2006 में अफजाल अंसारी और एजाजुल हक को पुलिस ने जेल भेज दिया। इसी बैरक में दोनों भाई रहते थे। वर्ष 2008 में अफजाल अंसारी जमानत पर बाहर आए। 2010 में मुख्तार को जिला कारागार से लखनऊ जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इधर, कृष्णानंद राय हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट का फैसला आने के बाद 2019 में एजाजुल हक जेल से छूट गए।
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माफिया मुख्तार अंसारी इसी बैरक में बंद था और उस दौर में यहीं से पूर्वांचल में अपराध से लेकर राजनीति तक हर पहलुओं का संचालन किया करता था। यहीं नहीं जेल में रहते हुए उसने 29 नवंबर 2005 को मुहम्मदाबाद के पूर्व विधायक सहित अन्य की निर्मम हत्या तक करवाई।
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इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद 2006 में अफजाल अंसारी और एजाजुल हक को पुलिस ने जेल भेज दिया। इसी बैरक में दोनों भाई रहते थे। वर्ष 2008 में अफजाल अंसारी जमानत पर बाहर आए। 2010 में मुख्तार को जिला कारागार से लखनऊ जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इधर, कृष्णानंद राय हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट का फैसला आने के बाद 2019 में एजाजुल हक जेल से छूट गए।
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जिला जेल में अफजाल ने सारी रात बदली करवट
शनिवार को गैंगस्टर के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से अफजाल अंसारी को चार वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद करीब 15-16 वर्ष बाद सजा भुगतने के जिला कारागार भेजा गया। जिला जेल में अफजाल अंसारी सारी रात करवटे बदलते रहे। सामान्य बंदियों की तरह रोटी, सब्जी, हल्का चावल-दाल खाया।
अफजाल अंसारी।
- फोटो : अमर उजाला
जमीन पर सोए। सुबह 5.30 बजे बैरक खुली तो नियमित दिनचर्या में जुटे, चाय पिया और नाश्ता भी किया और बैरक में रहे। जेल प्रशासन ने निगरानी भी बढ़ा दी है। मुहम्मदाबाद कोतवाली में वर्ष 2007 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामले में शनिवार शाम को एमपी-एमएलए कोर्ट ने अफजाल अंसारी को दोषी करार देते हुए चार वर्ष की सजा सुनाई थी।
इसके बाद पुलिस शाम करीब 3.40 बजे कड़ी सुरक्षा में अफजाल को जिला कारागार लेकर पहुंची थी। जहां मेडिकल के बाद कारागार प्रशासन ने बैरक में भेज दिया। इस दौरान अफजाल के चेहरे पर तनाव था। मन ही मन कुछ चिंताएं राजनीतिक भविष्य तो कुनबे को भी लेकर सता रही थी। बैरक में सामान्य बंदियों की तरह रात में कारागार मैन्यू के अनुुसार मिला भोजन किया और जमीन पर सोए।