शिलान्यास के बाद पुल निर्माण भूल गई सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरसात के मौसम में घाघरा जब अपने पूरे सबाब पर होती है तो तांडव मचाती है। लोगों को घर छोड़कर अन्यत्र शरण लेनी पड़ती है। 2012 में विधानसभा चुनाव के दौरान गोरखपुर जिले के बड़हलगंज में आयोजित जनसभा के दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने पुल निर्माण की घोषणा की थी। सठियांव चीनी मिल के शिलान्यास के दौरान ही उन्होंने फरवरी 2015 में इस पुल का भी शिलान्यास किया। चार सौ करोड़ में पुल का निर्माण होना था।
सदर से सपा मुखिया के सांसद बनते ही पुल की डिजाइन, स्टीमेट और बोरिंग आदि का काम राज्य सेतु निगम ने करना शुरू कर दिया। जिस पर लाखों रुपये खर्च हुए लेकिन दो महीने बाद ही यह काम बंद हो गया। इस पुल के साथ ही चार छोटे पुलों का भी निर्माण होना था, जिसमें हाजीपुर बाजार, देवाराखास राजा, झंडी का पुरा और शिवलोचन के पुरवा पुल माइनर बनना था।
सारी जांच के बाद भी रुका पुल का निर्माणः लाटघाट क्षेत्र के रामनयन मिश्र, रामबदन यादव और जगन्नाथ शर्मा का कहना है कि पुल के लिए राज्य सेतु निगम वाराणसी की टीम ने दो महीने तक जांच की। लोकसभा चुनाव के समय प्रचार करने आए लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने भी महुला और भदौरा ढ़ाले की जनसभा में पुल के निर्माण की घोषणा की थी लेकिन अभी तक कोई कार्य शुरू नहीं हो सका।
पुल के निर्माण की सारी कारवाई पूरी हो चुकी है। पिछली बार समिति की लखनऊ में आयोजित बैठक में कुछ कमियों के कारण इसके प्रस्ताव पर मुहर नहीं लग सका। जो कमियां थी उसे दूर कर लिया गया है। अगली बैठक में उम्मीद है कि पुल के प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी और पुल का निर्माण शीघ्र शुरू हो जाएगा।
- एनके तिवारी, राज्य सेतु निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर