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तमसा को लेकर शासन और प्रशासन भी उदासीन
Updated Sun, 27 May 2018 12:48 AM IST
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आजमगढ़। तमसा को लेकर शासन और प्रशासन की उदासीनता भी इसकी हालत के लिए कम जिम्मेदार नहीं है। लोगों ने थोड़े से फायदे के लिए तमसा के किनारे तक मकान का निर्माण करा लिया है। जिन्हें रोकने में जिला प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाई लेकिन शासन और प्रशासन से कोई सहयोग न मिलने के कारण उन्होंने अपने हाथ खींच लिए। आज कोई भी तमसा को लेकर आवाज बुलंद नहीं कर रहा है। नहीं तो एक समय था जब एक साथ कई संगठन अपनी आवाज बुलंद करते थे।
नगर की जीवनदायिनी कही जाने वाली तमसा आज नाले के रूप में अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। इसके लिए शासन प्रशासन से लेकर आम जनमानस जिम्मेदार है। थोड़े से फायदे के लिए लोगों ने इसके किनारे तक किसानों से जमीन खरीदकर बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें खड़ी कर ली। शासन की ओर से भी नदी की सफाई आदि के लिए कभी बजट नहीं दिया गया। नगरपालिका भी नगर से निकलने वाले हजारों टन कूड़े को इसके किनारे गिराकर उसे अवरुद्ध करती चली गई। जनपद के सामाजिक संगठन तमसा बचाओ आंदोलन, भारत रक्षा दल, आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति, जागो युवा संस्थान ने इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रशासनिक अधिकारियों और उनके माध्यम से शासन को पत्र भेजे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके कारण इन संगठनों ने भी आवाज उठानी बंद कर दी। आज नदी को लेकर किसी भी संगठन द्वारा कोई आंदोलन नहीं चलाया जा रहा है।
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नगर की जीवनदायिनी कही जाने वाली तमसा आज नाले के रूप में अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। इसके लिए शासन प्रशासन से लेकर आम जनमानस जिम्मेदार है। थोड़े से फायदे के लिए लोगों ने इसके किनारे तक किसानों से जमीन खरीदकर बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें खड़ी कर ली। शासन की ओर से भी नदी की सफाई आदि के लिए कभी बजट नहीं दिया गया। नगरपालिका भी नगर से निकलने वाले हजारों टन कूड़े को इसके किनारे गिराकर उसे अवरुद्ध करती चली गई। जनपद के सामाजिक संगठन तमसा बचाओ आंदोलन, भारत रक्षा दल, आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति, जागो युवा संस्थान ने इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रशासनिक अधिकारियों और उनके माध्यम से शासन को पत्र भेजे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके कारण इन संगठनों ने भी आवाज उठानी बंद कर दी। आज नदी को लेकर किसी भी संगठन द्वारा कोई आंदोलन नहीं चलाया जा रहा है।
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