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बाढ़ के पानी से मैरूंड हुए सगड़ी तहसील के 20 गांव
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लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की मुसीबत को बढ़ा दिया है। सगड़ी तहसील के 43 गांव बाढ़ के पानी से मैरूंड हो चुके हैं। घाघरा का जलस्तर वर्ष 2018 व 2019 में नदी के अधिकतम जलस्तर से ऊपर पहुंच चुका है। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से लोगों की मदद करने में जुटा हुआ है। लोगों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन की ओर से 170 नावें लगाई गई हैं।
जिला प्रशासन की ओर से घाघरा नदी में पहले ही 2017 की तरह ही बाढ़ आने की संभावना जताई जा चुकी है। जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। घाघरा नदी का जलस्तर वर्ष 2017 में 20 अगस्त को सबसे अधिक 72:92 मीटर पर पहुंचा था। वहीं 20 अगस्त को ही वर्ष 2018 में घाघरा नदी का जलस्तर सबसे ज्यादा 72.45 मीटर दर्ज किया गया है। जबकि वर्ष 2019 में घाघरा का अधिकतम जलस्तर 22 सितंबर को 71.66 मीटर रिकार्ड किया गया था। वर्तमान में नदी 2019 के अधिकतम जलस्तर को पार कर चुकी है। अभी इसमें और बढ़ोत्तरी की संभावना जताई जा रही है। जलस्तर बढ़ने से सगड़ी तहसील के उत्तर के लगभग 80 प्रतिशत गांव प्रभावित हो रहे हैं और 60 प्रतिशत गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कुल 133000 की आबादी है। जिसमें लगभग 80 हजार से ऊपर की आबादी प्रभावित हो रही है । वहीं 50000 की आबादी पूर्ण रूप से प्रभावित हो गई है। अब तक 43 गांव से अधिक मैरूंड हो गए हैं। इन गांवों के 80 से 50 मजरें भी पूर्ण रूप से प्रभावित हो गए हैं। सभी गांवों में अब आवागमन का मात्र नाव ही सहारा है। तहसील प्रशासन द्वारा 173 नाव चलाई जा रही है। गांव के मैरूंड होने के बाद राहत सामग्री वितरण होना चाहिए था जो अभी तक नहीं हुआ है।
शनिवार की शाम बदरहुआ नाले पर नदी का जलस्तर 72.27 मीटर दर्ज किया गया था। जो रविवार की शाम 29 सेमी बढ़कर 71.56 मीटर हो गया है। यहां पर नदी का जलस्तर खतरा 71.68 मीटर से 88 सेमी अधिक है। वहीं डिघिया नाले पर नदी का जलस्तर शनिवार की शाम 71.43 मीटर दर्ज किया गया था। जो रविवार की शाम 27 सेमी बढ़कर 71.70 मीटर हो गया। यहां पर नदी का जलस्तर खतरा बिंदु 70.40 मीटर से 130 सेमी अधिक है। तहसीलदार सगडी बृजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जरूरत की चीजें बाढ़ प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं पशुओं के चारे के लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने कुड़ही ढ़ाला के पास भूसा गिरा दिया है। जिससे विस्थापित हो रहे पशुओं को चारे की समस्या ना हो । बाढ़ के पानी से ग्रामीणों की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है ।लोगों को आने जाने के लिए नाव तो मिल रही है वही बहुत ऐसे लोग हैं जो अपने घरों में दुबके हुए हैं।
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पानी में डूबने से 80 प्रतिशत फसल हुई बर्बाद
लाटघाट। फ्लड एरिया में किसानों द्वारा धान और गन्ने की बुआई की गई थी। बाढ़ के पानी में डूबने से किसानों की फसल 80 प्रतिशत बर्बाद हो गई है। धान तो पानी में पूर्ण रूप से डूब गया है। वहीं पानी में डूबने के काण गन्ने की फसल भी प्रभावित हो रही है। पानी अधिक दिनों तक लगने के कारण गन्ने की फसल सूखने लगी है। जिससे किसान हताश हैं।
बंधे में हो रहे रिसाव को जेसीबी के जरिए कराया बंद
लाटघाट। सिंचाइ्र विभाग के अधिशासी अभियंता दीपक कुमार महुला गढ़वल बांध पर ही जमे हुए हैं। उनके निर्देश पर कर्मचारियों द्वारा बंधे में जगह-जगह हुए रेनकट को बंद करने का कार्य किया जा रहा है। कई जगहों पर बंधा धंस गया है जिसमें मिट्टी भरने का कार्य किया जा रहा है। शनिवार की रात हैदराबाद और ईस्माइलपुर के पास बंधे में रिसाव की सूचना मिलने पर अधिशासी अभियंता दीपक कुमार, जेई औरएसडीओ के साथ रात नौ बजे पहुंचे। उन्होंने जेसीबी से खुदवाकर रिसाब को बंद कराया। अधिशासी अभियंता ने बताया कि हमारा बंधा पूरी तरह से सुरक्षित है।
डूबते युवक को बचाया गया
लाटघाट। चक्की गांव के विशाल उम्र 20 वर्ष पुत्र विजयनरायन निवासी ग्राम अमुडी, थाना मुबारकपुर अपने नाना मातबर के घर आया थे। रविवार की दोपहर 12:15 बजे दरवाजे के सामने पशु निकालते समय नदी में डूब गया। जिसकी सूचना पाकर ग्राम प्रधान पल्टन यादव, मातबर यादव, छोटेलाल, लेखपाल पंकज कुमार आदि मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद युवक को बाहर निकाला और पेट से पानी निकालकर उसकी जान बचाई।
भूसे के अलावा नहीं मिल रही कोई सुविधा
लाटघंाट। बाढ़ का पानी चढ़ने के बाद कुड़ही ढ़ाला के पास बंधे पर 50 लोग, महाजी में 10 लोग, शिवपुर में 35 लोग बंधे पर आकर शरण ले लिए हैं। अपने पशु के साथ लोग बंधे पर आए हैं। कुड़ही ढाला के विस्थापित कौशल्या पत्नी रामनिवास, सरिता पत्नी सुरेश, कुसुम, संतोष, लोरिक, राकेश आदि लोगों के पशुओं को भूसा मिला लेकिन अभी तक प्रशसन की ओर से अन्य राहत सामग्री नहीं दी गई। देवारा ईश्माइलपुर में नाव न लगाए जाने से लोगों में रोष व्याप्त है।
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जिला प्रशासन की ओर से घाघरा नदी में पहले ही 2017 की तरह ही बाढ़ आने की संभावना जताई जा चुकी है। जिसे लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। घाघरा नदी का जलस्तर वर्ष 2017 में 20 अगस्त को सबसे अधिक 72:92 मीटर पर पहुंचा था। वहीं 20 अगस्त को ही वर्ष 2018 में घाघरा नदी का जलस्तर सबसे ज्यादा 72.45 मीटर दर्ज किया गया है। जबकि वर्ष 2019 में घाघरा का अधिकतम जलस्तर 22 सितंबर को 71.66 मीटर रिकार्ड किया गया था। वर्तमान में नदी 2019 के अधिकतम जलस्तर को पार कर चुकी है। अभी इसमें और बढ़ोत्तरी की संभावना जताई जा रही है। जलस्तर बढ़ने से सगड़ी तहसील के उत्तर के लगभग 80 प्रतिशत गांव प्रभावित हो रहे हैं और 60 प्रतिशत गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कुल 133000 की आबादी है। जिसमें लगभग 80 हजार से ऊपर की आबादी प्रभावित हो रही है । वहीं 50000 की आबादी पूर्ण रूप से प्रभावित हो गई है। अब तक 43 गांव से अधिक मैरूंड हो गए हैं। इन गांवों के 80 से 50 मजरें भी पूर्ण रूप से प्रभावित हो गए हैं। सभी गांवों में अब आवागमन का मात्र नाव ही सहारा है। तहसील प्रशासन द्वारा 173 नाव चलाई जा रही है। गांव के मैरूंड होने के बाद राहत सामग्री वितरण होना चाहिए था जो अभी तक नहीं हुआ है।
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शनिवार की शाम बदरहुआ नाले पर नदी का जलस्तर 72.27 मीटर दर्ज किया गया था। जो रविवार की शाम 29 सेमी बढ़कर 71.56 मीटर हो गया है। यहां पर नदी का जलस्तर खतरा 71.68 मीटर से 88 सेमी अधिक है। वहीं डिघिया नाले पर नदी का जलस्तर शनिवार की शाम 71.43 मीटर दर्ज किया गया था। जो रविवार की शाम 27 सेमी बढ़कर 71.70 मीटर हो गया। यहां पर नदी का जलस्तर खतरा बिंदु 70.40 मीटर से 130 सेमी अधिक है। तहसीलदार सगडी बृजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जरूरत की चीजें बाढ़ प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं पशुओं के चारे के लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने कुड़ही ढ़ाला के पास भूसा गिरा दिया है। जिससे विस्थापित हो रहे पशुओं को चारे की समस्या ना हो । बाढ़ के पानी से ग्रामीणों की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है ।लोगों को आने जाने के लिए नाव तो मिल रही है वही बहुत ऐसे लोग हैं जो अपने घरों में दुबके हुए हैं।
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पानी में डूबने से 80 प्रतिशत फसल हुई बर्बाद
लाटघाट। फ्लड एरिया में किसानों द्वारा धान और गन्ने की बुआई की गई थी। बाढ़ के पानी में डूबने से किसानों की फसल 80 प्रतिशत बर्बाद हो गई है। धान तो पानी में पूर्ण रूप से डूब गया है। वहीं पानी में डूबने के काण गन्ने की फसल भी प्रभावित हो रही है। पानी अधिक दिनों तक लगने के कारण गन्ने की फसल सूखने लगी है। जिससे किसान हताश हैं।
बंधे में हो रहे रिसाव को जेसीबी के जरिए कराया बंद
लाटघाट। सिंचाइ्र विभाग के अधिशासी अभियंता दीपक कुमार महुला गढ़वल बांध पर ही जमे हुए हैं। उनके निर्देश पर कर्मचारियों द्वारा बंधे में जगह-जगह हुए रेनकट को बंद करने का कार्य किया जा रहा है। कई जगहों पर बंधा धंस गया है जिसमें मिट्टी भरने का कार्य किया जा रहा है। शनिवार की रात हैदराबाद और ईस्माइलपुर के पास बंधे में रिसाव की सूचना मिलने पर अधिशासी अभियंता दीपक कुमार, जेई औरएसडीओ के साथ रात नौ बजे पहुंचे। उन्होंने जेसीबी से खुदवाकर रिसाब को बंद कराया। अधिशासी अभियंता ने बताया कि हमारा बंधा पूरी तरह से सुरक्षित है।
डूबते युवक को बचाया गया
लाटघाट। चक्की गांव के विशाल उम्र 20 वर्ष पुत्र विजयनरायन निवासी ग्राम अमुडी, थाना मुबारकपुर अपने नाना मातबर के घर आया थे। रविवार की दोपहर 12:15 बजे दरवाजे के सामने पशु निकालते समय नदी में डूब गया। जिसकी सूचना पाकर ग्राम प्रधान पल्टन यादव, मातबर यादव, छोटेलाल, लेखपाल पंकज कुमार आदि मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद युवक को बाहर निकाला और पेट से पानी निकालकर उसकी जान बचाई।
भूसे के अलावा नहीं मिल रही कोई सुविधा
लाटघंाट। बाढ़ का पानी चढ़ने के बाद कुड़ही ढ़ाला के पास बंधे पर 50 लोग, महाजी में 10 लोग, शिवपुर में 35 लोग बंधे पर आकर शरण ले लिए हैं। अपने पशु के साथ लोग बंधे पर आए हैं। कुड़ही ढाला के विस्थापित कौशल्या पत्नी रामनिवास, सरिता पत्नी सुरेश, कुसुम, संतोष, लोरिक, राकेश आदि लोगों के पशुओं को भूसा मिला लेकिन अभी तक प्रशसन की ओर से अन्य राहत सामग्री नहीं दी गई। देवारा ईश्माइलपुर में नाव न लगाए जाने से लोगों में रोष व्याप्त है।