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वाहनों में ठूंसकर भेजे जा रहे हैं स्कूली छात्र
Azamgarh
Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
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आजमगढ़। आधुनिकता की दौड़ में अभिभावक इस कदर आगे निकल चुके हैं कि उन्हें इसकी परवाह नहीं कि उसका बच्चा प्रतिदिन किस तरह से वाहन में बैठकर स्कूल पहुंचता है। आलम यह है कि ज्यादातर वाहनों में छात्रों को ठूंसकर बैठाया जाता है। नियमों की धज्जी उड़ाने वाले इन स्कूली वाहनों को देख अधिकारी कार्रवाई की बजाय मुंह फेर लेते हैं। यही कारण है कि स्कूल पहुंचने और घर लौटने तक बच्चों की सुरक्षा भाग्य भरोसे ही रहती है।
जिले में लगभग 750 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हैं। जिसमें लगभग 50 विद्यालय शहर में संचालित होते हैं। शेष स्कूल कस्बों में संचालित होता है। गांवों में चलने वाले ज्यादातर अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। ऐसे कुछ विद्यालय शहर में भी संचालित हैं।
जिले के ज्यादातर बड़े विद्यालयों द्वारा छात्रों के आने और घर जाने के लिए रजिस्टर्ड बसें संचालित होती हैं। आरटीओ विभाग द्वारा इन स्कूली बसों को परमिशन दिया गया है। जिसमें विभिन्न विद्यालयों के लगभग 285 बसें शामिल हैं। स्कूलों के लिए बस के अलावा छोटी गाडि़यों को परमिशन देने का कोई प्रावधान नहीं है। बावजूद इसके जिले में धड़ल्ले से जीप, पीकअप, मारुति, टाटा मैजिक,आटो रिक्शा आदि क्षमता से अधिक छात्र बैठाकर स्कूल आते और घर को जाते हैं। इन वाहनों में ज्यादातर वाहन घरेलू गैस से संचालित होते हैं। संसाधन कम और छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से इन स्कूली बसों पर ओवरलोड की भी स्थिति रहती है। जिसके चलते इनकी गति भी तेज रहती है। जिसके चलते स्कूली बसें ज्यादातर दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं। महज एक सप्ताह पूर्व हुए रानी की सराय थाना क्षेत्र के शंकरपुर चेकपोस्ट के पास मंदिर से भिड़ी स्कूली बस ताजा उदाहरण हैं। सूत्रों की मानें तो चमकदमक दिखाने की वजह से ही ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में शिक्षा दिलाने की लालच में उसके जान की भी नहीं परवाह कर रहे हैं। इस संबंध में आरटीओ विक्रम सिंह ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि पहचान करके ऐसे वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसपीसिटी एके जैन ने कहा कि ऐसे विद्यालयों को जल्द ही चिन्हित करके उनके प्रबंधकों को नोटिस भेजी जाएगी। इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में लगभग 750 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हैं। जिसमें लगभग 50 विद्यालय शहर में संचालित होते हैं। शेष स्कूल कस्बों में संचालित होता है। गांवों में चलने वाले ज्यादातर अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। ऐसे कुछ विद्यालय शहर में भी संचालित हैं।
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जिले के ज्यादातर बड़े विद्यालयों द्वारा छात्रों के आने और घर जाने के लिए रजिस्टर्ड बसें संचालित होती हैं। आरटीओ विभाग द्वारा इन स्कूली बसों को परमिशन दिया गया है। जिसमें विभिन्न विद्यालयों के लगभग 285 बसें शामिल हैं। स्कूलों के लिए बस के अलावा छोटी गाडि़यों को परमिशन देने का कोई प्रावधान नहीं है। बावजूद इसके जिले में धड़ल्ले से जीप, पीकअप, मारुति, टाटा मैजिक,आटो रिक्शा आदि क्षमता से अधिक छात्र बैठाकर स्कूल आते और घर को जाते हैं। इन वाहनों में ज्यादातर वाहन घरेलू गैस से संचालित होते हैं। संसाधन कम और छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से इन स्कूली बसों पर ओवरलोड की भी स्थिति रहती है। जिसके चलते इनकी गति भी तेज रहती है। जिसके चलते स्कूली बसें ज्यादातर दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं। महज एक सप्ताह पूर्व हुए रानी की सराय थाना क्षेत्र के शंकरपुर चेकपोस्ट के पास मंदिर से भिड़ी स्कूली बस ताजा उदाहरण हैं। सूत्रों की मानें तो चमकदमक दिखाने की वजह से ही ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में शिक्षा दिलाने की लालच में उसके जान की भी नहीं परवाह कर रहे हैं। इस संबंध में आरटीओ विक्रम सिंह ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि पहचान करके ऐसे वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसपीसिटी एके जैन ने कहा कि ऐसे विद्यालयों को जल्द ही चिन्हित करके उनके प्रबंधकों को नोटिस भेजी जाएगी। इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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