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नोटबंदी के एक साल बाद भी कैशलेस नहीं हो सका आजमगढ़

Sun, 05 Nov 2017 11:56 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Sun, 05 Nov 2017 11:56 PM IST
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Azamgarh could not be cashless even after one year of demoneitization
demonetization
आजमगढ़। नोटबंदी का एक साल आठ नवंबर को पूरा हो रहा है। नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान पर जोर दिया गया था। इसके बाद भी जिले में अभी तक मात्र 800 प्रतिष्ठानों पर ही पीओएस मशीन लग पाई है। उपभोक्ता भी इसका कम ही प्रयोग करते हैं।
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क्योंकि अधिकतर दुकानदारों की ओर से पीओएस मशीन से पेमेंट करने पर दो से ढाई प्रतिशत तक अतिरिक्त लगा दिया जाता है। हां, बैंकों से कैश कम मिलने के कारण लोगों की एटीएम के प्रयोग के प्रति रुझान बढ़ा हैै।
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एक साल पहले नोटबंदी लागू की गई तो बैंकों पर पुराने नोटों के जमा कराने और बदलने के लिए लोगों की कतारें लगनी शुरू हो गई थी। एक माह से अधिक समय तक लोग बैंकों के सामने कतार लगाते रहे। रुपयों की किल्लत को देखते हुए सरकार की ओर से लोगों को डिजिटल पेमेंट के बारे में जानकारी दी।
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इसे बढ़ावा देने के लिए कई तरह के उपाय किए गए। पेटीएम, भीम एप आदि के बारे में लोगों को कैंप लतक लगाकर समझाया गया। व्यापारियों से भी पीओएस मशीन लगवाने के लिए जगरूक किया गया। इसके बाद भी एक साल में जिले में 800 प्रतिष्ठानों पर ही पीओएस मशीन लग पाई है।

इसमें बड़ी दुकानों और मॉल आदि में तो समस्या नहीं है, लेकिन अधिकतर दुकानदारों की ओर से इसके माध्यम से पेमेंट करने पर दो से ढ़ाई प्रतिशत तक अधिक मूल्य चार्ज किया जाता है। इससे लोग नगद खरीद पर ही जोर दे रहे हैं।

नोटबंदी के बाद से लगातार बैंकों से कम कैश जारी होने से एटीम के प्रयोग के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है, लेकिन लोगों की कम जानकारी फायदा यहां से साइबर क्रीइम करने वाले उठा रहे हैं। रोजाना औसतन दो मामले जिले में साइबर क्राइम के सामने आ रहे हैं। बैंकों की ओर से डिजिटल पेमेंट के लिए लोगों को और जागरूक करने की जरूरत है।

 नहीं नजर आते अब जागरूक करने वाले कैंप
आजमगढ़। नोटबंदी के बाद विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से लोगों को डिजिटल पेमेंट के प्रति जागरूक करने के लिए कैंप लगाए गए थे। कैंप में लोगों को पेटीएम और भीम एप जैसे साधनों के प्रयोग के बारे में बताया जा रहा था। समय के साथ जैसे ही नोटों की किल्लत बाजार से दूर हुई ऐसे कैंप भी बंद हो गए। अब इस तरीके का जिले में कोई कैंप भी संचालित नहीं हो रहा है।


नोटबंदी के बाद लोगों में डिजिटल पेमेंट के प्रति जागरूकता को बढ़ी है, लेकिन ये जिले में अभी काफी नाकाफी है। अभी तक जिले में मात्र 800 प्रतिष्ठानों में ही पीओएस मशीन लग पाई है। इसका संचालन भी कम हो रहा है।
मनोज कुमार, एलडीएम
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