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महाशक्तिपीठों में होती है मां पल्हना धाम की गिनती
Updated Sat, 17 Mar 2018 11:36 PM IST
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पल्हना। जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर दक्षिण पूर्व दिशा में स्थित मां पाल्हमेश्वरी चार महाशक्तिपीठों में प्रमुख माना जाता है। पूरे साल यहां दर्शन-पूजन को भक्तों का तांता लगा रहता है।
मां पाल्हमेश्वरी धाम का वर्णन पद्म पुराण के द्वितीय खंड के सातवें अध्याय की बारहवीं चौपाई में है। रामचरित मानस के बाल कांड में महर्षि विश्वामित्र ने मां की महिमा का वर्णन किया है। इसके अलावा महाराजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ यहीं किया था। महाभारत के वन पर्व में वर्णित है कि जब पांडव पुत्र वन गए थे तो नारद जी ने धर्मराज युधिष्ठिर से इस स्थल के बारे में बताया और वह उनकी प्रेरणा से यहां आए थे। भगवान गौतम बुद्ध की पालि भाषा में लिखित ग्रंथ में वर्णन है कि भगवान बुद्ध अपने शिष्य आनंद के साथ इस स्थान पर आए थे। इतना ही नहीं ग्रंथ भोजप्रबंध के अनुसार राजा भोज ने यहां यज्ञ किया था। पुराणों के अनुसार राजा दक्ष द्वारा यज्ञ में अपनी पुत्री को आमंत्रित न करने पर अपने को अपमानित समझ कर मां सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर जान दे दी थी। तब भगवान शिव माता सती के मृत शरीर को कंधे पर रखकर तीनों लोक में भ्रमण करने लगे थे। जिससे भूचाल आ गया था। अनर्थ की आशंका से भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने चक्र से कई टुकड़े कर दिए। जिसके चार प्रमुख टुकड़ों में चौथा भाग पल्हना में गिरा जो मां पाल्हमेश्वरी देवी के नाम से पुजित है। हिंदू धर्म में श्रेष्ठ लोगों के पैर की पूजा होती है।
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मां पाल्हमेश्वरी धाम का वर्णन पद्म पुराण के द्वितीय खंड के सातवें अध्याय की बारहवीं चौपाई में है। रामचरित मानस के बाल कांड में महर्षि विश्वामित्र ने मां की महिमा का वर्णन किया है। इसके अलावा महाराजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ यहीं किया था। महाभारत के वन पर्व में वर्णित है कि जब पांडव पुत्र वन गए थे तो नारद जी ने धर्मराज युधिष्ठिर से इस स्थल के बारे में बताया और वह उनकी प्रेरणा से यहां आए थे। भगवान गौतम बुद्ध की पालि भाषा में लिखित ग्रंथ में वर्णन है कि भगवान बुद्ध अपने शिष्य आनंद के साथ इस स्थान पर आए थे। इतना ही नहीं ग्रंथ भोजप्रबंध के अनुसार राजा भोज ने यहां यज्ञ किया था। पुराणों के अनुसार राजा दक्ष द्वारा यज्ञ में अपनी पुत्री को आमंत्रित न करने पर अपने को अपमानित समझ कर मां सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर जान दे दी थी। तब भगवान शिव माता सती के मृत शरीर को कंधे पर रखकर तीनों लोक में भ्रमण करने लगे थे। जिससे भूचाल आ गया था। अनर्थ की आशंका से भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने चक्र से कई टुकड़े कर दिए। जिसके चार प्रमुख टुकड़ों में चौथा भाग पल्हना में गिरा जो मां पाल्हमेश्वरी देवी के नाम से पुजित है। हिंदू धर्म में श्रेष्ठ लोगों के पैर की पूजा होती है।
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