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Azamgarh News: सामग्री मद में आजमगढ़ मंडल की 197 करोड़ से ज्यादा की देनदारी
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आजमगढ़। प्रदेश में ग्राम पंचायतों के कार्यकाल का अंतिम दौर चल रहा है। अपने कार्यकाल में सभी प्रधान अपना हिसाब साफ करना चाहते हैं।इधर बीते वर्ष आजमगढ़, बलिया और मऊ की ग्राम पंचायतों ने सामग्री मद से धड़ाधड़ काम तो कराए पर आज तक उन्हें भुगतान नहीं मिला। आलम यह है कि आजमगढ़ मंडल में अभी तक कुल 197.76 करोड़ रुपये की देनदारी है।
प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई तक है। अंतिम दौर को देखते हुए बीते वित्तीय वर्ष ग्राम पंचायतों ने इंटरलॉकिंग, खडंजा, सीसीरोड, पशुशेड, नाला-नाली आदि बनवाए। इस दौरान प्रधानों ने मनरेगा के सामग्री मद से काम कराने के लिए निजी फर्मों से माल तो उधार लेकर काम करा लिया पर आज डेढ़ वर्ष बाद भी पैसे नहीं मिले। निजी फर्म संचालक ग्राम प्रधानों से उधारी का तगादा कर रहे हैं, उधर ग्राम प्रधान मनरेगा की धनराशि के लिए विकास भवन से लेकर खंड विकास अधिकारी कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
अभी बीते वर्ष की धनराशि का भुगतान ही नहीं हो पाया था कि इस वर्ष की धनराशि और बढ़ गई। अब ग्राम पंचायतों के कार्यकाल का चंद समय ही रह गया है, ऐसे में प्रधान परेशान हैं।
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काम कराने के बावजूद समय से भुगतान न होने से प्रधानों के सामने संकट उत्पन्न हो गया है। अब ग्राम पंचायतों का कार्यकाल कुछ माह ही बचा है। ऐसे में शासन को प्राथमिकता पर लेकर भुगतान कराना चाहिए। जल्द भुगतान नहीं होता है तो प्रधान संगठन अगली रणनीति तैयार करेगा। - रविंद्र राय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष/उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन।
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प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मई तक है। अंतिम दौर को देखते हुए बीते वित्तीय वर्ष ग्राम पंचायतों ने इंटरलॉकिंग, खडंजा, सीसीरोड, पशुशेड, नाला-नाली आदि बनवाए। इस दौरान प्रधानों ने मनरेगा के सामग्री मद से काम कराने के लिए निजी फर्मों से माल तो उधार लेकर काम करा लिया पर आज डेढ़ वर्ष बाद भी पैसे नहीं मिले। निजी फर्म संचालक ग्राम प्रधानों से उधारी का तगादा कर रहे हैं, उधर ग्राम प्रधान मनरेगा की धनराशि के लिए विकास भवन से लेकर खंड विकास अधिकारी कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
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अभी बीते वर्ष की धनराशि का भुगतान ही नहीं हो पाया था कि इस वर्ष की धनराशि और बढ़ गई। अब ग्राम पंचायतों के कार्यकाल का चंद समय ही रह गया है, ऐसे में प्रधान परेशान हैं।
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काम कराने के बावजूद समय से भुगतान न होने से प्रधानों के सामने संकट उत्पन्न हो गया है। अब ग्राम पंचायतों का कार्यकाल कुछ माह ही बचा है। ऐसे में शासन को प्राथमिकता पर लेकर भुगतान कराना चाहिए। जल्द भुगतान नहीं होता है तो प्रधान संगठन अगली रणनीति तैयार करेगा। - रविंद्र राय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष/उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन।