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ऐसे तो दूर की कौड़ी है कुपोषण मुक्त भारत का सपना
Updated Sun, 27 May 2018 11:28 PM IST
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आजमगढ़। कुपोषण दूर करने के लिए अधिकारियों द्वारा गांवों को गोद लिए जाने के बावजूद अभी तक 64 गांवों के बच्चों को सुपोषित नहीं किया जा सका है। अधिकारियों द्वारा 82 गांवों को गोद लिए जाने के बावजूद अब तक सिर्फ 18 गांवों को ही कुपोषण से मुक्ति मिली है। अधिकारियों द्वारा इसका मुख्य कारण गांवों का ओडीएफ न होना बताया जा रहा है।
ई-शबरी योजना के तहत जनपद में 5 वर्ष तक के कुल 5,59,400 बच्चे, अक्टूबर 2017 में वजन दिवस के अवसर पर चिह्नित किए गए थे, जिसमें से कुपोषित बच्चों की संख्या 1,04,939 और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 39,771 थी। सरकार ने गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए अधिकारियों को गांव गोद लेकर उनको कुपोषण मुक्त करने का निर्देश दिया गया, जिसके तहत जिले के अधिकारियों द्वारा कुल 82 गांवों को गोद लिया गया। इन गांवों के कुपोषण ग्रसित बच्चों के परिवार को शौचालय, राशन कार्ड, मनरेगा जाब कार्ड, पेंशन आदि योजनाओं से लाभान्वित करना था। इन योजनाओं में सबसे जरूरी योजना थी गोद लिए गांव को ओडीएफ करने की, क्योंकि बिना गांव को खुले में शौचमुक्त किए कुपोषण मुक्त गांव का सपना पूरा नहीं हो सकता है। इसके तहत, जनपद में कार्य तो हुआ लेकिन जिला पंचायत राज विभाग अब तक मात्र 18 गांवों को ही ओडीएफ करा सका है। शेष 64 गांव ऐसे हैं, जिन्हें ओडीएफ कराया जाना बाकी है। अगर इन गांवों केेे ओडीएफ नहीं कराया गया तो इन्हें कुपोषण मुक्त करना एक सपने जैसा होगा।
हमने अधिकारियों के गोद लिए गांवों में से 18 गांवों को कुपोषण मुक्त कर दिया है, लेकिन ओडीएफ न होने के कारण शेष गांवों को कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सका है। जब तक ये गांव ओडीएफ नहीं होंगे तब तक कुपोषण से मुक्ति नहीं मिल सकती है। - इफ्तेखार अहमद, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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अधिकारियों के गोद लिए गांवों में तेजी से कार्य हो रहा है। आज ही तीन से चार गांवों को ओडीएफ कर दिया जाएगा। वैसे जब गांव से प्रस्ताव बनकर आता है तभी हम लोग कार्य कराते हैं। लेकिन अब इसमें तेजी आई है, उम्मीद है जल्द ही शेष बचे गांवों को भी ओडीएफ कर दिया जाएगा।
हैदर रईस, जिला प्रेरक टाटा ट्रस्ट।
पैसे की कमी के कारण इन गांवों में कार्य कराने में देरी हुई लेकिन पोषण समिति की बैठक में इन गांवों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराने का निर्देश मिला है, जिसके तहत अब इन गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है। जल्द ही अधिकारियों के गोद लिए सारे गांवों को ओडीएफ कर दिया जाएगा।
- सैय्यद हसन नकवी, जिला कंसल्टेंट
कुपोषण का ओडीएफ से बहुत ही गहरा संबंध है। क्योंकि बच्चों में ज्यादातर बीमारियां गंदगी और इंफेक्शन से फैलती है। गांव के ओडीएफ न होने पर लोग खुले में शौच जाएंगे जिससे बच्चों को अनेक प्रकार की संक्रामक बीमारियां होंगी। इससे वह अक्सर बीमार और कुपोषित होंगे। इसलिए कुपोषण से मुक्ति के लिए गांव का ओडीएफ होना जरूरी है। - डा. नीरज शर्मा, बाल रोग विशेषण, जिला महिला अस्पताल।
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ई-शबरी योजना के तहत जनपद में 5 वर्ष तक के कुल 5,59,400 बच्चे, अक्टूबर 2017 में वजन दिवस के अवसर पर चिह्नित किए गए थे, जिसमें से कुपोषित बच्चों की संख्या 1,04,939 और अति कुपोषित बच्चों की संख्या 39,771 थी। सरकार ने गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए अधिकारियों को गांव गोद लेकर उनको कुपोषण मुक्त करने का निर्देश दिया गया, जिसके तहत जिले के अधिकारियों द्वारा कुल 82 गांवों को गोद लिया गया। इन गांवों के कुपोषण ग्रसित बच्चों के परिवार को शौचालय, राशन कार्ड, मनरेगा जाब कार्ड, पेंशन आदि योजनाओं से लाभान्वित करना था। इन योजनाओं में सबसे जरूरी योजना थी गोद लिए गांव को ओडीएफ करने की, क्योंकि बिना गांव को खुले में शौचमुक्त किए कुपोषण मुक्त गांव का सपना पूरा नहीं हो सकता है। इसके तहत, जनपद में कार्य तो हुआ लेकिन जिला पंचायत राज विभाग अब तक मात्र 18 गांवों को ही ओडीएफ करा सका है। शेष 64 गांव ऐसे हैं, जिन्हें ओडीएफ कराया जाना बाकी है। अगर इन गांवों केेे ओडीएफ नहीं कराया गया तो इन्हें कुपोषण मुक्त करना एक सपने जैसा होगा।
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हमने अधिकारियों के गोद लिए गांवों में से 18 गांवों को कुपोषण मुक्त कर दिया है, लेकिन ओडीएफ न होने के कारण शेष गांवों को कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सका है। जब तक ये गांव ओडीएफ नहीं होंगे तब तक कुपोषण से मुक्ति नहीं मिल सकती है। - इफ्तेखार अहमद, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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अधिकारियों के गोद लिए गांवों में तेजी से कार्य हो रहा है। आज ही तीन से चार गांवों को ओडीएफ कर दिया जाएगा। वैसे जब गांव से प्रस्ताव बनकर आता है तभी हम लोग कार्य कराते हैं। लेकिन अब इसमें तेजी आई है, उम्मीद है जल्द ही शेष बचे गांवों को भी ओडीएफ कर दिया जाएगा।
हैदर रईस, जिला प्रेरक टाटा ट्रस्ट।
पैसे की कमी के कारण इन गांवों में कार्य कराने में देरी हुई लेकिन पोषण समिति की बैठक में इन गांवों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराने का निर्देश मिला है, जिसके तहत अब इन गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है। जल्द ही अधिकारियों के गोद लिए सारे गांवों को ओडीएफ कर दिया जाएगा।
- सैय्यद हसन नकवी, जिला कंसल्टेंट
कुपोषण का ओडीएफ से बहुत ही गहरा संबंध है। क्योंकि बच्चों में ज्यादातर बीमारियां गंदगी और इंफेक्शन से फैलती है। गांव के ओडीएफ न होने पर लोग खुले में शौच जाएंगे जिससे बच्चों को अनेक प्रकार की संक्रामक बीमारियां होंगी। इससे वह अक्सर बीमार और कुपोषित होंगे। इसलिए कुपोषण से मुक्ति के लिए गांव का ओडीएफ होना जरूरी है। - डा. नीरज शर्मा, बाल रोग विशेषण, जिला महिला अस्पताल।