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Azamgarh News: पांच साल में ग्राम निधि से 16.53 अरब हुए खर्च, 1810 गांव फिर भी असुरक्षित
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रानी की सराय ब्लाक के कोटिला ग्रामसभा के शंकरपुर चेकपोस्ट पर नहीं लगा कैमरा। संवाद
आजमगढ़। ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया ऑपरेशन त्रिनेत्र जनपद में धरातल पर उतरता नहीं दिख रहा है। शासन के निर्देशों के बावजूद जिले की 1810 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, चौराहों और तिराहों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जा सके हैं। स्थिति यह है कि पिछले पांच सालों में ग्राम निधि से विभिन्न विकास कार्यों पर 16.53 अरब रुपये खर्च हो गए, लेकिन ग्रामीण की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं मिली।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव पंचायती राज की ओर से जारी शासना देश में ग्राम पंचायतों को अपने संसाधनों से सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसका उद्देश्य अपराध नियंत्रण, असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर निगरानी और घटनाओं के त्वरित खुलासे में पुलिस की मदद करना था। पुलिस विभाग ने भी इसे गांवों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अहम कदम बताया था। हालांकि, जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की।
ग्राम निधि का उपयोग हैंडपंप मरम्मत, रिबोर, नाली-खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्यों पर होता रहा। सीसीटीवी स्थापना की योजना कागजों तक सीमित रह गई। जिले की ग्रामीण बाजारों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बन सकी।
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वित्तीय वर्ष 2021-22 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव पंचायती राज की ओर से जारी शासना देश में ग्राम पंचायतों को अपने संसाधनों से सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसका उद्देश्य अपराध नियंत्रण, असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर निगरानी और घटनाओं के त्वरित खुलासे में पुलिस की मदद करना था। पुलिस विभाग ने भी इसे गांवों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अहम कदम बताया था। हालांकि, जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की।
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ग्राम निधि का उपयोग हैंडपंप मरम्मत, रिबोर, नाली-खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, प्रकाश व्यवस्था और अन्य विकास कार्यों पर होता रहा। सीसीटीवी स्थापना की योजना कागजों तक सीमित रह गई। जिले की ग्रामीण बाजारों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बन सकी।
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