एसआईटी की रिपोर्ट में खुलासाः संपूर्णानंद विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री पर आजमगढ़ में 43 लोग बने शिक्षक
फर्जी डिग्रियों का मामला सामने आने पर प्रदेश शासन ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने 2004 से 2014 के बीच प्राथमिक विद्यालयों में चयनित उन शिक्षकों के अभिलेखों का दोबारा सत्यापन कराया, जिन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से उपाधि हासिल की है।
जिले में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री पर शिक्षक की नौकरी करने वाले 125 शिक्षकों का डाटा सत्यापन के लिए भेजा गया था। जिसमें से 43 शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले हैं। माना जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे विश्वविद्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी भी संलिप्त हैं। जांच चल रही है दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। उक्त शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
सत्यापन के लिए भेजा गया था डाटा
पहले भी मिल चुके हैं कई फर्जी शिक्षक
आजमगढ़। संपूर्णानंद संस्कृत विवि के फर्जी अभिलेख के आधार पर नौकरी पाने के मामले पहले भी जिले में कई बार सामने आ चुके हैं। दो साल पहले 14 शिक्षकों को ऐसे ही प्रकरण में बर्खास्त किया गया था। इसमें ठेकमा में कई ऐसे मामले सामने आए थे। अब 43 और शिक्षकों को चिह्नित किया गया है।
जिले में जितने भी शिक्षक तैनात हैं सभी का अभिलेख सत्यापन कराने के लिए संबंधित कालेजों और विश्वविद्यालयों में भेजा गया है। जिसमें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री पर नौकरी करने वाले शिक्षकों का भी डाटा शामिल था। उनमें भी कई शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले हैं। हालांकि अभी सूची उपलब्ध नहीं हो सकी है। फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले सभी शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही आहरित की गई धनराशि की रिकवरी होगी।
अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।