आजमगढ़। नगर से सटे खोजापुर घाट पर चल रहे नौ दिवसीय रद्र महायज्ञ के पाचवें दिन श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। रुद्र महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन कर यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर भगवान भोलेनाथ से आशीष मांगा। कथा वाचक बाल व्यास पंडित गोविन्द शास्त्री ने राम चरित्र का वर्णन किया। कहाकि यज्ञ से पूरे विश्व का कल्याण होता है। यज्ञ की आहुति से बादल बनता है, जिससे पर्यावरण शुद्ध होता है। भगवान शिव देवाधिदेव है, सब देवताओं में भोले ही महादेव है। भगवान शिवभक्तों को अमृत देकर खुद विषपान करते है। बैल, बाघ, सर्प, चूहा, नेवला, सबको मिला देते है वहीं महादेव है। शिव जी, विश्वनाथ ममनाथ पुरारी, त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी। भगवान रुद्र ही इस सृष्टि के सृजन, पालन और संहारकर्ता हैं। शम्भु, शिव, ईश्वर और महेश्वर आदि कई नाम उन्हीं के हैं। श्रुतिका कथन है कि एक ही रुद्र हैं जो सभी लोकों को अपनी शक्ति से संचालित करते हैं। अतएव वे ही ईश्वर हैं, वे ही सबके भीतर अंर्तयामीरूप से स्थित हैं। आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक रूप से उनके ग्यारह नाम श्रुति, पुराण आदि में प्राप्त होते हैं। यज्ञ प्रबंधक चंदन निषाद प्रधान,नीरज शर्मा, शिवगोविन्द उपाध्याय, चन्द्रशेखर, सौरभ उपाध्याय, गोपाल, विनोद साहनी सहित भारी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद रहे।