{"_id":"59f37bc84f1c1bdb538b97dc","slug":"201509129160-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुआ से पहले अल्लाह की करें तारीफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुआ से पहले अल्लाह की करें तारीफ
Updated Sat, 28 Oct 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरायमीर। मदरसा बैतूल उलूम सरायमीर के 78वें वार्षिक दीनी जलसे का समापन शुक्रवार को हुआ। जलसे की शुरुआत कारी सईदुर्रहमान की तिलावत और मोहम्मद मजहर बांदा के नातपाक से हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हजऱत मौलाना हबीबुर्रहमान ने कहा कि इंसान को चाहिए कि दुआ से पहले अल्लाह की तारीफ करे। तकवा शरीयत पर अमल करने का नाम है, इस लिए अल्लाह की सुन्नत को मजबूती से पकड़े रहें। मदरसा के नाजिम मौलाना शाह मुफ़्ती मोहम्मद अहमदुल्लाह फूलपुरी ने कहा कि मदरसा बैतूल ओलूम सन् 1930 में स्थापित हुआ। उस वक्त से लेकर आजतक लगातार इल्मदीन की ख़िदमत करता चला आ रहा है। मदरसा कायम करने का मकसद शरई तालीम देना, दीन और ईमान की हिफाजत करना है। मौलाना अब्दुल अली फ़ारूक़ी लखनऊ ने कहा इस मुल्क में जलसा जामिया फारुकिया लखनऊ में 99 साल से एवं दूसरे नम्बर पर मदरसा बैतूल ओलूम है, जो 78 साल से लगातार जलसा करता चला आ रहा है। मौलाना इरफान अहमद ने कहा दीन इस्लाम का पसंदीदा दीन है। इस पर अमल करने वाले को मुसलमान कहा जाता है। हजऱत मौलाना शाह मोहम्मद अब्दुल्लाह फूलपुरी ने कहा कि मरीज को फायदा देने वाली जात अल्लाह की है। अल्लाह ने सिर को झुकाने और सजदा के लिए दिया है। घमंड के लिए नहीं। जलसा में आसपास के इलाके के मदारिस के प्रतिनिधि ओलमा-ए-कराम के साथ ही मुम्बई, हैदराबाद, बंगलौर, दिल्ली, आसाम, कोलकाता, सुल्तानपुर, अफजलगढ़, बिजनौर, नगीना कांठ, मुरादाबाद, टांडा, रामपुर, लखनऊ, आगरा, फिऱोजाबाद, बाराबंकी फैजाबाद, गोरखपुर, बिसाती, मऊ, बलिया, सीवान, चंपारण, नेपाल आदि देश विदेश से हजारों लोग सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का समापन अबू तालिब रहमानी की दुआ से हुआ।संचालन मौलाना महबूब आलम क़ासमी ने किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हजऱत मौलाना हबीबुर्रहमान ने कहा कि इंसान को चाहिए कि दुआ से पहले अल्लाह की तारीफ करे। तकवा शरीयत पर अमल करने का नाम है, इस लिए अल्लाह की सुन्नत को मजबूती से पकड़े रहें। मदरसा के नाजिम मौलाना शाह मुफ़्ती मोहम्मद अहमदुल्लाह फूलपुरी ने कहा कि मदरसा बैतूल ओलूम सन् 1930 में स्थापित हुआ। उस वक्त से लेकर आजतक लगातार इल्मदीन की ख़िदमत करता चला आ रहा है। मदरसा कायम करने का मकसद शरई तालीम देना, दीन और ईमान की हिफाजत करना है। मौलाना अब्दुल अली फ़ारूक़ी लखनऊ ने कहा इस मुल्क में जलसा जामिया फारुकिया लखनऊ में 99 साल से एवं दूसरे नम्बर पर मदरसा बैतूल ओलूम है, जो 78 साल से लगातार जलसा करता चला आ रहा है। मौलाना इरफान अहमद ने कहा दीन इस्लाम का पसंदीदा दीन है। इस पर अमल करने वाले को मुसलमान कहा जाता है। हजऱत मौलाना शाह मोहम्मद अब्दुल्लाह फूलपुरी ने कहा कि मरीज को फायदा देने वाली जात अल्लाह की है। अल्लाह ने सिर को झुकाने और सजदा के लिए दिया है। घमंड के लिए नहीं। जलसा में आसपास के इलाके के मदारिस के प्रतिनिधि ओलमा-ए-कराम के साथ ही मुम्बई, हैदराबाद, बंगलौर, दिल्ली, आसाम, कोलकाता, सुल्तानपुर, अफजलगढ़, बिजनौर, नगीना कांठ, मुरादाबाद, टांडा, रामपुर, लखनऊ, आगरा, फिऱोजाबाद, बाराबंकी फैजाबाद, गोरखपुर, बिसाती, मऊ, बलिया, सीवान, चंपारण, नेपाल आदि देश विदेश से हजारों लोग सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का समापन अबू तालिब रहमानी की दुआ से हुआ।संचालन मौलाना महबूब आलम क़ासमी ने किया।
विज्ञापन