{"_id":"56-78332","slug":"Azamgarh-78332-56","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीता जी को देख श्रीराम हुए मुग्ध ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीता जी को देख श्रीराम हुए मुग्ध
Azamgarh
Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। श्रीरामलीला समिति के तत्वावधान में पुरानी कोतवाली पर चल रही रामलीला में बुधवार की रात को सीता जन्म, नगर दर्शन, फुलवारी और मीना बाजार का मंचन कलाकारों ने किया। जनकपुर से आए कलाकारों के जीवंत अभिनय को दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
श्रीरामलीला के क्रम में विश्वामित्र मुनि के यज्ञ रक्षा के बाद अयोध्या से लौट रहे श्रीराम, लक्ष्मण, गुरु विश्वामित्र से जनकपुर देखने का आग्रह करते हैं। विश्वामित्र दोनाें भाइयों को नगर दर्शन की अनुमति देते हैं। अनुमती मिलने पर दोनों भाई खुश्ाी से फुले नहीं समाते तथ्ाा बड़े ही मनोयोग से नगर दर्शन करते हैं। नगर भ्रमण के दौरान उन्हें पता चलता है कि जनकपुर के राजा जनक के महल के अंदर बहुत ही सुंदर बागीचा है। इस पर राम और लक्ष्मण दोनों भाई बागीचे के पास पहुंचते हैं।
वहां पहुंचने पर तैनात दासियों ने दोनों भाइयों को द्वार पर ही रोक दिया जाता है। संयोगवश उस समय सीता जी बागीचे में पूजन करने जा रही थीं। लक्ष्मण के विशेष आग्रह पर दासियों ने एक शर्त पर बागीचे में प्रवेश की अनुमति दी कि आप दोनों भाई किसी पेड़ की आड़ में छुप जाइएगा, ताकि सीता जी की नजर आप लोगों पर न पड़े। दासियों की बात मानते हुए दोनों भाई पेड़ की आड़ में छिपकर सीता जी को देखते हैं। सीता जी को देखकर भगवान श्रीराम मुग्ध हो जाते हैं और जब इस बात का पता विश्वामित्र को होता है तो वे भगवान राम से सीता स्वयंवर में ले जाते हैं। जनकपुर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला मंचन को देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला में मौजूद दर्शकों ने भ्ाी कलाकारों का हौसला बढ़ाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीरामलीला के क्रम में विश्वामित्र मुनि के यज्ञ रक्षा के बाद अयोध्या से लौट रहे श्रीराम, लक्ष्मण, गुरु विश्वामित्र से जनकपुर देखने का आग्रह करते हैं। विश्वामित्र दोनाें भाइयों को नगर दर्शन की अनुमति देते हैं। अनुमती मिलने पर दोनों भाई खुश्ाी से फुले नहीं समाते तथ्ाा बड़े ही मनोयोग से नगर दर्शन करते हैं। नगर भ्रमण के दौरान उन्हें पता चलता है कि जनकपुर के राजा जनक के महल के अंदर बहुत ही सुंदर बागीचा है। इस पर राम और लक्ष्मण दोनों भाई बागीचे के पास पहुंचते हैं।
विज्ञापन
वहां पहुंचने पर तैनात दासियों ने दोनों भाइयों को द्वार पर ही रोक दिया जाता है। संयोगवश उस समय सीता जी बागीचे में पूजन करने जा रही थीं। लक्ष्मण के विशेष आग्रह पर दासियों ने एक शर्त पर बागीचे में प्रवेश की अनुमति दी कि आप दोनों भाई किसी पेड़ की आड़ में छुप जाइएगा, ताकि सीता जी की नजर आप लोगों पर न पड़े। दासियों की बात मानते हुए दोनों भाई पेड़ की आड़ में छिपकर सीता जी को देखते हैं। सीता जी को देखकर भगवान श्रीराम मुग्ध हो जाते हैं और जब इस बात का पता विश्वामित्र को होता है तो वे भगवान राम से सीता स्वयंवर में ले जाते हैं। जनकपुर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला मंचन को देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला में मौजूद दर्शकों ने भ्ाी कलाकारों का हौसला बढ़ाया।
विज्ञापन