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बारिश ने फिर बिगाड़ा किसानों का खेल
Updated Thu, 12 Apr 2018 12:04 AM IST
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आजमगढ़। मंगलवार की सुबह हुई झमाझम बारिश और कुछ इलाकों में पड़े ओले की मार से किसान अभी उबर भी नहीं पाए थे कि बुधवार की दोपहर में आई आंधी पानी ने उनकी रही सही उम्मीदों को भी धूमिल कर दिया। तहबरपुर और मार्टीनगंज क्षेत्र में ओले पड़ने से खेतों में खड़ी फसलों और आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। बुधवार को लगभग एक घंटे तक बारिश हुई है। कई इलाकों में तार टूटने से पूरे दिनभर लाइट गुल रही।
जनपद में मंगलवार की सुबह आंधी के साथ हुई झमाझम बारिश ने किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। बुधवार की सुबह से ही किसान खेतों में भीगे गेहूं के बोझ को सुखाने और बिखरे गेहूं के बोझ को बटोरने में जुटे थे। तभी दोपहर में अचानक तेज आंधी के साथ आसमान में काले बादल छा गए और बारिश ने बची मेहनत को मिट्टी में मिला दिया। तहबरपुर और मार्टीनगंज प्रतिनिधि के अनुसार बुधवार की दोपहर आंधी और पानी के साथ क्षेत्र में कई स्थानों पर ओले भी पड़े। इससे फसल भीग गई वहीं ओले पड़ने और तेज हवा से गेहूं की फसल लोट गई। मेजवां प्रतिनिधि के अनुसार फूलपुर के ग्रामीण इलाकों में बुधवार को तेज आंधी और पानी से गेहूं और आम को दुबारा काफी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर बिजली के तार गिरने से ब्रेक डाउन के कारण बिजली आपूर्ति बाधित है। दयाराम ने बताया कि अब मड़ाई का कार्य शुरू होने में कम से कम 10 दिन का समय लगेगा। सठियांव प्रतिनिधि के अनुसार बेमौसम बरसात ने किसानों की न केवल कमर तोड़ दी है बल्कि उनके सामने पशुओं के चारे की समस्या भी खड़ी हो गई है। कटानी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार लगातार दूसरे दिन बुधवार को आंधी के बाद बरसात हुई। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से क्षेत्र में तबाही मची हुई है। बिंद्राबाजार प्रतिनिधि के अनुसार बुधवार को तेज बरसात से क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ। जिसमें दुकान के साइन बोर्ड भी उड़े और खेत में पड़ा गेहूं फिर भीग गया। दिनभर लाइट गुल रही। विभाग के अधिकारी यह बताने में असमर्थ रहे कि लाइट कब आएगी देर शाम तक विद्युत सप्लाई चालू हो पाई। क्षेत्र के रानीपुर रजमो के बिंद्राबाजार में सड़कों के किनारे नालियां ना बनने से सड़कों पर बरसात का पानी रुका पड़ा है। आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर दोनों तरफ नालियां ना होने से बरसात का पानी जमा है।चौक बिंद्राबाजार से मेंहनगर रोड के हालात भी इसी कदर हैं वहीं राम जानकी मंदिर के सामने आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पूरी तरह से टूट चुका है। नेशनल इंडस्ट्रीज के सामने करीब 20 मीटर सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है जिसके कारण लोगों को परेशानी होती है।
ईंट भट्ठा मालिकों की कमर टूटी
आजमगढ़। विगत तीन दिनों से जनपद में हो रही बेमौसम बरसात ने किसानों के साथ ही सबसे ज्यादा नुकसान ईंट भट्ठा संचालकों को हुआ है। उनके लिए भट्ठे के संचालन में लगाई गई लागत को निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है।
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पहले रॉयल्टी और स्वच्छता प्रमाण पत्र के लिए जनपद में ईंट भट्ठों का संचालन ठप रहा। इन सबसे उबरने के बाद भट्ठा संचालकों ने ईंटों का निर्माण शुरू किया। उनके द्वारा बारिश से पूर्व ईंटों की पथाई का कार्य तेजी से कराया जा रहा था। साथ ही साथ ईंटों को पकाने का कार्य भी हो रहा था। क्योंकि बारिश में भट्ठों का संचालन ठप हो जाता है। लेकिन मौसम ने भट्ठा संचालकों को करारा धक्का पहुंचाया है। पथाई के बाद रखी गई कच्ची ईंटे पानी पड़ने से बर्बाद हो गई हैं। बारिश ने चिमनियों में लगी आग को भी कम कर दिया है। अब इस आग को दोबारा धधकाने के लिए उन्हें अतिरिक्त कोयला खर्चना होगा। जिले में हर भट्ठा मालिक को कम से पांच से छह लाख रुपये की चपत लगी है। भट्ठा मालिकों को कहना है कि इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। ईंटों को पकाने में भी अब हमें अतिरिक्त कोयला इस्तेमाल करना होगा। इन नुकसान के बाद जिले के कई भट्ठे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। आजमगढ़ ब्रिक किल्न एसोसिएशन के अध्यक्ष नसीम अहमद ने बताया कि बारिश ने भट्ठा संचालकों को बर्बाद कर दिया है। बड़ी पूंजी के भट्ठा संचालक तो किसी तरह से संभल जाएंगे लेकिन जो छोटी पूंजी वाले हैं उन्हें अपना भट्ठा बंद करना होगा। हम चाहे ईंटों का रेट कितना भी बढ़ा लें लेकिन इस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते हैं।
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जनपद में मंगलवार की सुबह आंधी के साथ हुई झमाझम बारिश ने किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। बुधवार की सुबह से ही किसान खेतों में भीगे गेहूं के बोझ को सुखाने और बिखरे गेहूं के बोझ को बटोरने में जुटे थे। तभी दोपहर में अचानक तेज आंधी के साथ आसमान में काले बादल छा गए और बारिश ने बची मेहनत को मिट्टी में मिला दिया। तहबरपुर और मार्टीनगंज प्रतिनिधि के अनुसार बुधवार की दोपहर आंधी और पानी के साथ क्षेत्र में कई स्थानों पर ओले भी पड़े। इससे फसल भीग गई वहीं ओले पड़ने और तेज हवा से गेहूं की फसल लोट गई। मेजवां प्रतिनिधि के अनुसार फूलपुर के ग्रामीण इलाकों में बुधवार को तेज आंधी और पानी से गेहूं और आम को दुबारा काफी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर बिजली के तार गिरने से ब्रेक डाउन के कारण बिजली आपूर्ति बाधित है। दयाराम ने बताया कि अब मड़ाई का कार्य शुरू होने में कम से कम 10 दिन का समय लगेगा। सठियांव प्रतिनिधि के अनुसार बेमौसम बरसात ने किसानों की न केवल कमर तोड़ दी है बल्कि उनके सामने पशुओं के चारे की समस्या भी खड़ी हो गई है। कटानी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार लगातार दूसरे दिन बुधवार को आंधी के बाद बरसात हुई। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से क्षेत्र में तबाही मची हुई है। बिंद्राबाजार प्रतिनिधि के अनुसार बुधवार को तेज बरसात से क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ। जिसमें दुकान के साइन बोर्ड भी उड़े और खेत में पड़ा गेहूं फिर भीग गया। दिनभर लाइट गुल रही। विभाग के अधिकारी यह बताने में असमर्थ रहे कि लाइट कब आएगी देर शाम तक विद्युत सप्लाई चालू हो पाई। क्षेत्र के रानीपुर रजमो के बिंद्राबाजार में सड़कों के किनारे नालियां ना बनने से सड़कों पर बरसात का पानी रुका पड़ा है। आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर दोनों तरफ नालियां ना होने से बरसात का पानी जमा है।चौक बिंद्राबाजार से मेंहनगर रोड के हालात भी इसी कदर हैं वहीं राम जानकी मंदिर के सामने आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पूरी तरह से टूट चुका है। नेशनल इंडस्ट्रीज के सामने करीब 20 मीटर सड़क पूरी तरह से टूट चुकी है जिसके कारण लोगों को परेशानी होती है।
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ईंट भट्ठा मालिकों की कमर टूटी
आजमगढ़। विगत तीन दिनों से जनपद में हो रही बेमौसम बरसात ने किसानों के साथ ही सबसे ज्यादा नुकसान ईंट भट्ठा संचालकों को हुआ है। उनके लिए भट्ठे के संचालन में लगाई गई लागत को निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है।
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पहले रॉयल्टी और स्वच्छता प्रमाण पत्र के लिए जनपद में ईंट भट्ठों का संचालन ठप रहा। इन सबसे उबरने के बाद भट्ठा संचालकों ने ईंटों का निर्माण शुरू किया। उनके द्वारा बारिश से पूर्व ईंटों की पथाई का कार्य तेजी से कराया जा रहा था। साथ ही साथ ईंटों को पकाने का कार्य भी हो रहा था। क्योंकि बारिश में भट्ठों का संचालन ठप हो जाता है। लेकिन मौसम ने भट्ठा संचालकों को करारा धक्का पहुंचाया है। पथाई के बाद रखी गई कच्ची ईंटे पानी पड़ने से बर्बाद हो गई हैं। बारिश ने चिमनियों में लगी आग को भी कम कर दिया है। अब इस आग को दोबारा धधकाने के लिए उन्हें अतिरिक्त कोयला खर्चना होगा। जिले में हर भट्ठा मालिक को कम से पांच से छह लाख रुपये की चपत लगी है। भट्ठा मालिकों को कहना है कि इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। ईंटों को पकाने में भी अब हमें अतिरिक्त कोयला इस्तेमाल करना होगा। इन नुकसान के बाद जिले के कई भट्ठे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। आजमगढ़ ब्रिक किल्न एसोसिएशन के अध्यक्ष नसीम अहमद ने बताया कि बारिश ने भट्ठा संचालकों को बर्बाद कर दिया है। बड़ी पूंजी के भट्ठा संचालक तो किसी तरह से संभल जाएंगे लेकिन जो छोटी पूंजी वाले हैं उन्हें अपना भट्ठा बंद करना होगा। हम चाहे ईंटों का रेट कितना भी बढ़ा लें लेकिन इस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते हैं।