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विद्यालय के जमीन नहीं फिर भी जारी हो गई 35 लाख की निधि

Tue, 05 Dec 2017 12:02 AM IST
Updated Tue, 05 Dec 2017 12:02 AM IST
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विद्यालय के जमीन नहीं फिर भी जारी हो गई 35 लाख की निधि
आजमगढ़। मेंहनगर तहसील क्षेत्र के सिंहपुर गांव में यमुना शिक्षा निकेतन सिंहपुर और जमुना स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनिहा मौली सिंहपुर के नाम पर 35 लाख रुपये की विधायक निधि जारी कर दी गई। जबकि उस विद्यालय के स्थान पर यहां माध्यमिक विद्यालय संचालित होता है। सिंहपुर गांव में जमुना स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक कैलाश पुत्र रामफेर के नाम जमीन है, लेकिन यमुना शिक्षा निकेतन सिंहपुर के नाम पर कोई भूमि दर्ज नहीं है। इसके बाद भी प्रबंधक से विधायक निधि की वसूली के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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जनपद में विधायक निधि और सांसद निधि में व्यापक पैमाने पर गोलमाल का खुलासा 2014 में हाईकोर्ट में दाखिल एक पीआईएल से हुआ। जब हाईकोर्ट के आदेश पर जिले के 92 विद्यालयों की जांच की गई तो पाया गया कि बहुत से विद्यालयों के पास जमीन भी नहीं है लेकिन उनके नाम पर लाखों रुपये की विधायक या सांसद निधि जारी की गई है। ऐसा ही मामला मेंहनगर तहसील के सिंहपुर गांव का है। जिसमें प्रबंधक द्वारा जमुना शिक्षा निकेतन सिंहपुर के नाम पर विद्यालय की मान्यता ली गई। विद्यालय भवन निर्माण के लिए तत्कालीन एमएलसी कमला प्रसाद द्वारा 10 लाख रुपये की निधि दी गई। जांच में दो बातें सामने आई पीडी की जांच में उक्त विद्यालय के नाम पर जमीन पाई गई लेकिन तत्कालीन सीआरओ की जांच में उक्त विद्यालय के नाम कोई भूमि दर्ज नहीं पाई गई। वहीं जमुना स्मारक जूनियर हाईस्कूल सिंहपुर के लिए सांसद दारा सिंह चौहान द्वारा 15 लाख रुपये की निधि जारी की गई। एमएलसी यशवंत सिंह द्वारा 10 लाख की निधि दी गई। हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन सीआरओ ने जांच में पाया कि जमुना स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनिहा मौली सिंहपुर के प्रबंधक कैलाश पुत्र रामफेर के नाम जमीन अंकित है। इस भूमि पर विद्यालय भवन बना है। इसी विद्यालय में यमुना शिक्षा निकेतन का भी पठन-पाठन कार्य होता है। लेकिन सूत्रों की मानें तो इन विद्यालयों के स्थान पर इस जगह माध्यमिक विद्यालय का संचालन होता है।
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इनसेट--
प्राइमरी विद्यालय के लिए पांच कमरे और जूनियर के पांच कमरों की जरूरत होती है। इन कमरों के उपलब्ध होने पर ही विद्यालय को मान्यता दी जाती है। पांच कमरों को बनाने में 10 लाख रुपये लागत आती है। ऐसे में इन दोनों विद्यालयों को 22 कमरों के निर्माण के लिए निर्धारित लागत से अधिक विधायक निधि कैसे जारी कर दी गई। हाइकोर्ट के आदेश पर हुई जांच के बाद भी उक्त विद्यालय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारी भी उक्त मामले से कन्नी काटते नजर आ रहे हैं। जबकि सांसद और विधायक निधि के नाम पर जिले में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है।
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कोट--
मुझे इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। क्योंकि यह मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। इसलिए इसके बारे में कुछ भी बताना मुश्किल है। यह फाइल हमारे बाबू के पास है उसे देखने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
दुर्गादत्त शुक्ला, परियोजना निदेशक डीआरडीए।
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