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जातिसूचक शब्दों को लेकर पूर्व डीपीआरओ के खिलाफ शुरू हुई जांच
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:29 AM IST
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विभागीय कार्यों में शिथिलता और इंटरव्यू के नंबर में छेड़छाड़ के आरोप में निलंबित चल रहे पूर्व डीपीआरओ जितेंद्र नाथ मिश्र की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सफाईकर्मी को जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित करने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मामले में डीपीआरओ से जवाब तलब किया गया है।
जनपद के पूर्व जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र नाथ मिश्र विभागीय कार्यों में लापरवाही आदि मामलों में निलंबित चल रहे हैं। इनकी मुश्किलों में और इजाफा हो गया है। जनपद के ठेकमा ब्लाक के गांव रतुआपार में तैनात सफाईकर्मी अरविंद ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में शिकायत की थी कि तत्कालीन डीपीआरओ जितेंद्र नाथ मिश्र ने उन्हें और उनकी बहन अर्चना को कार्यालय में जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया था। अरविंद ने बताया कि एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें निलंबित किया गया था। बहाली के लिए वो प्रयाररत थे। इस दौरान उन्हें अपमानित किया गया था। सितंबर 2017 में उन्हें बहाल किया गया, लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिला है। ये भी आरोप लगाया था कि निलंबन के दौरान उन्हें गुजारा भत्ता भी नहीं दिया गया। अपमान की शिकायत उन्होंने राष्टव्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में की थी। आयोग ने मामले की जांच शुरू करते हुए प्रकरण में डीपीआरओ से जवाब तलब किया है। इससे पूर्व डीपीआरओ की मुश्किल और बढञती नजर आ रही है।
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जनपद के पूर्व जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र नाथ मिश्र विभागीय कार्यों में लापरवाही आदि मामलों में निलंबित चल रहे हैं। इनकी मुश्किलों में और इजाफा हो गया है। जनपद के ठेकमा ब्लाक के गांव रतुआपार में तैनात सफाईकर्मी अरविंद ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में शिकायत की थी कि तत्कालीन डीपीआरओ जितेंद्र नाथ मिश्र ने उन्हें और उनकी बहन अर्चना को कार्यालय में जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया था। अरविंद ने बताया कि एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें निलंबित किया गया था। बहाली के लिए वो प्रयाररत थे। इस दौरान उन्हें अपमानित किया गया था। सितंबर 2017 में उन्हें बहाल किया गया, लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिला है। ये भी आरोप लगाया था कि निलंबन के दौरान उन्हें गुजारा भत्ता भी नहीं दिया गया। अपमान की शिकायत उन्होंने राष्टव्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में की थी। आयोग ने मामले की जांच शुरू करते हुए प्रकरण में डीपीआरओ से जवाब तलब किया है। इससे पूर्व डीपीआरओ की मुश्किल और बढञती नजर आ रही है।
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