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घाघरा नजदीक, आशियाना उजाड़ने को मजबूर हुए ग्रामीण
Updated Sat, 15 Jul 2017 12:11 AM IST
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लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा एक बार फिर तबाही मचाने को आतुर है। जलस्तर बढ़ने के साथ तेज कटान की वजह से देवारा खास राजा गांव के मुराली का पुरवा के लोग अपना आशियाना खुद उजाड़ रहे हैं।
जनपद की उत्तरी सीमा को छूकर निकलने वाली घाघरा हर वर्ष अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ जाती है। जब बाढ़ नहीं थी तब भी नदी कटान कर रही थी। जिसके कारण देवाराखास राजा गांव के मुराली का पुरवा के 14 आशियाने कटान के मुहाने पर पहुंच गए। फिलहाल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से कटान भी तेज हो गई है। इससे ग्रामीणों की नींद उड़ गई है और वह अपना आशियाना खुद ही उजाड़ने को मजबूर हो गए हैं। बताते चलें कि इसके पूर्व घाघरा ने 2003 में हाजीपुर गांव के ठिकहिया के 95 घर और 2004 में धुसवां गांव के 85 घर को अपने आगोश में ले लिया था। मात्र एक पखवारे में पूरे गांव को मिटा दिया। 2004 में ही देवारा खास राजा गांव का चक्की गांव घाघरा की चपेट में आया और लगभग 80 घर विलीन हो गए। चक्की गांव में बचे घर आज भी कटान के मुहाने पर हैं। वर्ष 2013-14 में देवारा खास राजा गांव का रमई का पुरवा घाघरा नदी आगोश में समा गया।
ऐसे में वर्तमान में तेजी से हो रही कटान से देवारा खास राजा गांव के ही मुराली का पुरवा गांव के लोग अपने सामान समेट रहे हैं। मुराली के पुरवा में लालधर और उसका परिवार घर का सामान समेटने में जुटा था। उनका कहना है कि ना जाने कब घाघरा का कहर टूट पड़े। मुहाने पर खड़े राधे, तीर्थराज पूजन, परसन, शिवनाथ, लाल बचन, रामवृक्ष, देवकी, गिरीश, प्रकाश, राम कवल, राम दरस भी कटान की जद में आ सकते हैं। ग्राम प्रधान इंद्रावती देवी ने विस्थापित परिवारों के लिए जमीन मुहैया कराने के लिए संबंधित लेखपाल से जमीन सुरक्षित करा ली है ।
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उपजिलाधिकारी सगड़ी रवि रंजन ने बताया कि विस्थापितों के लिए जमीन सुरक्षित कर ली गई है। मुआवजे के लिए संबंधित लेखपाल को कह दिया गया है कि वह रिपोर्ट तैयार कर दें जिससे उन्हें मुआवजा और जमीन मुहैया करा दी जाए।
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जनपद की उत्तरी सीमा को छूकर निकलने वाली घाघरा हर वर्ष अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ जाती है। जब बाढ़ नहीं थी तब भी नदी कटान कर रही थी। जिसके कारण देवाराखास राजा गांव के मुराली का पुरवा के 14 आशियाने कटान के मुहाने पर पहुंच गए। फिलहाल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से कटान भी तेज हो गई है। इससे ग्रामीणों की नींद उड़ गई है और वह अपना आशियाना खुद ही उजाड़ने को मजबूर हो गए हैं। बताते चलें कि इसके पूर्व घाघरा ने 2003 में हाजीपुर गांव के ठिकहिया के 95 घर और 2004 में धुसवां गांव के 85 घर को अपने आगोश में ले लिया था। मात्र एक पखवारे में पूरे गांव को मिटा दिया। 2004 में ही देवारा खास राजा गांव का चक्की गांव घाघरा की चपेट में आया और लगभग 80 घर विलीन हो गए। चक्की गांव में बचे घर आज भी कटान के मुहाने पर हैं। वर्ष 2013-14 में देवारा खास राजा गांव का रमई का पुरवा घाघरा नदी आगोश में समा गया।
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ऐसे में वर्तमान में तेजी से हो रही कटान से देवारा खास राजा गांव के ही मुराली का पुरवा गांव के लोग अपने सामान समेट रहे हैं। मुराली के पुरवा में लालधर और उसका परिवार घर का सामान समेटने में जुटा था। उनका कहना है कि ना जाने कब घाघरा का कहर टूट पड़े। मुहाने पर खड़े राधे, तीर्थराज पूजन, परसन, शिवनाथ, लाल बचन, रामवृक्ष, देवकी, गिरीश, प्रकाश, राम कवल, राम दरस भी कटान की जद में आ सकते हैं। ग्राम प्रधान इंद्रावती देवी ने विस्थापित परिवारों के लिए जमीन मुहैया कराने के लिए संबंधित लेखपाल से जमीन सुरक्षित करा ली है ।
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उपजिलाधिकारी सगड़ी रवि रंजन ने बताया कि विस्थापितों के लिए जमीन सुरक्षित कर ली गई है। मुआवजे के लिए संबंधित लेखपाल को कह दिया गया है कि वह रिपोर्ट तैयार कर दें जिससे उन्हें मुआवजा और जमीन मुहैया करा दी जाए।