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थाम लो अल्लाह की रस्सी को मेरे उम्मती...
Updated Sun, 25 Nov 2018 11:56 PM IST
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लालगंज। पूर्व प्रधान मिर्जा हकीम मकबूल बेग की स्मृति में शनिवार की रात बैरीडीह स्थित एक विद्यालय परिसर में मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें जनपद के साथ ही गैर जनपदों से आए शायरों ने अपनी रचना से लोगों का मनोरंजन किया। मुशायरे का शुभारंभ समाज सेवी आरिफ नसीम ने दीप प्रज्वलित कर किया। अध्यक्षता मास्टर अलीम और संचालन आरिफ सिद्दीकी ने किया। आगरा से आए अमान अकबराबादी ने %समां का दिल देखकर जब मचलने लगा, आसमां अपनी गर्दिश बदलने लगा। एक मासूम की एडिय़ों के सबब, रेत से आबे जमजम निकलने लगा% सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। नसीम साज ने नात पाक पढ़ी %कुफ्रो बिदअत के अंधेरे जब जहां में छा गए, रोशनी हाथों की ताकत तब नबी दिखा गए, आपके जितने सहाबा महकते फूल थे, गुलशने इंसानियत को सब के सब महका गए। थाम लो अल्लाह की रस्सी को मेरे उम्मती, जाते-जाते यह शहे बतहा हमें बतला गए%। बैरीडीह के उभरते शायर मु. आमिर ने परदेशियों पर आधारित शेर %ऐ मेरी जान मेरी तमन्ना, अब तेरी याद आने लगी है। मैं तड़पता हूं परदेश में अब, जिस्म से जान जाने लगी है% सुनाया। मऊ से आए शायर इम्तियाज साकिब ने %क्या दोहराएं दर्द भरे अफसाने हम%। इनके अलावा रुबीना अयाज, चांदनी शबनम, अल्ताफ जिया, हसन काजमी, हाशिम फिरोजाबादी, मैकश आजमी, शाह खालिद, सुहेल उस्मानी, अचानक मऊवी, इम्तियाज साकिब, मनमोहन मिश्रा, रूबिया अयाज, जमशेद कमर ने भी अपने कलाम पेश किए। इस मौके पर प्रबंधक रईस अहमद चुन्नू और जनरल सेक्रेटरी अशरफ बेग, मुख्य अतिथि तनवीर अली, प्रमुख अतिथि शेख सलाहुद्दीन, मोहम्मद कासिम, नूर आलम प्रधान, एहतेशाम सम्मू, डा. अली अख्तर, अशहद शेख, सादिक गुड्डू, मिर्जा असलम आदि उपस्थित थे।
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