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सपा जता रही संतोष, बसपा-भाजपा में शुरू हुआ मंथन
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:25 AM IST
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आजमगढ़।
निकाय चुनाव में करारी हार के साथ ही भाजपा और बसपा में हड़कंप की स्थिति है। हालांकि सपा ने तीन सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दिखाई है, लेकिन उसकी भी हालत खास अच्छी नहीं है। क्योंकि जनपद पहले से ही बसपा और सपा का गढ़ रहा है। सपा से मुलायम सिंह यादव जिले से सांसद हैं। पांस विधायक सपा से तो बसपा से चार विधायक हैं। भाजपा से एक सांसद और एक विधायक है। हालांकि भाजपा सांसद ने लालगंज से प्रत्याशी को जीत दिला लाज रख ली है। भाजपा विधायक अरुणकांत की माता सत्यभामा को तो माहुल में हार का सामना करना पड़ा।निकाय चुनाव इस बार सिंबल पर होने के कारण मैदान में सबसे ज्यादा दमदारी से भाजपा उतरी थी। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ शहर से घोषित प्रत्याशी अजय सिंह और सभी के समर्थन में डीएवी कालेज के मौदान में जनसभा को संबोधित कर चुके थे। हालांकि सपा से कोई राष्ट्रीय नेता मैदान में नहीं उतरा था, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, अबू आसिम आजमी और स्थानीय विधायकों ने कमान संभाल रखी थी। बसपा से पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी और स्थानीय विधायकों ने प्रचार में भाग लिया था। इसके बाद भी नागरिकों को रुझान निर्दलीय प्रत्याशियों की तरफ ज्यादा रहने से स्पष्ट है कि उन्होंने राष्ट्रीय के बजाय स्थानीय मुद्दों को ज्यादा महत्व दिया। जनादेश ने सभी राष्ट्रीय पार्टियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कमोबेश सभी पार्टियों में इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है। भाजपा में प्रत्याशियों का सही चयन न होने को हार का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पार्टी के खराब प्रदर्शन से संगठन के नेताओं पर बी गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।
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निकाय चुनाव में करारी हार के साथ ही भाजपा और बसपा में हड़कंप की स्थिति है। हालांकि सपा ने तीन सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दिखाई है, लेकिन उसकी भी हालत खास अच्छी नहीं है। क्योंकि जनपद पहले से ही बसपा और सपा का गढ़ रहा है। सपा से मुलायम सिंह यादव जिले से सांसद हैं। पांस विधायक सपा से तो बसपा से चार विधायक हैं। भाजपा से एक सांसद और एक विधायक है। हालांकि भाजपा सांसद ने लालगंज से प्रत्याशी को जीत दिला लाज रख ली है। भाजपा विधायक अरुणकांत की माता सत्यभामा को तो माहुल में हार का सामना करना पड़ा।निकाय चुनाव इस बार सिंबल पर होने के कारण मैदान में सबसे ज्यादा दमदारी से भाजपा उतरी थी। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ शहर से घोषित प्रत्याशी अजय सिंह और सभी के समर्थन में डीएवी कालेज के मौदान में जनसभा को संबोधित कर चुके थे। हालांकि सपा से कोई राष्ट्रीय नेता मैदान में नहीं उतरा था, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, अबू आसिम आजमी और स्थानीय विधायकों ने कमान संभाल रखी थी। बसपा से पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी और स्थानीय विधायकों ने प्रचार में भाग लिया था। इसके बाद भी नागरिकों को रुझान निर्दलीय प्रत्याशियों की तरफ ज्यादा रहने से स्पष्ट है कि उन्होंने राष्ट्रीय के बजाय स्थानीय मुद्दों को ज्यादा महत्व दिया। जनादेश ने सभी राष्ट्रीय पार्टियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कमोबेश सभी पार्टियों में इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है। भाजपा में प्रत्याशियों का सही चयन न होने को हार का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पार्टी के खराब प्रदर्शन से संगठन के नेताओं पर बी गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।