{"_id":"5c699cb4bdec2226154d1997","slug":"201550425268-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुल्क का हर एक मुसलमान जवानों के साथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुल्क का हर एक मुसलमान जवानों के साथ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरायमीर। राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल की रविवार को खरेवां मोड़ पर हुई जनसभा में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महासचिव मौलाना ताहिर मदनी ने जवानों पर हमला देश पर हमला है। इसका सामना हम 130 करोड़ भारतीयाें को एकजुट होकर करना होगा। उन्होंने कहा कि मुल्क का हर एक मुसलमान अपने जवानों के साथ खड़ा है। इस दौरान पुलवामा में हुई दर्दनाक घटना के मद्देनजर स्वागत कार्यक्रम को रद्द कर यहां जवानों को खिराजे अकीदत पेश की गई।
राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने मोबाइल से जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश को तोड़ने और नफरत फैलाने के मकसद से ही दुश्मनों ने ये हमला किया है। हमें मिलकर इसका बदला लेना है। ऐसे राष्ट्रीय शोक के माहौल में भी कुछ लोग सांप्रदायिकता और नफरत की सियासत को हवा दे रहे हैं। जबकि कमांडर नसीर अहमद, सुखविंदर सिंह, रतन कुमार ठाकुर, जीतराम जैसे 40 से अधिक जवानों ने मजहब से ऊपर उठकर अपनी कुर्बानी दी। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आई सरकार जुमलेबाजी तक सीमित है। किसान कर्ज से, नौजवान बेरोजगारी से, व्यापारी जीएसटी व नोटबंदी से और आम जनता महंगाई से पीड़ित है। विपक्ष के नाम पर कोई आवाज उठाने वाला नहीं रहा। कांग्रेस नतमस्तक रही तो प्रदेश में सपा-बसपा खामोश तमाशाई बने रहे। महागठबंधन ठगबंधन है। 1.5 फीसदी वोट वाले राष्ट्रीय लोकदल के लिए दो सीट छोड़ दी गई, 20 फीसदी वोट वाले मुस्लिम नेतृत्व के दलों के लिए कोई सीट क्यों नहीं? ओलमा कौंसिल के नेतृत्व में आने राजनैतिक वजूद को मजबूत करें। प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह, अख्तर, तलहा राशिद, मुफ्ती गुफरान अहमद, हाजी शकील अहमद, शाह जमा, नरूल हुदा, मौलाना अंसार, कमाल नासिर, आरिफ रशादी, मोहम्मद खालिद, परवेज अहमद, जमाल नासिर, अदनान, सैफुल्लाह, तारिक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने मोबाइल से जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश को तोड़ने और नफरत फैलाने के मकसद से ही दुश्मनों ने ये हमला किया है। हमें मिलकर इसका बदला लेना है। ऐसे राष्ट्रीय शोक के माहौल में भी कुछ लोग सांप्रदायिकता और नफरत की सियासत को हवा दे रहे हैं। जबकि कमांडर नसीर अहमद, सुखविंदर सिंह, रतन कुमार ठाकुर, जीतराम जैसे 40 से अधिक जवानों ने मजहब से ऊपर उठकर अपनी कुर्बानी दी। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आई सरकार जुमलेबाजी तक सीमित है। किसान कर्ज से, नौजवान बेरोजगारी से, व्यापारी जीएसटी व नोटबंदी से और आम जनता महंगाई से पीड़ित है। विपक्ष के नाम पर कोई आवाज उठाने वाला नहीं रहा। कांग्रेस नतमस्तक रही तो प्रदेश में सपा-बसपा खामोश तमाशाई बने रहे। महागठबंधन ठगबंधन है। 1.5 फीसदी वोट वाले राष्ट्रीय लोकदल के लिए दो सीट छोड़ दी गई, 20 फीसदी वोट वाले मुस्लिम नेतृत्व के दलों के लिए कोई सीट क्यों नहीं? ओलमा कौंसिल के नेतृत्व में आने राजनैतिक वजूद को मजबूत करें। प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह, अख्तर, तलहा राशिद, मुफ्ती गुफरान अहमद, हाजी शकील अहमद, शाह जमा, नरूल हुदा, मौलाना अंसार, कमाल नासिर, आरिफ रशादी, मोहम्मद खालिद, परवेज अहमद, जमाल नासिर, अदनान, सैफुल्लाह, तारिक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन