{"_id":"5c66fd56bdec2273ac45ecce","slug":"21550253398-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभिलेख खंगालने में जुटा प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभिलेख खंगालने में जुटा प्रशासन
विज्ञापन
आजमगढ़। बूढ़नपुर तहसील के नरफोरा गांव में नवीन परती की भूमि पर दर्ज नाम को हटाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने उक्त मामले में मंडलायुक्त को प्रशासनिक स्तर पर जांच का आदेश दिया है। इस आदेश पर अभिलेखों की जांच में जुटे जिला प्रशासन के सामने कई साक्ष्य ऐसे मिले हैं जिससे यह स्पष्ट होता है उक्त भूमि पर फर्जी तरीके से अपना नाम दर्ज कराया गया है।
बूढनपुर तहसील के नरफोरा निवासी दर्शन पुत्र ब्रह्मा ने 1972 में एसडीएम के आदेश से 962 कड़ी नवीन परती की भूमि पर अपना नाम दर्ज करा लिया। बाद में अजय कुमार सिंह की शिकायत पर राज्य सरकार ने निगरानी दाखिल की। निगरानी नवीन परती की भूमि से दर्शन का नाम खारिज कर दिया गया। नाम खारिज होने के बाद उन्होंने मंडलायुक्त न्यायालय में अपील की। सुनवाई के बाद साक्ष्यों के आधार पर मंडलायुक्त ने उनका नाम नवीन परती की भूमि से दर्शन पुत्र ब्रह्मा का नाम खारिज कर उसे ग्राम सभा के नवीन खाते में दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद जमीन पर काबिज जिसके खिलाफ यह कमिश्नर न्यायालय पहुंचे। उन्होंने ने भी एसडीएम के आदेश को खारिज कर उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया। दर्शन के मरने के बाद उसके पुत्र ने मामले को हाईकोर्ट में दाखिल कर दिया। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मंडलायुक्त को प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच कराने का आदेश दिया है। इसकी जांच कर प्रशासन को 19 फरवरी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इसके लिए जिला प्रशासन अभिलेखों की तलाश में जुटा हुआ है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने बताया कि जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे यह प्रतीत होता है कि कूट रचना के जरिए नमम को दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं अभिलेख से दो पेज भी गायब हैं।
विज्ञापन
बूढनपुर तहसील के नरफोरा निवासी दर्शन पुत्र ब्रह्मा ने 1972 में एसडीएम के आदेश से 962 कड़ी नवीन परती की भूमि पर अपना नाम दर्ज करा लिया। बाद में अजय कुमार सिंह की शिकायत पर राज्य सरकार ने निगरानी दाखिल की। निगरानी नवीन परती की भूमि से दर्शन का नाम खारिज कर दिया गया। नाम खारिज होने के बाद उन्होंने मंडलायुक्त न्यायालय में अपील की। सुनवाई के बाद साक्ष्यों के आधार पर मंडलायुक्त ने उनका नाम नवीन परती की भूमि से दर्शन पुत्र ब्रह्मा का नाम खारिज कर उसे ग्राम सभा के नवीन खाते में दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद जमीन पर काबिज जिसके खिलाफ यह कमिश्नर न्यायालय पहुंचे। उन्होंने ने भी एसडीएम के आदेश को खारिज कर उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया। दर्शन के मरने के बाद उसके पुत्र ने मामले को हाईकोर्ट में दाखिल कर दिया। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मंडलायुक्त को प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच कराने का आदेश दिया है। इसकी जांच कर प्रशासन को 19 फरवरी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इसके लिए जिला प्रशासन अभिलेखों की तलाश में जुटा हुआ है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने बताया कि जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिससे यह प्रतीत होता है कि कूट रचना के जरिए नमम को दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं अभिलेख से दो पेज भी गायब हैं।
विज्ञापन