{"_id":"59c6ae9e4f1c1b21688b6366","slug":"21506193054-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोहर्रम के जुलूस में जार-जार रोए अजादार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोहर्रम के जुलूस में जार-जार रोए अजादार
Updated Sun, 24 Sep 2017 12:31 AM IST
विज्ञापन
सरायमीर। नगर पंचायत सरायमीर में दो मोहर्रम को मुहल्ला सिरजी का पूरा स्थित इमाबाड़ा से शनिवार की प्रात: आठ बजे से जुलूस निकला गया ।
जुलूस से पहले मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना शारिब अब्बास ने कहा इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों का जो बलिदान दिया था। वह किसी एक जाति या धर्म के लिए नही है। बल्कि पूरे मानव जाति के लिए था। यही वजह है कि मुहर्रम का चाँद निकलते ही पूरे विश्व में सभी जाती व धर्म के लोग अपने अपने तरीके से शहीदाने कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मौलाना सय्यद जिशान अली निजामबादी ने हजरत मोहम्मद साहब के घराने पर होने वाला अत्याचार बयान किया तो जुलूस में मौजूद पुरुषों, महिलाओं की आंखों में आंसू आ गए। जुलूस में आई बाहरी अंजुमनों ने और प्रसिद्ध नोहाखांन आमिर फैजाबादी ने नौहाख्वानी करके पूरे माहौल को गमगीन बना दिया। अंत में शिया कमेटी सरायमीर के अध्यक्ष सय्यद कायम रजा व प्रवक्ता सय्यद मोहम्मद हुसैन ने सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। इस के अलावा क्षेत्र के रसूलपुर बरवाए, बिजहर, एकोरौली खुर्द, खपड़ा गांव, निकामुद्दीनपुर आदि गांवों में भी मजलिस का आयोजन किया गया। आयोजित की गयी।
मेजवां। फूलपुर और ग्रामीण इलाकों में शुक्रवार की रात पहली मोहर्रम के मद्ेनजर कई इमामबाडों में मजलिसों का आयोजन किया गया। जिसमें मौलाना ने कर्बला का वाकया पेश किया।
दसमड़ा गांव स्थित शहेनशाह हुसैनी इमाम बारगाह में जलालपुर अम्बेडकरनगर की अंजुमन सज्जादिया ने तारीखी नौहा पेश किया। नौहा मातम का सिलसिला देर रात तक चला। फूलपुर शिया आबादी के इमामबाड़ा में मोहम्मद शाहिद साहब ने मजलिस को खिताब किया। कर्बला का मसायब सुन अजादार रो पड़े। चमांवा गांव में मौलाना सैयद इरफान हैदर साहब ने मजलिस को खिताब किया। मेजवां गांव स्थित अंजुमन अब्बासिया के बच्चों ने नौहा पेश किया। जो बहुत ही गम भरा था। इस क्रम में शाहजेरपुर, अंबारी, माहुल, खपडा गांव, बिजहर, मुरादाबाद, कुशलगांव, शाहरजा, रकबा, कनिया बहाउद्ीनपुर, कंदरी आदि स्थानो पर मजलिस आयोजित की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
जुलूस से पहले मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना शारिब अब्बास ने कहा इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों का जो बलिदान दिया था। वह किसी एक जाति या धर्म के लिए नही है। बल्कि पूरे मानव जाति के लिए था। यही वजह है कि मुहर्रम का चाँद निकलते ही पूरे विश्व में सभी जाती व धर्म के लोग अपने अपने तरीके से शहीदाने कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मौलाना सय्यद जिशान अली निजामबादी ने हजरत मोहम्मद साहब के घराने पर होने वाला अत्याचार बयान किया तो जुलूस में मौजूद पुरुषों, महिलाओं की आंखों में आंसू आ गए। जुलूस में आई बाहरी अंजुमनों ने और प्रसिद्ध नोहाखांन आमिर फैजाबादी ने नौहाख्वानी करके पूरे माहौल को गमगीन बना दिया। अंत में शिया कमेटी सरायमीर के अध्यक्ष सय्यद कायम रजा व प्रवक्ता सय्यद मोहम्मद हुसैन ने सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। इस के अलावा क्षेत्र के रसूलपुर बरवाए, बिजहर, एकोरौली खुर्द, खपड़ा गांव, निकामुद्दीनपुर आदि गांवों में भी मजलिस का आयोजन किया गया। आयोजित की गयी।
मेजवां। फूलपुर और ग्रामीण इलाकों में शुक्रवार की रात पहली मोहर्रम के मद्ेनजर कई इमामबाडों में मजलिसों का आयोजन किया गया। जिसमें मौलाना ने कर्बला का वाकया पेश किया।
विज्ञापन
दसमड़ा गांव स्थित शहेनशाह हुसैनी इमाम बारगाह में जलालपुर अम्बेडकरनगर की अंजुमन सज्जादिया ने तारीखी नौहा पेश किया। नौहा मातम का सिलसिला देर रात तक चला। फूलपुर शिया आबादी के इमामबाड़ा में मोहम्मद शाहिद साहब ने मजलिस को खिताब किया। कर्बला का मसायब सुन अजादार रो पड़े। चमांवा गांव में मौलाना सैयद इरफान हैदर साहब ने मजलिस को खिताब किया। मेजवां गांव स्थित अंजुमन अब्बासिया के बच्चों ने नौहा पेश किया। जो बहुत ही गम भरा था। इस क्रम में शाहजेरपुर, अंबारी, माहुल, खपडा गांव, बिजहर, मुरादाबाद, कुशलगांव, शाहरजा, रकबा, कनिया बहाउद्ीनपुर, कंदरी आदि स्थानो पर मजलिस आयोजित की गई।
विज्ञापन