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राजस्व परिषद ने लौटाया जिला प्रशासन का प्रस्ताव
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आजमगढ़। शहर में दो जोन की एसटीपी के लिए अइनिया में भूमि तलाशी गई थी। हालां कि भूमि पशुचर की थी। इसलिए जिला प्रशासन की ओर से भू मि को एसटीपी के लिए देने को राजस्व विभाग से प्रस्ताव भेजकर अनुमति मांगी गई थी। प्रस्ताव नियमानुसार न होने के कारण राजस्व परिषद की ओर से इसे मूलरूप में वापस कर दिया गया है। साथ ही राजस्व संहिता की धारा 77(2) के अनुसार प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए है। जनपद में एसटीपी नहीं होने से शहर से निकलने वाला गंदी पानी बिना ट्रीटमेंट के लगभग 22 नालों के माध्यम से सीधे तमसा नदीं में गिरता है। इससे जीवन दायिनी तमसा नदी का पानी आचमन के योग्य भी नहीं रह गया है। वर्षों पहले आधे शहर में सीवर लाइन बिछाई जा चुकी है। इससे निकलने वाला गंदा पानी भी धर्मू नाले के माध्यम से सीधे तमसा नदी में गिरता है। इन नालों के ट्रीटमेंट के लिए शहर में तीन स्थानों पर एसटीपी की स्थापना की योजना जल निगम की ओर से बनाई गई थी। एक एसटीपी के लिए पटखौली में जमीन भी जिला प्रशासन की ओर से जलनिगम को दी गई। इस पर लगभग 43 करोड़ का प्रस्ताव भी शासन ने मंजूर कर धनराशि भी जारी की, लेकिन इसका टेंडर प्रमुख सचिव ने ये कहते हुए निरस्त कर दिया कि एसटीपी के निर्माण के भूमि कम है।
इसके बाद से जल निगम की ओर से शहर में एसटीपी की स्थापना के लिए भूमि तलाश जा रही है। पटखौली में नये सिरे किसानों से भूमि खरीदने के लिए समाचार-पत्रों में विज्ञापन का प्रकाश भी कराया गया। इसके बाद भी अभी तक योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। वहीं, अमृत योजना के तहत दो अन्य जोन के लिए स्थापित होने वाली एसटीपी के लिए ग्राम समाज की उसर, बंजर और नवीन परती की भूमि नहीं होने पर एसडीएम सदर की ओर से ग्राम अइनिया में पशुचर की .764 हेक्टेयर भूमि सुझाई गई थी। भूमि पशुचर की होने के कारण इसे एसटीपी के लिए देने से पहले शासन की अनुमति जरूरी थी। इसके लिए प्रस्ताव पिछले दिनों जिलाधिकारी एनपी सिंह की ओर से राजस्व परिषद को भेजी गई थी। राजस्व परिषद ने इसे मूल रूप में वापस कर दिया है। साथ ही कहा गया है कि आरक्षित श्रेणी की भूमि का पुनर्ग्रहण उप्र राजस्व संहिता 2006 की धारा 77(2) के आलोक में ही हो सकता है। अत: इसी के अनुसार तैयार कर प्रस्ताव भेजा जाए। फिलहाल प्रस्ताव वापस होने से मामला एक बार फिर अटक गया है।
क्या है धारा 77(2) में प्रावधान
आजमगढ़। राजस्व संहिता की धारा 77(2) लोक प्रयोजन से संबंधि है। पहले तो शासन के निर्देश हैं कि सार्वजनिक उफयोग की भूमि जैसे पशुचर, खलिहान, हड़ावर, खाद गड्ढे, होलिका स्थल जैसी भूमि का श्रेणी परिवर्तन उचित नहीं है। अपरिहार्य परिस्थियों में ही श्रेणी परिवर्तन किया जाए। को प्रयोजन की स्थिति में ही ऐसा हो सकता है। डीएम को प्रमाण-पत्र देना होता है कि जिस उद्देश्य से ये जमीन छोड़ी गई थी उसकी उपयोगिता नहीं है। यह भी प्रमाण-पत्र देना होता है कि जिस उद्देश्य से दी जा रही है वो अति आवश्यक है।
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राजस्व परिषद को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव वापस होने की जानकारी नहीं है। यदि प्रस्ताव को वापस किया गया है तो उसे नियमानुसार तैयार कर फिर से राजस्व परिषद को भेजा जाएगा।
प्रशांत नायक, एसडीएम सदर
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इसके बाद से जल निगम की ओर से शहर में एसटीपी की स्थापना के लिए भूमि तलाश जा रही है। पटखौली में नये सिरे किसानों से भूमि खरीदने के लिए समाचार-पत्रों में विज्ञापन का प्रकाश भी कराया गया। इसके बाद भी अभी तक योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। वहीं, अमृत योजना के तहत दो अन्य जोन के लिए स्थापित होने वाली एसटीपी के लिए ग्राम समाज की उसर, बंजर और नवीन परती की भूमि नहीं होने पर एसडीएम सदर की ओर से ग्राम अइनिया में पशुचर की .764 हेक्टेयर भूमि सुझाई गई थी। भूमि पशुचर की होने के कारण इसे एसटीपी के लिए देने से पहले शासन की अनुमति जरूरी थी। इसके लिए प्रस्ताव पिछले दिनों जिलाधिकारी एनपी सिंह की ओर से राजस्व परिषद को भेजी गई थी। राजस्व परिषद ने इसे मूल रूप में वापस कर दिया है। साथ ही कहा गया है कि आरक्षित श्रेणी की भूमि का पुनर्ग्रहण उप्र राजस्व संहिता 2006 की धारा 77(2) के आलोक में ही हो सकता है। अत: इसी के अनुसार तैयार कर प्रस्ताव भेजा जाए। फिलहाल प्रस्ताव वापस होने से मामला एक बार फिर अटक गया है।
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क्या है धारा 77(2) में प्रावधान
आजमगढ़। राजस्व संहिता की धारा 77(2) लोक प्रयोजन से संबंधि है। पहले तो शासन के निर्देश हैं कि सार्वजनिक उफयोग की भूमि जैसे पशुचर, खलिहान, हड़ावर, खाद गड्ढे, होलिका स्थल जैसी भूमि का श्रेणी परिवर्तन उचित नहीं है। अपरिहार्य परिस्थियों में ही श्रेणी परिवर्तन किया जाए। को प्रयोजन की स्थिति में ही ऐसा हो सकता है। डीएम को प्रमाण-पत्र देना होता है कि जिस उद्देश्य से ये जमीन छोड़ी गई थी उसकी उपयोगिता नहीं है। यह भी प्रमाण-पत्र देना होता है कि जिस उद्देश्य से दी जा रही है वो अति आवश्यक है।
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राजस्व परिषद को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव वापस होने की जानकारी नहीं है। यदि प्रस्ताव को वापस किया गया है तो उसे नियमानुसार तैयार कर फिर से राजस्व परिषद को भेजा जाएगा।
प्रशांत नायक, एसडीएम सदर