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अजमतगढ़ में दूसरे दिन भी पसरा रहा सन्नाटा
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:59 PM IST
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सगड़ी। जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के अजमतगढ़ बाजार में शनिवार को जहरीली शराब पीने से अस्पताल में भर्ती बद्री राजभर की इलाज के दौरान देर रात मौत हो गई। दो दिनों के भीतर बद्री समेत कस्बे के कुल छह लोगों की मौत हो जाने से लोग सहम गए हैं। बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। बाजार का आलम यह रहा कि जैसे-जैसे पोस्टमार्टम के बाद लोगों की लाश घर पहुंच रही थी। लोग दहाड़े मारकर रो रहे थे। इससे माहौल गमगीन हो गया है। जहरीली शराब पीने से कब्जे के छह लोग बीमार थे। जिनमें पांच लोगों की शनिवार को मौत हो चुकी थी। बद्री का वाराणसी में इलाज चल रहा था। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
नगर पंचायत अजमतगढ़ के गौरीशंकर नगर मुहल्ला निवासी बद्री राजभर (55) घर पर रहकर मजदूरी करता था। वह दो बेटियों का पिता था। दोनों बेटी की शादी हो चुकी है। जबकि उसकी पत्नी पहले ही मर चुकी है। वहीं राजीव नगर मुहल्ला निवासी विनोद शर्मा (42) पांच भाई और तीन बहनों में चौथे नंबर पर था। वह इकलौती बेटी का पिता था।
सैलून खोलकर अपने परिवार की जीविका चलाता था। विनोद की मौत के बाद पत्नी और बेटी का हाल बेहाल है। इसीक्रम में मोती धरिकार (50) दो बच्चों का पिता था। मेहनत मजदूरी कर परिवार का पेट भर रहा था। जबकि गौरीशंकर नगर मुहल्ला निवासी फूलचंद सैनी (62) दो लड़की और दो लड़कों का पिता था। उसका बेटा ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। पिता फूलचंद की मौत के बाद बच्चों का हाल बेहाल है। ऐसा ही हाल रवि साहनी (22) और रामनयन गोंड़ के घर का भी रहा। परिवार के लोगों का जहां रो-रोकर हाल बेहाल रहा। वहीं पास-पड़ोस के लोग शव आने का इंतजार कर रहे थे।
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नगर पंचायत अजमतगढ़ के गौरीशंकर नगर मुहल्ला निवासी बद्री राजभर (55) घर पर रहकर मजदूरी करता था। वह दो बेटियों का पिता था। दोनों बेटी की शादी हो चुकी है। जबकि उसकी पत्नी पहले ही मर चुकी है। वहीं राजीव नगर मुहल्ला निवासी विनोद शर्मा (42) पांच भाई और तीन बहनों में चौथे नंबर पर था। वह इकलौती बेटी का पिता था।
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सैलून खोलकर अपने परिवार की जीविका चलाता था। विनोद की मौत के बाद पत्नी और बेटी का हाल बेहाल है। इसीक्रम में मोती धरिकार (50) दो बच्चों का पिता था। मेहनत मजदूरी कर परिवार का पेट भर रहा था। जबकि गौरीशंकर नगर मुहल्ला निवासी फूलचंद सैनी (62) दो लड़की और दो लड़कों का पिता था। उसका बेटा ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। पिता फूलचंद की मौत के बाद बच्चों का हाल बेहाल है। ऐसा ही हाल रवि साहनी (22) और रामनयन गोंड़ के घर का भी रहा। परिवार के लोगों का जहां रो-रोकर हाल बेहाल रहा। वहीं पास-पड़ोस के लोग शव आने का इंतजार कर रहे थे।
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