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बैंक पर पथराव, लगाया जाम

Fri, 09 Dec 2016 11:06 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Fri, 09 Dec 2016 11:06 PM IST
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Bank stoned, put the jam
लगाया जाम
नोटबंदी के 31 दिन बाद भी जहां बैंक कैश की कमी से जूझ रहे हैं वहीं कतार में लगे लोगों का सब्र टूटता नजर आ रहा है। सबसे अधिक समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में है। यूबीआई की भुजवल शाखा समय से नहीं खुलने पर नाराज ग्रामीणों ने अहरौला-कप्तानगंज मार्ग पर जाम कर दिया। इस दौरान लोगों ने बैंक पर पथराव भी किया। जानकारी होने पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खत्म कराया।
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अहरौला संवाददाता के अनुसार, यूबीआई की बस्ती भुजबल शाखा पर गलन के बीच लोग सुबह से ही लाइन लगाकर खड़े थे। निर्धारित समय पर बैंक खुला और जैसे ही कैश नहीं होने की नोटिस चस्पा हुई लोग नाराज हो गए। लोगों ने अहरौला-कप्तानगंज मार्ग पर जाम कर दिया और बैंक पर ईंट पत्थर भी फेंके। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाकर जाम को समाप्त कराया। वहीं, क्षेत्र की यूबीआई शाखा फुलवरिया में भी कैश न होने के कारण लाइन लगाए लोगों को मायूस लौटना पड़ा। मेजवां संवाददाता के अनुसार, फूलपुर क्षेत्र के बैंकों में पर्याप्त कैश न होने के कारण लोगों को पैसा नहीं मिल पा रहा है।
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सरकारी कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं मिल पा रही है। वहीं, पेंशनर अपनी पेंशन के अलग परेशान हैं। पिछले तीन दिनों से स्टेट बैंक से प्राप्त होने वाली नगदी डाकघर फूलपुर को नहीं मिली है। फूलपुर में पंजाब बैंक, यूनियन बैंक, काशी गोमती ग्रामीण बैक में रुपये न होने की स्लिप शाखाओं पर चस्पा है। डाकघरों में नगदी न रहने के कारण सेलरी और पेंशन का भुगतान नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैक की शाखा फूलपुर में नगदी कम होने के कारण प्रति ग्राहकों को दो हजार रुपये का भुगतान हुआ।
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अतरौलिया संवाददाता के अनुसार, नोटबंदी के महीनेे बीतने के बाद भी लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है जिसकी वजह से जिनके घर शादी विवाह है और जिन लोगों को दवाएं लेना है उनके सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। दूसरी तरफ बैंकों द्वारा मनमानी की जा रही है। जिसका उदाहरण शुक्रवार को अतरौलिया के पंजाब नेशनल बैंक में देखने को मिला। रुपया रहने के बाद भी शाखा के अंदर लगी एटीएम मशीन सिर्फ इसलिए बंद कर दी गई कि बगल में स्थित एक बैंक का एटीएम भी बंद था। सगड़ी संवाददाता के अनुसार, शिक्षकों का वेतन सात दिसंबर को उनके खाते में आ गया लेकिन पैसा नहीं मिल रहा है। पैसे के लिए शिक्षक दर-दर भटक रहे हैं। लाइन लगाने के बाद ही निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है। अधिकतर शिक्षकों का वेतन काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में ही आता है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार तक पैसा नहीं मिलेगा तो हम लोग आंदोलन करेंगे।
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