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मानसून की दगा के बाद नहरों ने भी छोड़ा किसानों का साथ
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आजमगढ़। मानसून की बेरुखी के साथ ही नहर व बिजली भी किसानों को धोखा देने लगी है। कारण कि धान की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिला और पौध पीली हो रही है। अगर यही हाल रहा तो आगे उत्पादन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसको लेकर किसानों को काफी मायूसी छाई हुई है। किसान अपनी गाढ़ी कमाई को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
इस बार मानसून ने धान की रोपाई ठीक से न होने से किसानों की कमर टूट चुकी है। वह किसी प्रकार तो धान की रोपाई तो कर दिए लेकिन अब उनको बचाना काफी मुश्किल हो गया है, क्योंकि धान की फसल को भरपूर पानी नहीं मिल सका है। रोजाना अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहता है। गर्मी का असर फसल पर पड़ रहा है। जिसके कारण धान की पौध पीली हो रही है।
जिले में सिंचाई के लिए शारदा सहायक खंड-23 व 32 की नहरें और उनकी कई शाखाएं हैं। लेकिन ज्यादातर नहरों और माइनरों में पानी ही नहीं है। किसी में है भी तो टेल तक नहीं है जिसके कारण पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नहरों में टेल तक पानी न होने के कारण किसानों को नहर में ही पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या विकट है। बहुत जगहों पर तो लो-वोल्टेज के कारण समस्या खड़ी हो गई है। जिसके कारण न सरकारी ट्यूबवेल चल पा रहे और न ही निजी नलकूप। किसान महंगे दामों पर डीजल खरीदकर पंपिंग सेट से अपने खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। बिजली विभाग का ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 20 घंटे तक विद्युत आपूर्ति का दावा पूरी तरह से हवा हवाई ही साबित हो रहा है।
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सिंचाई को नहर में लगाना पड़ रहा पंपिंग सेट
पवई। क्षेत्र में फसलों की सिंचाई नहर पर ही निर्भर है। लेकिन नहर में पर्याप्त पानी न होने के कारण यह खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। खरीफ की मुख्य फसल धान में पानी न होने के कारण कहीं सूख रही है तो कहीं फसल पीली होने लगी है। शारदा सहायक खंड- 32 नहर बागबहार में इन दिनों पानी न के बराबर है। जिससे धान की खेती करने वाले किसानों के लिए समस्या खड़ी हो गई है। नहर में पानी कम होने से खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है जिसके काराण किसान फसल में पानी देने के लिए पंपिंग सेट के सहारे पानी खींच रहे हैं।
सूख गई नहर फसलों को कैसे मिले पानी
अहरौला। मौसमी बारिश न होने से किसानों के धान की फसलें सूख रही हैं। बिजली की कटौती व सिंचाई के लिए नहरों में पानी न होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। टांडा खंड जिलेदारी द्वितीय से सिंचाई के लिए निकाली गई शाहपुर सेक्शन की अहरौला माइनर में कभी पानी ही नहीं आता। नहर हमेशा सूखी रहती है। भाजपा सूचना प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. राम सिंह पालीवाल ने बताया कि इसकी कई बार शिकायत की गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। यह अहरौला के मड़ना गांव में जाकर खत्म हो गई है। अगर इसमें पानी छोड़ा जाता तो सैकड़ों किसान लाभांवित होते।
जब आवश्यकता होती नहर में नहीं आता पानी
सगड़ी। शारदा सहायक खंड- 32 नहर में टेल तक पानी न आने के कारण किसान फसलों की सिंचाई नहीं पा रहे हैं। धान की फसल को बचाने के लिए वह पंपसेट लगाकर खिंचाई कर रहे हैं। जिसके चलते किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। वह नहर में टेल बराबर पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र के वर्नापुर, भीमबर, मारा पारा, बीबीपुर, रामगढ़, सरगहासागर, पूरा बाल नारायन, दान शनिचरा, कुदारन तिवारी, खिल्लूपट्टी आदि गांवों में शारदा सहायक खंड-32 नहर से किसान फसल की सिंचाई करते हैं। लेकिन नहर में पानी बहुत ही कम आ रहा है। किसान हरिनाथ, रमेश यादव, रामदरश, सुरेंद्र, सतीश, राजेश गिरी, मनोज यादव, राजेश आदि ने बताया कि जब पानी की आवश्यकता होती है तब नहर में पानी नहीं आता है।
एक नजर में जनपद की नहरें
नाम- संख्या- लंबाई
शारदा सहायक खंड -23- 155- 819.38 किमी.
शारदा सहायक खंड-32- 198- 915.88 किमी.
शारदा सहायक खंड-22- 10- 42.97 किमी.
शारदा सहायक खंड-32 के अधिशासी अभियंता अशोक सिंह ने बताया कि बरसात कम होने से नहर के पानी की डिमांड बढ़ गई है। पानी के लिए ऊपर डिमांड भेजा गया है लेकिन पानी मिल नहीं पा रहा है। सगड़ी और अहरौला क्षेत्र में पानी दो-तीन दिन में आ जाएगा।
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इस बार मानसून ने धान की रोपाई ठीक से न होने से किसानों की कमर टूट चुकी है। वह किसी प्रकार तो धान की रोपाई तो कर दिए लेकिन अब उनको बचाना काफी मुश्किल हो गया है, क्योंकि धान की फसल को भरपूर पानी नहीं मिल सका है। रोजाना अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहता है। गर्मी का असर फसल पर पड़ रहा है। जिसके कारण धान की पौध पीली हो रही है।
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जिले में सिंचाई के लिए शारदा सहायक खंड-23 व 32 की नहरें और उनकी कई शाखाएं हैं। लेकिन ज्यादातर नहरों और माइनरों में पानी ही नहीं है। किसी में है भी तो टेल तक नहीं है जिसके कारण पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नहरों में टेल तक पानी न होने के कारण किसानों को नहर में ही पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या विकट है। बहुत जगहों पर तो लो-वोल्टेज के कारण समस्या खड़ी हो गई है। जिसके कारण न सरकारी ट्यूबवेल चल पा रहे और न ही निजी नलकूप। किसान महंगे दामों पर डीजल खरीदकर पंपिंग सेट से अपने खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। बिजली विभाग का ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 20 घंटे तक विद्युत आपूर्ति का दावा पूरी तरह से हवा हवाई ही साबित हो रहा है।
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सिंचाई को नहर में लगाना पड़ रहा पंपिंग सेट
पवई। क्षेत्र में फसलों की सिंचाई नहर पर ही निर्भर है। लेकिन नहर में पर्याप्त पानी न होने के कारण यह खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। खरीफ की मुख्य फसल धान में पानी न होने के कारण कहीं सूख रही है तो कहीं फसल पीली होने लगी है। शारदा सहायक खंड- 32 नहर बागबहार में इन दिनों पानी न के बराबर है। जिससे धान की खेती करने वाले किसानों के लिए समस्या खड़ी हो गई है। नहर में पानी कम होने से खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है जिसके काराण किसान फसल में पानी देने के लिए पंपिंग सेट के सहारे पानी खींच रहे हैं।
सूख गई नहर फसलों को कैसे मिले पानी
अहरौला। मौसमी बारिश न होने से किसानों के धान की फसलें सूख रही हैं। बिजली की कटौती व सिंचाई के लिए नहरों में पानी न होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। टांडा खंड जिलेदारी द्वितीय से सिंचाई के लिए निकाली गई शाहपुर सेक्शन की अहरौला माइनर में कभी पानी ही नहीं आता। नहर हमेशा सूखी रहती है। भाजपा सूचना प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. राम सिंह पालीवाल ने बताया कि इसकी कई बार शिकायत की गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। यह अहरौला के मड़ना गांव में जाकर खत्म हो गई है। अगर इसमें पानी छोड़ा जाता तो सैकड़ों किसान लाभांवित होते।
जब आवश्यकता होती नहर में नहीं आता पानी
सगड़ी। शारदा सहायक खंड- 32 नहर में टेल तक पानी न आने के कारण किसान फसलों की सिंचाई नहीं पा रहे हैं। धान की फसल को बचाने के लिए वह पंपसेट लगाकर खिंचाई कर रहे हैं। जिसके चलते किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। वह नहर में टेल बराबर पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र के वर्नापुर, भीमबर, मारा पारा, बीबीपुर, रामगढ़, सरगहासागर, पूरा बाल नारायन, दान शनिचरा, कुदारन तिवारी, खिल्लूपट्टी आदि गांवों में शारदा सहायक खंड-32 नहर से किसान फसल की सिंचाई करते हैं। लेकिन नहर में पानी बहुत ही कम आ रहा है। किसान हरिनाथ, रमेश यादव, रामदरश, सुरेंद्र, सतीश, राजेश गिरी, मनोज यादव, राजेश आदि ने बताया कि जब पानी की आवश्यकता होती है तब नहर में पानी नहीं आता है।
एक नजर में जनपद की नहरें
नाम- संख्या- लंबाई
शारदा सहायक खंड -23- 155- 819.38 किमी.
शारदा सहायक खंड-32- 198- 915.88 किमी.
शारदा सहायक खंड-22- 10- 42.97 किमी.
शारदा सहायक खंड-32 के अधिशासी अभियंता अशोक सिंह ने बताया कि बरसात कम होने से नहर के पानी की डिमांड बढ़ गई है। पानी के लिए ऊपर डिमांड भेजा गया है लेकिन पानी मिल नहीं पा रहा है। सगड़ी और अहरौला क्षेत्र में पानी दो-तीन दिन में आ जाएगा।