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Azamgarh News: निबलेट की डायरी से समझा 1942 का आजमगढ़
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शिब्ली नेशनल कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर विशेष शैक्षिक कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राएं। श्रो
शिब्ली नेशनल कॉलेज के इतिहास विभाग के तत्वावधान में शनिवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन 1942 और आजमगढ़ : निबलेट की डायरी के संदर्भ में’ विषय पर विशेष शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जिले में हुए घटनाक्रम, जनप्रतिरोध और तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों का निबलेट की डायरी के संदर्भ में विश्लेषण किया गया।
कार्यक्रम के विशेष वक्ता केसरी नारायण सिंह ने कहा कि रॉबर्ट हॉवर्ड निबलेट की डायरी के माध्यम से तत्कालीन प्रशासनिक प्रतिक्रिया, जनभावनाओं और आंदोलन की तीव्रता का प्रत्यक्ष अनुमान लगाया जा सकता है।
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कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अफसर अली की संरक्षकता में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. अलाउद्दीन खान ने की। उन्होंने कहा कि निबलेट की डायरी जैसे समकालीन स्रोत आजमगढ़ की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को नए दृष्टिकोण से समझने में उपयोगी हैं।
आशीष और श्नंद कुमार ने भी विषय से संबंधित विचार रखा और 1942 के आंदोलन के विभिन्न पहलुओं तथा जिले की स्थानीय परिस्थितियों और जनप्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला।
संचालन डॉ. मोहम्मद शकीम ने किया। उन्होंने विषय के विभिन्न पक्षों को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच शैक्षिक संवाद स्थापित किया। अंत में डॉ. सिद्धार्थ सिंह ने सभी का आभार जताया।
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इसमें भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जिले में हुए घटनाक्रम, जनप्रतिरोध और तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों का निबलेट की डायरी के संदर्भ में विश्लेषण किया गया।
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कार्यक्रम के विशेष वक्ता केसरी नारायण सिंह ने कहा कि रॉबर्ट हॉवर्ड निबलेट की डायरी के माध्यम से तत्कालीन प्रशासनिक प्रतिक्रिया, जनभावनाओं और आंदोलन की तीव्रता का प्रत्यक्ष अनुमान लगाया जा सकता है।
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कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अफसर अली की संरक्षकता में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. अलाउद्दीन खान ने की। उन्होंने कहा कि निबलेट की डायरी जैसे समकालीन स्रोत आजमगढ़ की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को नए दृष्टिकोण से समझने में उपयोगी हैं।
आशीष और श्नंद कुमार ने भी विषय से संबंधित विचार रखा और 1942 के आंदोलन के विभिन्न पहलुओं तथा जिले की स्थानीय परिस्थितियों और जनप्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला।
संचालन डॉ. मोहम्मद शकीम ने किया। उन्होंने विषय के विभिन्न पक्षों को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच शैक्षिक संवाद स्थापित किया। अंत में डॉ. सिद्धार्थ सिंह ने सभी का आभार जताया।