आजमगढ़: भाजपा नेता हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपी रिहा, पुलिस का खुलासा निकला झूठा
आजमगढ़ जिले के पवई थाना क्षेत्र में हुए भाजपा नेता हत्याकांड का पुलिस की ओर से किया गया खुलासा फर्जी साबित हुआ है। भाजपा नेता हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय ने डीआईजी के निर्देश पर सीओ मधुबन द्वारा की गई जांच के आधार पर 20 हजार रुपये के अनुबंध दाखिल कर रिहा करने का आदेश पारित किया।
बुधवार को आरोपी को रिहा कर दिया गया। अमर उजाला ने मामले में निर्दोष को फंसाने का प्रकरण को पूर्व में ही प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसमें पुलिस के खुलासे पर सवालियां निशान खड़े किए गए थे। खुलास फर्जी साबित होने का बाद एसओ पवई पर शिंकजा कसता दिखाई दे रहा है। हालांकि अभी इस मामले की जांच की जाएगी कि उन्होंने लापरवाही से बृजेश मिश्रा को गिरप्तार किया था या किसी सोची समझी योजना के तहत।
पवई थाना क्षेत्र के जल्दीपुर गांव निवासी भाजपा नेता 40 वर्षीय अर्जुन यादव पुत्र बुधई यादव की आठ अक्तूबर की रात उस समय गोली मार कर हत्या कर दी गई थी, जब वे अपनी दुकान बंद कर बाइक से वापस घर लौट रहे थे। भाजपा नेता को गोली मारे जाने की घटना के बाद पवई पुलिस ने आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल रवाना कर दिया था, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित किया।
घटना के बाबत मृतक के भाई ने थाने पर अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी थी। भाजपा नेता की हत्या के बाद पुलिस ने 18 नवंबर को खुलासा करते हुए रामपुर खालिस गांव निवासी बृजेश मिश्रा पुत्र चिंतामणि को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने अपने खुलासे के पीछे जो कहानी बताई थी। उसके अनुसार बृजेश मिश्रा मित्तूपुर स्थित एक मकान पर अवैध कब्जा किए हुए हैं, इस मामले में मृत भाजपा नेता अर्जुन यादव गृहस्वामी की तरफ से पैरवी कर रहे थे।
इसी के चलते बृजेश मिश्रा ने उनकी गोली मार कर हत्या कर दी। एसपी सुधीर कुमार सिंह ने भी यह बताया था कि बृजेश मिश्रा शातिर अपराधी है और पवई थाने का हिस्ट्रीशीटर है।
वहीं, गिरफ्तारी के बाद से ही ये मामला सामने आना लगा था कि पुलिस का यह पूरा खुलासा फर्जी है और बृजेश का इस हत्याकांड में कोई रोल ही नहीं था। ऐसी शिकायतें मिलने पर डीआईजी ने मामले में जांच बिठा दी थी। सीओ मधुबन राजकुमार सिंह को जांच दी गई थी। जांच के दौरान प्रकरण में बृजेश मिश्रा की कोई संलिप्ता नहीं मिलने पर राजकुमार सिंह ने धारा 169 के तहत न्यायालय से बृजेश मिश्रा को रिहा करने की याचना की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सुनवाई करते हुए पवई पुलिस द्वारा फजी आरोपी बनाए गए बृजेश मिश्रा को रिहा करने के आदेश दिए। 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंध पत्र पर बुधवार को उन्हें रिहा कर दिया गया।
बृजेश मिश्रा के निर्दोश साबित होने से एसओ पवई अयोध्या प्रसाद तिवारी पर भी शिकंजा कसने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि अभी इस दिशा में जांच जारी रहेगी कि थाना प्रभारी ने लापरवाही वश बृजेश मिश्रा को गिरफ्तार किया था या सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें फंसाया गया था।
तीन माह तक सलाखों के पीछे रहा बृजेश
बिना किसी जुर्म के ही इश मामले में बृजेश मिश्रा तीन माह तक जेल की सलाखों के पीछे रहा। उसका कहना था कि हत्याकांड के दिन वो अपनी बेटी का जन्मदिन मना रहा था। मेरा वारदात से कोई वास्ता नहीं था। मुझे फंसाया गया था। उन्होंने सहयोग के लिए गांव के लोगों का आभार जताया। कहा कि राजनीतिक कारणों से मुझे फंसाया गया था। साथ ही एसओ पवई अयोध्या प्रसाद तिवारी को बर्खास्त करने की मांग की।
रामपुर खालिस के रहने वाले बृजेश मिश्रा ने बताया कि डीआईजी सुभाष चंद्र दुबे व सीओ मधुबन राजकुमार सिंह की जांच ने मुझ निर्दोष का जीवन बर्बाद होने से बचा लिया। मेरी बस एक ही मांग है कि ऐसा फर्जी खुलासा करने वाले एसओ पवई पर तत्काल बर्खास्तगी की कार्रवाई हो, ताकि आगे कोई व्यक्ति किसी मामले में फर्जी न फंसाया जाए, इसके साथ ही उस राजनैतिक दबाव को भी सामने लाया जाए, जिसके चलते उसे इस प्रकरण में फर्जी फंसाया गया।
आजमगढ़ परिक्षेत्र के डीआईजी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि भाजपा नेता हत्याकांड में गिरफ्तार बृजेश मिश्रा के निर्दोष होने की बात सामने आ रही थी, जिसके चलते सीओ मधुबन को जांच दी गई थी। जांच के बाद गिरफ्तार आरोपी निर्दोष साबित हुआ तो उसे रिहा कर दिया गया। अभी विवेचना जारी रहेगी और इस मुद्दे पर भी जांच होगी कि एसओ पवई ने ऐसा जानबूझ कर किया अथवा गलती से हो गया। इसके साथ ही सही हत्यारों को भी जल्द पकड़ा जाएगा।