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नगर और बाजारों में अतिक्रमण के कारण चलना हुआ दूभर
Updated Fri, 21 Jul 2017 11:22 PM IST
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आजमगढ़। शहर हो या ग्रामीण बाजार हर जगह पटरियों पर हुए अतिक्रमण ने सड़कों को संकरा बना दिया है। जिसका परिणाम है कि लोगों को आवागमन में हमेशा जाम की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। प्रशासन कभी-कभार कार्रवाई के नाम पर पटरियों से अतिक्रमण को हटाता है लेकिन कुछ दिन बाद ही सबकुछ पहले की तरह हो जाता है।
नगर क्षेत्र में अगर मातबरगंज से लेकर पहाड़पुर और बदरका से लेकर कालीनगंज मार्ग की हालत सबसे बदतर है। दूकानदार सड़कों की पटरियों तक अपनी दूकान लगाते हैं। बाकी जगह पर ठेले वाले ठेला लगाकर आधी सड़क पर कब्जा जमा लेते हैं। इसके बाद अगर कुछ जगह बचती है तो उस पर रिक्शा वालों और बाइक वालों का कब्जा होता है। पुरानी कोतवाली से तकिया तक तो सड़क के किनारे एक तो दूकानदारों ने सड़क से सटाकर अपनी दूकानें बना रखी हैं। दूसरे इनके यहां बाइक से आने वाले ग्राहक सड़क पर वाहन खड़ा करके खरीदारी करते हैं। जिसके कारण इन मार्गों से होकर गुजरने वाले लोगों को हमेशा जाम की समस्या से दो चार होना पड़ता है। 10 मिनट के रास्ते को तय करने में लोगों को घंटों समय बर्बाद करना पड़ता है। वहीं नालियों पर भी लोगों ने कब्जा जमा रखा है जिसकी वजह से उनकी सफाई ठीक ढंग से नहीं हो पाती है। जो बरसात के मौसम में जलजमाव का कारण बनती है। प्रशासन द्वारा कार्रवाई कर इन दुकानों को पटरी से हटाया जाता है लेकिन कुछ दिन बाद ही फिर दूकानें अपनी जगह पर विद्यमान होती हैं।
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नगर क्षेत्र में अगर मातबरगंज से लेकर पहाड़पुर और बदरका से लेकर कालीनगंज मार्ग की हालत सबसे बदतर है। दूकानदार सड़कों की पटरियों तक अपनी दूकान लगाते हैं। बाकी जगह पर ठेले वाले ठेला लगाकर आधी सड़क पर कब्जा जमा लेते हैं। इसके बाद अगर कुछ जगह बचती है तो उस पर रिक्शा वालों और बाइक वालों का कब्जा होता है। पुरानी कोतवाली से तकिया तक तो सड़क के किनारे एक तो दूकानदारों ने सड़क से सटाकर अपनी दूकानें बना रखी हैं। दूसरे इनके यहां बाइक से आने वाले ग्राहक सड़क पर वाहन खड़ा करके खरीदारी करते हैं। जिसके कारण इन मार्गों से होकर गुजरने वाले लोगों को हमेशा जाम की समस्या से दो चार होना पड़ता है। 10 मिनट के रास्ते को तय करने में लोगों को घंटों समय बर्बाद करना पड़ता है। वहीं नालियों पर भी लोगों ने कब्जा जमा रखा है जिसकी वजह से उनकी सफाई ठीक ढंग से नहीं हो पाती है। जो बरसात के मौसम में जलजमाव का कारण बनती है। प्रशासन द्वारा कार्रवाई कर इन दुकानों को पटरी से हटाया जाता है लेकिन कुछ दिन बाद ही फिर दूकानें अपनी जगह पर विद्यमान होती हैं।
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