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चाइनीज सामान का बहिष्कार बना लोकप्रियता का माध्यम
Updated Thu, 28 Sep 2017 12:07 AM IST
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आजमगढ़। हाल ही में देश में चाइनीज सामानों के बहिष्कार की आवाज उठी। इस दौरान कई संगठनों ने प्रदर्शन कर चौक आदि क्षेत्रों में चाइनीज सामानों की होली जलाई। इनमें वह लोग भी शामिल थे जिनके द्वारा दशहरे के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। प्रतिमा को सजाने में आज वहीं लोग चाइनीज झालरों को लगाकर बैठे हैं।
कहा जाता है कि किसी को उपदेश देना बहुत आसान है लेकिन उस पर अमल करना बहुत ही मुश्किल है। क्योंकि अगर आदमी उस पर अमल कर ले तो बहुुत से लोग उसकी देखादेखी उस पर अमल करने लगेंगे। हाल ही में चीन ने जब एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध किया था तो देश में चाइनीज सामानों के बहिष्कार की आवाज उठी। इस दौरान जिले के कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने चाइनीज सामानों की होली जलाई। इन लोगों द्वारा सबसे जाइनीज सामानों के बहिष्कार की अपील की गई। लेकिन बात आई और गई हो गई। क्योंकि इसमें से कई लोग ऐसे भी थे जिनके द्वारा दशहरे में मूर्ति की स्थापना की जाती है। इनके द्वारा चीन के विरोध में बड़े-बड़े नारे लगाए गए। लेकिन जब दशहरे पर मूर्ति की स्थापना के बाद जब सजावट की बात आई तो यही लोग चाइनीज झालरों को लगाकर बैठ गए और अच्छी सजावट को लेकर लोगों की वाहवाही बटोर रहे हैं। लेकिन उन्हें कोई हाल ही में किए गए प्रदर्शन और नारों की याद दिलाने वाला नहीं है कि अगर आप ऐसा करेंगे तो दूसरों से बहिष्कार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। आज नगर के हर क्षेत्र में स्थापित ज्यादातर मूर्तियों के पास चाइनीज झालरों से हुई सजावट को आसानी से देखा जा सकता है।
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कहा जाता है कि किसी को उपदेश देना बहुत आसान है लेकिन उस पर अमल करना बहुत ही मुश्किल है। क्योंकि अगर आदमी उस पर अमल कर ले तो बहुुत से लोग उसकी देखादेखी उस पर अमल करने लगेंगे। हाल ही में चीन ने जब एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध किया था तो देश में चाइनीज सामानों के बहिष्कार की आवाज उठी। इस दौरान जिले के कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने चाइनीज सामानों की होली जलाई। इन लोगों द्वारा सबसे जाइनीज सामानों के बहिष्कार की अपील की गई। लेकिन बात आई और गई हो गई। क्योंकि इसमें से कई लोग ऐसे भी थे जिनके द्वारा दशहरे में मूर्ति की स्थापना की जाती है। इनके द्वारा चीन के विरोध में बड़े-बड़े नारे लगाए गए। लेकिन जब दशहरे पर मूर्ति की स्थापना के बाद जब सजावट की बात आई तो यही लोग चाइनीज झालरों को लगाकर बैठ गए और अच्छी सजावट को लेकर लोगों की वाहवाही बटोर रहे हैं। लेकिन उन्हें कोई हाल ही में किए गए प्रदर्शन और नारों की याद दिलाने वाला नहीं है कि अगर आप ऐसा करेंगे तो दूसरों से बहिष्कार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। आज नगर के हर क्षेत्र में स्थापित ज्यादातर मूर्तियों के पास चाइनीज झालरों से हुई सजावट को आसानी से देखा जा सकता है।
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