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पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ खाद्य सुरक्षा के लिए आईपीएम पर जोर 19-42-16

Tue, 22 May 2018 11:56 PM IST
Updated Tue, 22 May 2018 11:56 PM IST
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पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ खाद्य सुरक्षा के लिए आईपीएम पर जोर 19-42-16
आजमगढ़।
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कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा में खरीफ की प्रमुख फसलों में लगने वाले कीट व्याधियों के लिए आईपीएम की नवीनतम तकनीकी पर आयोजित दो दिवसीय प्रसार कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण मंगलवार को संपन्न हुआ। इस दौरान प्राविधिक सहायकों को पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ खाद्य सुरक्षा के लिए आईपीएम के अधिक प्रचार-प्रसार के लिए सुझाव दिया गया। आईपीएम या समन्वित नाशीजीव प्रबंधन सभी वैकल्पिक सुरक्षा उपायों का सम्मिलित रूप है, जिसमें जलवायु और भूमि का प्रदूषण नहीं होता।

केंद्र के वरिष्ठ फसल सुरक्षा वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण के समन्वयक डा. रुद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बीज और भूमि शोधन के लिए ट्राइकोडर्मा की 8-10 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित कराने के लिए उपयोग कराएं। भूमि शोधन भी इसी फंफूदनाशी से करें। केंद्र के वरिष्ठ फसल उत्पादन वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने गर्मी में गहरी जुताई, उन्नतिशील प्रजातियों का प्रयोग, लाइन से बुआई, फसल चक्र और फसलों के रोग अवरोधी बीज के विषय में प्रकाश डाला। वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एलसी वर्मा ने पारिस्थितिक तंत्र में पक्षियों के महत्व को बताया। डा. डीके पांडेय ने बताया कि गुणवत्तायुक्त उत्पादन से किसानों की आय भी बढ़ाई जा सकती है। राना पियूष सिंह ने भी प्रक्षेत्र प्रबंधन में आईपीएम के अंतर्गत की जाने वाली क्रियाओं को बताया। प्रशिक्षण में रानी की सराय, पल्हनी, मुहम्मदपुर आदि ब्लाकों के कुल 25 प्रसार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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