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आवास मिलने के बाद भी बेघर हुए 22 परिवार
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आजमगढ़। सगड़ी तहसील के हरैया विकास खंड के देवारा क्षेत्र में इस साल आई घाघरा की बाढ़ ने 22 लोगों के इंदिरा आवास को अपने आगोश ले लिया है। इसके कारण यह लोग घर से बेघर हो गए हैं। अब तक इन लोगों कोप्रधानमंत्री आवास मिल भी नहीं सका है। हालांकि आपदा राहत के नाम पर इन्हें 94 हजार रुपये जरूर मिलेंगे लेकिन महंगाई के इस दौर में वह अपना आशियाना कैसे बनाएंगे, इसकी चिंता उन्हें खाए जा रही है।
सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी प्रतिवर्ष देवारा वासियों को गहरा जख्म देकर जाती है। जिससे उबरने में उन्हें कई वर्ष लग जाते हैं। जब तक घाघरा द्वारा दिया गया जख्म भरता है तब तक वह एक फिर उन्हें जख्म देने आ जाती है। इस बार भी देवारा लोग दो महीने तक घाघरा की बाढ़ से जूझते रहे। जब बाढ़ हटी और नदी घटने लगी तो उसने कटान करना शुरू कर दिया। इन कटान ने कई परिवारों के सिर से उनकी छत छीन ली। आज यह परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को विवश हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें आज तक प्रशासन की ओर से जमीन भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। वहीं बहुत से लोगों को जमीन होने पर छत बनाने के लिए इंदिरा आवास का आवंटन किया गया। ऐसे 22 लोगों ने अपने सिर पर छत की व्यवस्था की और परिवार के साथ हंसी खुशी जीवन बिताने लगे। लेकिन घाघरा से इन परिवारों की खुशी देखी नहीं गई। इस बार आई बाढ़ के दौरान नदी ने कटान कर इनके घरों को अपने आगोश में ले लिया। अब यह 22 परिवारों के लोग खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। अब इन्हें किसी आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध नहीं हो सकता है।
आपदा पीड़ित में मिलेंगे 94 हजार रुपये
आजमगढ़। इंदिरा आवास का लाभ पाने वाले परिवारों को अब दोबारा किसी आवास योजना का लाभ नहीं मिल सकता है। लेकिन इन लोगों आपदा में घर कटने के कारण 94 हजार रुपये की सहायता जरूर मिलेगी। इनमें से बहुत से लोगों के पास जमीन भी नहीं है। अब इन लोगों को प्रशासन से मिलने वाली जमीन और सहायता राशि की आस बची है।
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इस बार आई बाढ़ के बाद नदी द्वारा की गई कटान में हरैया ब्लाक के 22 लोगों के इंदिरा आवास घाघरा में विलीन हो गए। इन लोगों को अब किसी आवास योजना का लाभ नहीं मिल सकता है। लेकिन इनको आपदा राहत के तहत 94 हजार रुपये मिलेंगे। - अभिमन्यु कुमार सिंह, परियोजना निदेशक।
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सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी प्रतिवर्ष देवारा वासियों को गहरा जख्म देकर जाती है। जिससे उबरने में उन्हें कई वर्ष लग जाते हैं। जब तक घाघरा द्वारा दिया गया जख्म भरता है तब तक वह एक फिर उन्हें जख्म देने आ जाती है। इस बार भी देवारा लोग दो महीने तक घाघरा की बाढ़ से जूझते रहे। जब बाढ़ हटी और नदी घटने लगी तो उसने कटान करना शुरू कर दिया। इन कटान ने कई परिवारों के सिर से उनकी छत छीन ली। आज यह परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को विवश हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें आज तक प्रशासन की ओर से जमीन भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। वहीं बहुत से लोगों को जमीन होने पर छत बनाने के लिए इंदिरा आवास का आवंटन किया गया। ऐसे 22 लोगों ने अपने सिर पर छत की व्यवस्था की और परिवार के साथ हंसी खुशी जीवन बिताने लगे। लेकिन घाघरा से इन परिवारों की खुशी देखी नहीं गई। इस बार आई बाढ़ के दौरान नदी ने कटान कर इनके घरों को अपने आगोश में ले लिया। अब यह 22 परिवारों के लोग खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। अब इन्हें किसी आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध नहीं हो सकता है।
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आपदा पीड़ित में मिलेंगे 94 हजार रुपये
आजमगढ़। इंदिरा आवास का लाभ पाने वाले परिवारों को अब दोबारा किसी आवास योजना का लाभ नहीं मिल सकता है। लेकिन इन लोगों आपदा में घर कटने के कारण 94 हजार रुपये की सहायता जरूर मिलेगी। इनमें से बहुत से लोगों के पास जमीन भी नहीं है। अब इन लोगों को प्रशासन से मिलने वाली जमीन और सहायता राशि की आस बची है।
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इस बार आई बाढ़ के बाद नदी द्वारा की गई कटान में हरैया ब्लाक के 22 लोगों के इंदिरा आवास घाघरा में विलीन हो गए। इन लोगों को अब किसी आवास योजना का लाभ नहीं मिल सकता है। लेकिन इनको आपदा राहत के तहत 94 हजार रुपये मिलेंगे। - अभिमन्यु कुमार सिंह, परियोजना निदेशक।